राजकोट में ₹86.63 लाख की शराब जब्त, एक गिरफ्तार; सात अभी भी फरार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस की राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (SMC) ने 21 सितंबर 2026 को राजकोट के अहमदाबाद-राजकोट राजमार्ग के निकट छापेमारी कर ₹86.63 लाख मूल्य की भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) और बीयर बरामद की। जब्त शराब, वाहन और अन्य सामग्री मिलाकर बरामद संपत्ति का कुल मूल्य ₹1.10 करोड़ आँका गया है।
छापेमारी का घटनाक्रम
पुलिस निरीक्षक पीबी जेबलिया के नेतृत्व में SMC की टीम ने हवाई अड्डा पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में बामनभोर गाँव के पास राधे-कृष्णा होटल के निकट दबिश दी। टीम ने IMFL और बीयर के कुल 604 बक्से ज़ब्त किए, जिनमें 21,792 बोतलें शामिल थीं। शराब का मूल्य अधिकारियों ने ₹86,63,712 बताया।
इसके अलावा, एक वाहन और अन्य सामग्री भी ज़ब्त की गई, जिससे कुल बरामदगी ₹1,10,91,012 पर पहुँच गई।
कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में निषेध अधिनियम की धाराओं 65(A)(E), 81, 83, 98(2) और 116(B) तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 336(2), 336(3) और 340(2) के तहत मामला दर्ज किया है। इस प्रकरण में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है।
गिरफ्तारी और वांछित आरोपी
अब तक एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि सात अभी भी फरार हैं। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान राजस्थान के ब्यावर जिले के सोबियाना गाँव के निवासी दिलीप सिंह रावत के रूप में हुई है।
फरार आरोपियों में राजसमंद जिले के कलां के ठिकरवास के निवासी जितेंद्र सिंह, ट्रक मालिक सुरेश, और चंडीगढ़ में जितेंद्र सिंह का एक अज्ञात सहयोगी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, एक अज्ञात व्यक्ति जिसने कथित तौर पर शराब लादने के लिए चार पहिया वाहन का उपयोग किया, एक अन्य जो परिवहन पर्ची लेकर मोटरसाइकिल पर आया, और वह व्यक्ति जिसने कथित तौर पर राजकोट में इस खेप का ऑर्डर दिया — सभी की तलाश जारी है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश की पृष्ठभूमि
यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक (DGP) जीएस मलिक के उस निर्देश के तहत की गई है, जिसमें उन्होंने गुजरात में अवैध शराब और जुआ गतिविधियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा था। गौरतलब है कि गुजरात एक मद्यनिषेध राज्य है, फिर भी यहाँ अवैध शराब की तस्करी एक लगातार चुनौती बनी रहती है।
आगे की जाँच
राज्य निगरानी प्रकोष्ठ के अनुसार जब्त शराब और वांछित आरोपियों के संबंध में जाँच अभी भी जारी है। फरार आरोपियों की राजस्थान और चंडीगढ़ से संभावित संलिप्तता को देखते हुए यह मामला अंतर-राज्यीय तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करता है।