क्या गुजरात में महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम कर सकेंगी? संशोधन विधेयक पास!

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क्या गुजरात में महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम कर सकेंगी? संशोधन विधेयक पास!

सारांश

गुजरात विधानसभा ने एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया है, जो महिलाओं को अपनी सहमति से नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति देगा। यह कदम उनके पेशेवर अधिकारों और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। जानें इस विधेयक के प्रावधान और इसके लाभ।

मुख्य बातें

गुजरात विधानसभा ने महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी है।
सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी प्रावधान अनिवार्य हैं।
महिलाएं अपनी सहमति से ही नाइट शिफ्ट में काम कर सकेंगी।
ओवरटाइम के लिए पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी।
यह विधेयक श्रमिक कल्याण और औद्योगिक विकास का संतुलन साधता है।

गांधीनगर, 10 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात विधानसभा ने फैक्ट्रियों (गुजरात संशोधन) विधेयक 2025 को मंजूरी दे दी है, जिसके अंतर्गत महिलाएं अपनी सहमति से नाइट शिफ्ट में कार्य कर सकेंगी। हालांकि, इसके लिए सुरक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित प्रावधानों को अनिवार्य किया गया है।

विधानसभा में यह विधेयक प्रस्तुत करते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्री बलवंतसिंह राजपूत ने कहा कि यह कदम महिलाओं को समानता, पेशे की स्वतंत्रता, और आर्थिक अधिकार प्रदान करेगा। उन्होंने बताया, “सहमति आधारित नाइट ड्यूटी से महिलाएं अपने परिवार की आय में योगदान कर सकेंगी और दिन के समय परिवार को भी समय दे पाएंगी।”

मंत्री ने बताया कि महिलाएं नाइट शिफ्ट में तभी काम कर पाएंगी जब उनकी सहमति हो और सुरक्षा इंतजाम पूरे हों। दैनिक कार्य समय अधिकतम 12 घंटे तक बढ़ाया जा सकेगा, लेकिन साप्ताहिक सीमा 48 घंटे ही रहेगी। साथ ही, लगातार छह घंटे काम करने के बाद आधा घंटे का विश्राम अनिवार्य होगा।

चार लगातार 12 घंटे की शिफ्ट पूरी करने पर कर्मचारियों को दो दिन का सवैतनिक अवकाश मिलेगा। तीन महीने की अवधि में अधिकतम 125 घंटे का ओवरटाइम संभव होगा, लेकिन इसके लिए पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी। राज्य सरकार इन प्रावधानों की अवधि और लागू क्षेत्र निर्धारित करेगी और परिस्थितियों के अनुसार अनुमति वापस भी ले सकेगी।

मंत्री ने कहा कि ये सुधार श्रमिक कल्याण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन साधते हैं। गुजरात नए उद्योग और निवेश आकर्षित कर रहा है और लचीले श्रम प्रावधान 24 घंटे उत्पादन की जरूरत वाले क्षेत्रों में सहायक होंगे।

उन्होंने बताया कि महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए 16 विशेष प्रावधान अनिवार्य होंगे। खासतौर पर सेमीकंडक्टर और माइक्रोचिप जैसे उद्योग, जहां लगातार उत्पादन जरूरी है, इस कानून से लाभान्वित होंगे।

मंत्री ने कहा कि यह विधेयक संविधान में समानता के सिद्धांतों और गुजरात हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप है। उन्होंने कहा, “यह बिल महिलाओं को सुरक्षित वातावरण में अपनी इच्छा से नाइट शिफ्ट में काम करने का कानूनी अधिकार देता है।”

यह विधेयक फैक्ट्रियों अधिनियम, 1948 की छह धाराओं में संशोधन करता है, जो कार्य घंटे, ओवरटाइम, विश्राम और महिलाओं के रोजगार से संबंधित हैं। विधानसभा में इसे रोजगार सृजन, निवेश आकर्षित करने, और औद्योगिक माहौल बेहतर बनाने पर जोर देते हुए पारित किया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। यह विधेयक श्रमिक कल्याण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन साधने का प्रयास करता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या महिलाएं बिना सहमति के नाइट शिफ्ट में काम कर सकती हैं?
नहीं, महिलाएं नाइट शिफ्ट में केवल अपनी सहमति से काम कर सकेंगी।
क्या नाइट शिफ्ट के दौरान सुरक्षा प्रावधान अनिवार्य हैं?
हाँ, नाइट शिफ्ट के दौरान सभी सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है।
क्या ओवरटाइम के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है?
जी हाँ, ओवरटाइम करने के लिए पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी।
महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान क्या हैं?
महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए 16 विशेष प्रावधान अनिवार्य होंगे।
क्या यह विधेयक औद्योगिक विकास में सहायक होगा?
जी हाँ, यह विधेयक औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन में सहायक होगा।
राष्ट्र प्रेस