17 अक्टूबर 2026
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मोरबी राजमाता विजयराज कुंवरबा का 97 वर्ष की आयु में निधन, पूरे क्षेत्र में शोक

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मोरबी राजमाता विजयराज कुंवरबा का 97 वर्ष की आयु में निधन, पूरे क्षेत्र में शोक

सारांश

मोरबी राजपरिवार की वरिष्ठ सदस्य और दिवंगत महाराजा महेंद्रसिंहजी की धर्मपत्नी राजमाता विजयराज कुंवरबा साहिबा का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर मुंबई से चार्टर विमान द्वारा मोरबी लाया जाएगा। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

मुख्य बातें

राजमाता विजयराज कुंवरबा साहिबा का 17 अक्टूबर 2026 को 97 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
वे मोरबी राजपरिवार की वरिष्ठ सदस्य और दिवंगत महाराजा महेंद्रसिंहजी की धर्मपत्नी थीं।
पार्थिव शरीर मुंबई से चार्टर विमान द्वारा राजकोट और फिर मोरबी लाया जाएगा।
अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की जानकारी राजपरिवार की ओर से जारी की जाएगी।
मोरबी शहर और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल; राजनीतिक नेताओं व सामाजिक संगठनों ने श्रद्धांजलि दी।

गुजरात के मोरबी राजपरिवार की वरिष्ठ सदस्य और दिवंगत महाराजा महेंद्रसिंहजी की धर्मपत्नी राजमाता विजयराज कुंवरबा साहिबा का 17 अक्टूबर 2026 को 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से मोरबी शहर और आसपास के पूरे क्षेत्र में शोक की गहरी लहर फैल गई है।

निधन और शोक का माहौल

राजमाता विजयराज कुंवरबा के निधन की खबर सामने आते ही मोरबी के राजपरिवार के सदस्यों, शुभचिंतकों और शहरवासियों में दुख की भावना व्याप्त हो गई। राजनीतिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय जनता की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। 97 वर्ष की दीर्घायु में राजपरिवार की इस वरिष्ठ सदस्या का जाना एक युग के अंत जैसा माना जा रहा है।

पार्थिव शरीर मोरबी लाया जाएगा

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राजमाता विजयराज कुंवरबा का पार्थिव शरीर मुंबई से चार्टर विमान द्वारा राजकोट लाया जाएगा। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को उसी दिन शाम मोरबी पहुँचाने की व्यवस्था की जा रही है। अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की विस्तृत जानकारी राजपरिवार की ओर से जारी किए जाने की संभावना है।

राजमाता का जीवन और परिचय

राजमाता विजयराज कुंवरबा दिवंगत महाराजा महेंद्रसिंहजी की धर्मपत्नी के रूप में मोरबी राजपरिवार से जुड़ी रहीं। वे राजपरिवार की परंपराओं को जीवित रखने के साथ-साथ सामाजिक और लोक कल्याण कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाती थीं। उनके इसी समर्पण और सहज व्यक्तित्व के कारण मोरबी के नागरिकों में उनके प्रति विशेष सम्मान और स्नेह का भाव था।

राजपरिवार और शहरवासियों की प्रतिक्रिया

राजमाता के निधन पर राजपरिवार के सदस्य और शुभचिंतक अंतिम विदाई देने के लिए एकत्रित हो रहे हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक व्यक्तित्वों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। गौरतलब है कि मोरबी का राजपरिवार इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत का अभिन्न हिस्सा रहा है।

आगे की प्रक्रिया

पार्थिव शरीर के मोरबी पहुँचने के बाद अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया सम्पन्न की जाएगी। राजपरिवार की ओर से इस संदर्भ में औपचारिक सूचना शीघ्र जारी होने की उम्मीद है। शहरवासियों की नजरें अब इस अंतिम विदाई समारोह पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मोरबी की सांस्कृतिक स्मृति का एक महत्वपूर्ण अध्याय बंद होने जैसा है। गौरतलब है कि मोरबी 2022 के झूला पुल हादसे के बाद से राष्ट्रीय चर्चा में रहा है, और ऐसे में राजपरिवार की एक वरिष्ठ हस्ती का जाना स्थानीय समाज की सामूहिक भावना को और गहराई से प्रभावित करता है। राजमाता जैसे व्यक्तित्व लोक स्मृति में सामाजिक सेवा और परंपरा के प्रतीक के रूप में जीवित रहते हैं, जो औपचारिक राजनीति से परे एक सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतिनिधित्व करते हैं।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजमाता विजयराज कुंवरबा कौन थीं?
राजमाता विजयराज कुंवरबा साहिबा गुजरात के मोरबी राजपरिवार की वरिष्ठ सदस्य और दिवंगत महाराजा महेंद्रसिंहजी की धर्मपत्नी थीं। वे राजपरिवार की परंपराओं के साथ-साथ सामाजिक और लोक कल्याण कार्यों में भी सक्रिय रहती थीं।
राजमाता विजयराज कुंवरबा का निधन कब और किस आयु में हुआ?
राजमाता विजयराज कुंवरबा साहिबा का निधन 17 अक्टूबर 2026 को 97 वर्ष की आयु में हुआ। उनके निधन की खबर फैलते ही मोरबी और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
राजमाता का अंतिम संस्कार कहाँ होगा?
उनका पार्थिव शरीर मुंबई से चार्टर विमान द्वारा राजकोट लाया जाएगा और फिर मोरबी पहुँचाया जाएगा। अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की विस्तृत जानकारी राजपरिवार की ओर से जल्द जारी किए जाने की संभावना है।
मोरबी राजपरिवार का इतिहास क्या है?
मोरबी गुजरात का एक ऐतिहासिक रजवाड़ा रहा है जो अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत के लिए जाना जाता है। दिवंगत महाराजा महेंद्रसिंहजी और राजमाता विजयराज कुंवरबा इस परंपरा के केंद्र में रहे।
राजमाता के निधन पर किन-किन ने श्रद्धांजलि दी?
राजनीतिक नेताओं, सामाजिक संगठनों, राजपरिवार के सदस्यों और मोरबी के शहरवासियों की ओर से राजमाता को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। उनके प्रति सम्मान और स्नेह का भाव पूरे क्षेत्र में व्याप्त है।
राष्ट्र प्रेस
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