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पीएमओ ने एक्स पर साझा किया लेख: गुजरात का जल प्रबंधन मॉडल ग्लोबल साउथ के लिए बना मिसाल

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पीएमओ ने एक्स पर साझा किया लेख: गुजरात का जल प्रबंधन मॉडल ग्लोबल साउथ के लिए बना मिसाल

सारांश

पीएमओ ने एक्स पर साझा लेख में गुजरात के जल-प्रबंधन सुधारों को ग्लोबल साउथ के लिए मॉडल बताया। 2001-2014 के मोदी-युग की पहलों को राष्ट्रीय कार्यक्रमों की नींव करार दिया गया। इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक के नौवें संस्करण की पृष्ठभूमि में आया यह लेख भारत की बढ़ती वैश्विक जल-नेतृत्व की भूमिका को रेखांकित करता है।

मुख्य बातें

पीएमओ ने 6 अक्टूबर 2026 को एक्स पर लेख साझा कर गुजरात के जल-प्रबंधन मॉडल को ग्लोबल साउथ के लिए अनुकरणीय बताया।
2001 से 2014 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में गुजरात में शुरू की गई पहलें राष्ट्रीय जल कार्यक्रमों की 'प्रयोगशाला' रहीं।
लेख में जल जीवन मिशन , नमामि गंगे , अटल भूजल योजना , जल शक्ति अभियान और 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' का उल्लेख।
इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक के नौवें संस्करण में जलवायु-लचीला जल प्रबंधन मुख्य विषय रहा।
जल सुरक्षा के लिए बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय संस्थाओं को अनिवार्य बताया गया।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत लेख साझा किया, जिसमें कहा गया है कि भारत का जल-प्रबंधन मॉडल — विशेष रूप से गुजरात में अपनाए गए सुधार — ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक व्यावहारिक और अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। लेख में रेखांकित किया गया है कि जल सुरक्षा केवल बुनियादी ढाँचे के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए सुदृढ़ स्थानीय संस्थाओं और सामुदायिक भागीदारी की भी अनिवार्य भूमिका है।

पीएमओ की एक्स पोस्ट में क्या कहा गया

पीएमओ ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'भारत से, जल-शासन का एक मॉडल व्यापक ग्लोबल साउथ के लिए उपयोगी सीख दे रहा है। जल सुरक्षा केवल बुनियादी ढाँचे के निर्माण के बारे में नहीं है, बल्कि अच्छी योजना, मजबूत स्थानीय प्रणालियों और जल प्रबंधन में समुदायों को शामिल करने के बारे में भी है।' लेख के अनुसार, गुजरात के अनुभवों को एक प्रयोगशाला की तरह इस्तेमाल किया गया, जिनसे प्राप्त सीख को बाद में राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया।

गुजरात मॉडल की केंद्रीय भूमिका

लेख में 2001 से 2014 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में गुजरात में शुरू की गई जल-प्रबंधन पहलों को विशेष महत्व दिया गया है। इन सुधारों ने उस अनुभव की नींव रखी, जिसे 2014 के बाद देशव्यापी कार्यक्रमों में विस्तारित किया गया। इनमें जल जीवन मिशन, जल शक्ति अभियान, स्वच्छ भारत मिशन, नमामि गंगे, अटल भूजल योजना और 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' कार्यक्रम प्रमुख हैं।

लेख के अनुसार, इन कार्यक्रमों ने जल प्रशासन, नदियों के पुनर्जीवन, जल एवं स्वच्छता की पहुँच बढ़ाने और समुदाय-आधारित जल संरक्षण को नई दिशा दी है।

इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक की पृष्ठभूमि

यह लेख हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक' के नौवें संस्करण की पृष्ठभूमि में आया है, जिसका मुख्य विषय 'जलवायु-लचीला जल प्रबंधन' था। चर्चा में पिछले एक दशक की उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों — जैसे जल आपूर्ति को टिकाऊ बनाना, जल के कुशल उपयोग को बढ़ावा देना, और उपयोग किए जा चुके पानी को पर्यावरणीय तथा आर्थिक संसाधन के रूप में देखना — पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

वैश्विक जल संकट में भारत की बढ़ती प्रासंगिकता

लेख में रेखांकित किया गया है कि वैश्विक जल क्षेत्र में भारत का प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। जलवायु संबंधी बढ़ते खतरों — बाढ़ और सूखे जैसी चरम स्थितियों — से जूझते हुए भारत ने जो अनुभव अर्जित किया है, वह उन ग्लोबल साउथ देशों के लिए सीधे प्रासंगिक है जो समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब जल संकट को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता तेज हो रही है और विकासशील देश दीर्घकालिक समाधान तलाश रहे हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि भारत अब न केवल जल-संकट प्रभावित देश की छवि से बाहर निकल रहा है, बल्कि जल-शासन के मामले में एक संभावित 'नॉलेज पार्टनर' के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत के इन मॉडलों को अनुकूलित कर अन्य देशों में लागू किया जाए, तो ग्लोबल साउथ में जल सुरक्षा की दिशा में ठोस प्रगति संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित 'सॉफ्ट पावर' कथा-निर्माण है — जो गुजरात के मुख्यमंत्री काल की उपलब्धियों को प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रीय और वैश्विक विरासत से जोड़ता है। हालाँकि, यह देखना उचित होगा कि जल जीवन मिशन जैसे कार्यक्रमों के कार्यान्वयन को लेकर कैग और संसदीय समितियों ने कई राज्यों में प्रगति की असमानता पर सवाल उठाए हैं। वैश्विक मंचों पर भारत की जल-नेतृत्व की छवि तभी टिकाऊ होगी, जब घरेलू स्तर पर भूजल-ह्रास, अंतर-राज्यीय जल विवाद और शहरी जल-असमानता जैसी चुनौतियों का समाधान भी उसी गति से हो।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमओ ने गुजरात के जल प्रबंधन मॉडल को लेकर क्या कहा?
पीएमओ ने 6 अक्टूबर 2026 को एक्स पर साझा लेख में कहा कि गुजरात में किए गए जल-प्रबंधन सुधार ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक व्यावहारिक उदाहरण हैं। लेख में रेखांकित किया गया कि जल सुरक्षा के लिए बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ सामुदायिक भागीदारी और सुदृढ़ स्थानीय संस्थाएँ भी आवश्यक हैं।
गुजरात का जल प्रबंधन मॉडल क्या है और यह राष्ट्रीय कार्यक्रमों से कैसे जुड़ा है?
2001 से 2014 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में गुजरात में जल-प्रबंधन सुधार शुरू किए गए, जिन्हें लेख में एक 'प्रयोगशाला' की संज्ञा दी गई है। इन अनुभवों को 2014 के बाद जल जीवन मिशन, जल शक्ति अभियान, नमामि गंगे और अटल भूजल योजना जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में आगे बढ़ाया गया।
इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक 2026 में क्या चर्चा हुई?
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक के नौवें संस्करण का मुख्य विषय 'जलवायु-लचीला जल प्रबंधन' था। इसमें जल आपूर्ति की स्थिरता, कुशल जल उपयोग और उपयोग किए जा चुके पानी को पर्यावरणीय व आर्थिक संसाधन के रूप में देखने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
ग्लोबल साउथ के लिए भारत का जल अनुभव क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
लेख के अनुसार, भारत ने जलवायु-जनित बाढ़ और सूखे जैसी चरम स्थितियों से निपटने का जो अनुभव अर्जित किया है, वह उन विकासशील देशों के लिए सीधे प्रासंगिक है जो समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। वैश्विक जल संकट गहराने के साथ भारत की भूमिका एक संभावित 'नॉलेज पार्टनर' के रूप में उभर रही है।
भारत के किन राष्ट्रीय जल कार्यक्रमों का लेख में उल्लेख है?
लेख में स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, जल शक्ति अभियान, नमामि गंगे, अटल भूजल योजना और 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया है। इन्हें गुजरात के जल-सुधार अनुभवों की राष्ट्रीय स्तर पर निरंतरता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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