गुलजार सिंह मामला: तरुण चुघ ने संगरूर में परिवार से मुलाकात की, केंद्रीय जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को संगरूर जिले के तूर बंजारा गांव पहुंचकर दिवंगत गुलजार सिंह के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने गुलजार की माता सहित अन्य परिजनों के साथ शोक साझा किया और न्याय दिलाने के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। चुघ के अनुसार, यह मामला पंजाब में नशे के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
मामले की पृष्ठभूमि
परिजनों के अनुसार, गुलजार सिंह ने अपने गांव में खुलेआम बिक रहे नशे और उसकी चपेट में आ रहे युवाओं के विरुद्ध प्रशासन से शिकायत की थी। तरुण चुघ ने सवाल उठाया कि क्या भगवंत मान सरकार में नशे के खिलाफ शिकायत करना ही अपराध बन गया है। परिवार ने आरोप लगाए हैं कि गुलजार पर दबाव डाला गया और धमकियाँ दी गईं।
परिजनों का यह भी आरोप है कि आत्महत्या के प्रयास के बाद गुलजार को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिली और कई घंटों तक उन्हें इधर-उधर ले जाया जाता रहा। इन सभी आरोपों की पुष्टि या खंडन के लिए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।
केंद्रीय जांच की मांग
तरुण चुघ ने घोषणा की कि वे शीघ्र ही यह पूरा मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष रखेंगे और किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के बिना सच सामने आ सके, इसके लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग करेंगे। उन्होंने परिवार से पूरी जानकारी लिखित रूप में देने का अनुरोध किया है, ताकि उसे गृह मंत्री के सामने प्रस्तुत किया जा सके।
चुघ ने बताया कि परिवार को अब भी कथित तौर पर दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को भी याद दिलाया कि उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) की नहीं, बल्कि भारत के संविधान की शपथ ली है और उनका कर्तव्य नागरिकों को न्याय दिलाना और पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
राजनीतिक जवाबदेही की मांग
तरुण चुघ ने पंजाब सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के तत्काल इस्तीफे की माँग की। उन्होंने कहा कि गुलजार सिंह के मृत्यु पूर्व बयान में जिन व्यक्तियों के नाम लिए गए हैं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार प्राथमिकी दर्ज कर उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए।
साथ ही उन्होंने माँग की कि मृत्यु से पूर्व की परिस्थितियों, चिकित्सा सहायता में हुई देरी और अंतिम संस्कार को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस रिकॉर्ड, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाए।
मानवाधिकार आयोग और उच्च न्यायालय का संज्ञान
चुघ ने बताया कि यह मामला पहले ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के संज्ञान में लाया जा चुका है। उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा पुलिस जांच पर स्टेटस रिपोर्ट माँगे जाने का स्वागत किया।
BJP ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए और परिवार को किसी भी दबाव या भय से मुक्त रखा जाना चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि वह न्याय के लिए हर उचित संवैधानिक और कानूनी मंच पर इस मामले को उठाती रहेगी।