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क्या गुरु तेग बहादुर जी का जीवन साहस और बलिदान की अमर गाथा है?

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क्या गुरु तेग बहादुर जी का जीवन साहस और बलिदान की अमर गाथा है?

सारांश

दिल्ली में गुरु तेग बहादुर जी के ३५०वें शहीदी दिवस पर भव्य समागम चल रहा है, जिसमें अमित शाह और रेखा गुप्ता ने श्रद्धांजलि अर्पित की। यह आयोजन धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए उनके बलिदान को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

मुख्य बातें

गुरु तेग बहादुर जी का जीवन प्रेरणा का स्रोत है।
धार्मिक स्वतंत्रता का महत्व।
सांस्कृतिक विरासत का सम्मान।
समर्पण और बलिदान की गाथा।

नई दिल्ली, २४ नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के ३५०वें शहीदी दिवस के अवसर पर दिल्ली के लाल किले पर तीन दिवसीय भव्य समागम जारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को इस समागम में शामिल होकर मत्था टेका

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने अन्याय और अधर्म का जिस साहस और शौर्य के साथ सामना किया, वह हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। धर्म की रक्षा के लिए वे अपने प्राणों को आहूत करने से भी पीछे नहीं हटे। उनका जीवन भारत की आध्यात्मिक चेतना, साहस और बलिदान की अमर गाथा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्णय लिया है कि पूरा देश कृतज्ञता के साथ गुरु साहिब का ३५०वां शहीदी दिवस मनाएगा और स्वधर्म एवं संस्कृति के प्रति उनके समर्पण को याद करेगा। सोमवार को दिल्ली में गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को नमन कर मत्था टेकागुरु तेग बहादुर जी के त्याग, साहस और बलिदान की गाथाएं अनंत काल तक हमें प्रेरणा देती रहेंगी।

इस दौरान रेखा गुप्ता ने कहा कि लाल किले के इस गौरवशाली स्थल पर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के ३५०वें शहीदी दिवस का यह दिव्य समागम हमें याद दिलाता है कि दिल्ली भारत की संस्कृति, विरासत और राष्ट्रभक्ति का अखंड प्रतीक है।

उन्होंने एक्स पर कहा कि आज समागम के दूसरे दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की गरिमामयी उपस्थिति हमें विश्वास दिलाती है कि हमारी सरकार सिख परंपरा, शौर्य और बलिदान की गौरवशाली विरासत को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने के लिए संकल्पित है। सिख इतिहास, वीरता और अध्यात्म के सम्मान के प्रति हमारा यह समर्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक सशक्त अध्याय है।

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि श्री गुरु साहिब का सर्वोच्च बलिदान हमें यह संदेश देता है कि धार्मिक स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा और सत्य की रक्षा करना हमारा शाश्वत राष्ट्रधर्म है। इसी प्रेरणा के अनुरूप दिल्ली को संस्कृति-समृद्ध, सेवा-निष्ठ और राष्ट्र-समर्पित राजधानी बनाना हमारा दृढ़ और सतत संकल्प है। वाहेगुरु जी दा खालसा, वाहेगुरु जी दी फतेह।

इससे पहले सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के ३५०वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में लाल किले पर २३ नवंबर से तीन दिवसीय भव्य समागम शुरू हो चुका है। उनके प्रेरक जीवन और बलिदान को लाइट एंड साउंड शो, प्रदर्शनी, कीर्तन दरबार और सेवा-लंगर के माध्यम से भावपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। आप सभी सपरिवार सादर आमंत्रित हैं। आइए, गुरु साहिब की अमर विरासत को नमन करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सभी भारतीयों के लिए एक प्रेरणा है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान क्यों महत्वपूर्ण है?
गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए है, जो हर भारतीय के लिए प्रेरणादायक है।
इस समागम में कौन-कौन से कार्यक्रम शामिल हैं?
समागम में लाइट एंड साउंड शो, प्रदर्शनी, कीर्तन दरबार और सेवा-लंगर शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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