असदुद्दीन ओवैसी: प्रधानमंत्री मोदी को इजरायली आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए

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असदुद्दीन ओवैसी: प्रधानमंत्री मोदी को इजरायली आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए

सारांश

असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी पर इजरायल के प्रति नफरत की विचारधारा के आरोप लगाए। उन्होंने इजरायल में हो रहे नरसंहार का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री से इजरायली आतंकवाद के खिलाफ बोलने की अपील की।

मुख्य बातें

इजरायल के प्रति मोदी का समर्थन गाजा में नरसंहार की बातें अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया भारत की विदेश नीति का प्रभाव ओवैसी की अपील का महत्व

हैदराबाद, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को यह आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इजरायल के प्रति 'प्यार' एक विचारधारा पर आधारित है।

हैदराबाद के सांसद ने यह भी कहा कि जायोनिस्ट और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) दोनों की सोच नफरत पर आधारित है।

ओवैसी ने प्रधानमंत्री के उस बयान की आलोचना की जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है और बताया कि इजरायल के 'नरसंहारक शासन' के लिए उनका समर्थन देश के हित में नहीं है।

एआईएमआईएम के अध्यक्ष ने शुक्रवार की नमाज के बाद मस्जिद-ए-चौक में जलसा-ए-यौम-उल-कुरान में बोलते हुए कहा कि इजरायल ने गाजा में 73,000 फिलिस्तीनियों का नरसंहार किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपने भाषण में कह सकते थे कि हमास गलत है, लेकिन उन्हें इजरायली आतंकवाद के खिलाफ बोलना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि इजरायल दुनिया का एकमात्र नस्लवादी देश है और वेस्ट बैंक तथा गाजा को एक खुली जेल बना दिया गया है। वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के घरों को जायोनिस्ट अपने घर बनाने के लिए तोड़ रहे हैं।

ओवैसी ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ वारंट जारी किया है और वह यूरोप नहीं जा सकते।

सांसद ने पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा था, "गाजा का नरसंहार हमेशा याद रखा जाएगा। यह बात कि भारत के प्रधानमंत्री ने इस समय इजरायल का दौरा किया और एक वॉर क्रिमिनल को गले लगाया, यह भारत के फिलिस्तीनी लोगों के लिए लंबे समय से चले आ रहे समर्थन को दर्शाता है।"

ओवैसी ने कहा कि पीएम मोदी जो कर रहे हैं, उससे पूरा ग्लोबल साउथ परेशान है और चेतावनी दी कि इस स्टैंड से ब्लॉक में भारत को मिलने वाली इज्जत पर असर पड़ सकता है।

सांसद ने कहा कि जायोनिस्ट और आरएसएस के बीच रिश्ते बहुत पुराने हैं। उन्होंने आरोप लगाया, "1960 के दशक में, मुंबई में इजरायली कॉन्सुल जनरल जनसंघ के प्रतिनिधि से मिलते थे और मुसलमानों के प्रति उनकी नफरत का जिक्र करते थे।"

ओवैसी ने कहा, "महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे ने 1973 में इजरायली कॉन्सुल जनरल से मुलाकात की थी और मुस्लिम विरोधी किताब छापने के लिए समर्थन मांगा था।"

एआईएमआईएम के नेता ने बताया कि वह फिलिस्तीन के लिए बोलते हैं क्योंकि यह मुसलमानों के लिए तीसरी सबसे पवित्र जगह है और यह इंसाफ का मुद्दा है। उन्होंने कहा कि इंसाफ का मतलब है कि इजरायल को अलग-थलग कर देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जब इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों के नरसंहार का मुद्दा उठाया जाता है, तो कुछ लोग बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बारे में बात करते हैं।

उन्होंने कहा, "हमने भी इसकी बुराई की है। उस महिला को वापस भेज दो, और बांग्लादेश के साथ मुद्दा सुलझ जाएगा," उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का जिक्र करते हुए कहा, जो भारत में देश निकाला में रह रही हैं।

उन्होंने पीएम मोदी से यह भी पूछा कि जब अमेरिका ईरान पर हमला करने की योजना बना रहा है, तो उन्होंने युद्ध के खिलाफ क्यों नहीं बोला। उन्होंने स्पष्ट रूप से पूछा, "आप रूस जाकर कहते हैं कि भारत युद्ध के खिलाफ है। अब आप चुप क्यों हैं?"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारत की विदेश नीति और मुस्लिम समुदाय के प्रति संवेदनाओं को भी दर्शाता है। टिप्पणियों में नफरत और आतंकवाद के खिलाफ स्पष्टता की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी पर क्या आरोप लगाया?
ओवैसी ने आरोप लगाया कि मोदी का इजरायल के लिए प्यार एक नफरत पर आधारित विचारधारा पर आधारित है।
ओवैसी ने इजरायल के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि इजरायल दुनिया का एकमात्र नस्लवादी देश है और गाजा में 73,000 फिलिस्तीनियों का नरसंहार किया गया है।
ओवैसी ने प्रधानमंत्री से क्या अपील की?
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से इजरायली आतंकवाद के खिलाफ बोला जाने की अपील की।
ओवैसी का क्या कहना है कि मोदी की चुप्पी का क्या प्रभाव है?
ओवैसी ने चेतावनी दी कि मोदी की चुप्पी से भारत की अंतरराष्ट्रीय इज्जत पर असर पड़ सकता है।
ओवैसी ने किस पूर्व प्रधानमंत्री का उल्लेख किया?
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का उल्लेख किया जो भारत में निर्वासित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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