मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में की पूजा, 12 ज्योतिर्लिंग तीर्थयात्रा पूर्ण
सारांश
मुख्य बातें
भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 6 जुलाई 2025 को मध्य प्रदेश के खंडवा जिले स्थित ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में अपनी पत्नी अनुराधा के साथ पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने पंचामृत अभिषेक और जलाभिषेक किया तथा देश के समस्त मतदाताओं, सशक्त लोकतंत्र और राष्ट्र की समृद्धि के लिए भगवान महादेव का आशीर्वाद माँगा।
दर्शन के बाद मीडिया से बोले ज्ञानेश कुमार
मंदिर से बाहर निकलने के बाद ज्ञानेश कुमार ने मीडिया को बताया कि उन्हें और उनकी पत्नी को ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में महादेव के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि उन्होंने देश के सभी मतदाताओं की अच्छी सेहत, आध्यात्मिक उन्नति तथा एक मज़बूत और पारदर्शी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए प्रार्थना की। उनके शब्दों में, महादेव का आशीर्वाद पूरे देश पर बना रहे और लोकतंत्र निरंतर सशक्त होता रहे।
पुजारियों ने बताया पूजा का विवरण
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित नीलेश पुरोहित महाराज और पुजारी दूले सिंह दरबार ने बताया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने पूरी श्रद्धा और परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार भगवान ममलेश्वर का पंचामृत अभिषेक किया। उन्होंने देश की शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना करते हुए विशेष पूजा संपन्न की।
पुजारी दूले सिंह दरबार ने कहा, 'मुख्य चुनाव आयुक्त ने भगवान ओंकारेश्वर की पारंपरिक पंचामृत अभिषेक और पूजा की। उन्होंने देश की शांति, समृद्धि और भलाई के लिए प्रार्थना की। हमारे लिए यह बहुत संतोष की बात थी कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त दर्शन के लिए ओंकारेश्वर और ममलेश्वर पहुँचे।'
सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की तीर्थयात्रा पूर्ण
मुख्य पुजारी पंडित नीलेश पुरोहित ने बताया कि ज्ञानेश कुमार ने पिछली रात ओंकारेश्वर मंदिर में पूजा की थी और रविवार की सुबह उन्होंने ममलेश्वर का जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक किया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस यात्रा के साथ ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की तीर्थयात्रा पूरी कर ली है — जो आस्था और व्यक्तिगत संकल्प का प्रतीक है।
दो दिवसीय मध्य प्रदेश दौरा
गौरतलब है कि ज्ञानेश कुमार शनिवार, 5 जुलाई को अपने दो दिवसीय दौरे पर मध्य प्रदेश पहुँचे थे। पहले दिन उन्होंने माँ नर्मदा के पावन तट पर स्थित तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही उन्होंने ओंकारेश्वर मंदिर की श्रृंगार आरती और शयन आरती में भी भाग लिया। यह यात्रा उनके व्यक्तिगत धार्मिक जीवन का हिस्सा बताई जा रही है, जो उनके संवैधानिक दायित्वों से अलग है।