3 नवंबर 2026
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उत्तराखंड हाई कोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने पर CM धामी ने भूपेंद्र यादव से की चर्चा, मिला सकारात्मक आश्वासन

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उत्तराखंड हाई कोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने पर CM धामी ने भूपेंद्र यादव से की चर्चा, मिला सकारात्मक आश्वासन

सारांश

उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी के लामाचौड़ में शिफ्ट करने की दिशा में CM धामी ने केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर वन भूमि डायवर्जन का प्रस्ताव रखा। केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

मुख्य बातें

CM पुष्कर सिंह धामी ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा गया।
प्रस्तावित स्थल पर आरक्षित वन भूमि है, जिसके हस्तांतरण एवं डायवर्जन के लिए केंद्रीय मंजूरी आवश्यक है।
नैनीताल में मौजूदा परिसर को भू-स्खलन, यातायात दबाव और पार्किंग की समस्याओं का सामना है।
इस परिवर्तन के पीछे सर्वोच्च न्यायालय का एक आदेश भी है, जिसमें निर्धारित समयसीमा में भूमि हस्तांतरण सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रस्ताव पर सकारात्मक एवं अग्रिम कार्रवाई का आश्वासन दिया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की और उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में स्थानांतरित करने के लिए आरक्षित वन भूमि के हस्तांतरण एवं डायवर्जन संबंधी प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की। केंद्रीय मंत्री ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक एवं अग्रिम कार्रवाई का आश्वासन दिया।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष नैनीताल में मौजूदा उच्च न्यायालय परिसर की चुनौतियाँ विस्तार से रखीं। उन्होंने बताया कि नैनीताल का वर्तमान परिसर चाइना पीक की तलहटी में स्थित है, जिससे भू-स्खलन का खतरा बना रहता है। इसके अलावा बढ़ता यातायात दबाव, पर्यटकों की वर्षभर भारी आवाजाही और पार्किंग की अपर्याप्त व्यवस्था न्यायालय की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है।

नैनीताल एक प्रमुख पर्यटन नगर होने के कारण वादकारियों और पर्यटकों की भीड़ एक साथ उमड़ती है, जिससे न्यायिक कार्यों में व्यावहारिक बाधाएँ उत्पन्न होती हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए आधुनिक न्यायिक आधारभूत संरचना विकसित किए जाने की ज़रूरत महसूस की गई है।

हल्द्वानी के लामाचौड़ की क्यों हुई पसंद

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में प्रस्तावित स्थल सड़क एवं राष्ट्रीय राजमार्गों से बेहतर तरीके से जुड़ा हुआ है। यहाँ उच्च न्यायालय का स्थायी परिसर विकसित होने से न्यायिक कार्यों के विस्तार के लिए पर्याप्त बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, वादकारियों एवं आम नागरिकों को आवागमन सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

गौरतलब है कि इस प्रस्ताव के पीछे सर्वोच्च न्यायालय का एक आदेश भी है, जिसके तहत उच्च न्यायालय के नए भवन के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने और निर्धारित समयसीमा में उसका कब्जा व हस्तांतरण सुनिश्चित करना राज्य सरकार की बाध्यता है।

वन भूमि डायवर्जन की चुनौती

प्रस्तावित स्थल पर आरक्षित वन भूमि होने के कारण इसके हस्तांतरण एवं डायवर्जन के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति अनिवार्य है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से शीघ्र आवश्यक कार्यवाही करने का विशेष अनुरोध किया। राज्य सरकार इस संबंध में केंद्र सरकार एवं संबंधित विभागों के साथ निरंतर समन्वय बनाए हुए है।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में बुनियादी ढाँचे के विस्तार हेतु वन भूमि डायवर्जन के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाना राज्य की प्राथमिकताओं में शामिल है।

सरकार की प्रतिबद्धता और आगे की राह

मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, आधुनिक एवं सुविधाजनक बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में आधुनिक एवं स्थायी उच्च न्यायालय परिसर बनने से प्रदेश की न्यायिक सेवाएँ अधिक सुगम और प्रभावी होंगी। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस पूरे प्रस्ताव पर सकारात्मक और अग्रिम कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिससे इस परियोजना को आगे बढ़ने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भू-स्खलन-प्रवण क्षेत्र में बसे नैनीताल की दीर्घकालिक संरचनात्मक सीमाओं का स्वीकार है। असली परीक्षा यह है कि वन भूमि डायवर्जन की पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया — जो अक्सर लंबी खिंचती है — इस बार कितनी तेज़ी से पूरी होती है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की समयसीमा राज्य पर दबाव बनाए हुए है, लेकिन केंद्रीय मंजूरी के बिना आगे बढ़ना संभव नहीं। मंत्री के 'सकारात्मक आश्वासन' को तब तक अधूरा माना जाएगा, जब तक वन डायवर्जन की औपचारिक अधिसूचना जारी न हो जाए।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी क्यों शिफ्ट किया जा रहा है?
नैनीताल में मौजूदा उच्च न्यायालय परिसर चाइना पीक की तलहटी में स्थित है, जहाँ भू-स्खलन का खतरा, भारी यातायात दबाव और पर्यटकों की वर्षभर भीड़ न्यायिक कार्यों को प्रभावित करती है। हल्द्वानी का लामाचौड़ क्षेत्र बेहतर सड़क संपर्क और विस्तार के लिए पर्याप्त जगह प्रदान करता है।
हल्द्वानी में हाई कोर्ट परिसर के लिए वन भूमि डायवर्जन की क्या ज़रूरत है?
लामाचौड़ में प्रस्तावित स्थल पर आरक्षित वन भूमि है। इसे न्यायालय परिसर के लिए उपयोग में लाने से पहले केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से भूमि हस्तांतरण एवं डायवर्जन की अनुमति लेनी अनिवार्य है, जो CM धामी ने मंत्री भूपेंद्र यादव से अनुरोध किया है।
सर्वोच्च न्यायालय का इस मामले में क्या आदेश है?
सर्वोच्च न्यायालय ने एक आदेश पारित किया है, जिसके अंतर्गत उत्तराखंड सरकार को उच्च न्यायालय के नए भवन के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराना और निर्धारित समयसीमा में उसका कब्जा एवं हस्तांतरण सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस प्रस्ताव पर क्या कहा?
केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने CM धामी द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर सकारात्मक और अग्रिम कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालाँकि, वन भूमि डायवर्जन की औपचारिक मंजूरी अभी बाकी है।
हल्द्वानी में हाई कोर्ट परिसर बनने से किसे फायदा होगा?
नए स्थायी परिसर से न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, वादकारियों और आम नागरिकों को बेहतर आवागमन, पर्याप्त पार्किंग और आधुनिक न्यायिक सुविधाएँ मिलेंगी। राष्ट्रीय राजमार्गों से सीधे जुड़े होने के कारण उत्तराखंड के दूर-दराज़ क्षेत्रों के लोगों के लिए न्यायालय तक पहुँचना भी आसान होगा।
राष्ट्र प्रेस
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