हमास की बांग्लादेश में पैठ बनाने की कोशिश, तौहीदी जनता से संपर्क — भारतीय एजेंसियाँ सतर्क
सारांश
मुख्य बातें
खुफिया सूत्रों के अनुसार, फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास दक्षिण एशिया में अपना नेटवर्क विस्तारित करने की कोशिश में है और इसके लिए उसने बांग्लादेश स्थित कट्टरपंथी समूह तौहीदी जनता से संपर्क साधा है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, हमास का इरादा बांग्लादेश में सीधे हमले करना नहीं, बल्कि अपनी विचारधारा फैलाना है — और अंततः उस प्रभाव को भारत तक पहुँचाना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की मदद से हमास पहले ही पाकिस्तान में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है।
तौहीदी जनता: कौन है यह समूह
तौहीदी जनता बांग्लादेश से संचालित एक असंगठित कट्टरपंथी समूह है, जो कई वर्षों से सक्रिय है और समय-समय पर सुर्खियों में आता रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इसका कोई स्पष्ट संगठनात्मक ढाँचा नहीं है। एक अधिकारी ने कहा, "यह मुख्य रूप से कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित युवाओं का एक ढीला-ढाला समूह है, जो इस्लाम की हिंसक व्याख्या का प्रचार करने के लिए एकजुट होता है।"
समूह की विचारधारा अस्थिर है — कभी यह इस्लामिक स्टेट (IS) का समर्थन करता दिखता है, तो कभी अल-कायदा का। हाल के महीनों में इसने हमास के समर्थन में फिलिस्तीन के मुद्दे को बढ़ावा देना शुरू किया है।
हमास क्यों चुन रहा है तौहीदी जनता को
खुफिया अधिकारियों का कहना है कि हमास जानबूझकर ऐसे समूहों को तरजीह देता है जो कमज़ोर तरीके से संगठित हों और जिन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो। IB अधिकारी के अनुसार, "हमास पाकिस्तान, बांग्लादेश या श्रीलंका जैसे देशों में अकेले काम नहीं करना चाहता — यह अपना एजेंडा फैलाने के लिए छोटे समूहों पर निर्भर करेगा।"
तौहीदी जनता के सदस्य अलग-अलग कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े पाए गए हैं — कुछ जमातुल अंसार फिल हिंदल शरकिया (एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन) के प्रति सहानुभूति रखते हैं, कुछ अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) की ओर झुके हैं, और कुछ हरकत-उल-जिहादी इस्लामी इन बांग्लादेश (HUJI) से जुड़े पाए गए हैं।
ज़मीन पर क्या हो रहा है
हाल के महीनों में बांग्लादेश में खुलेआम अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट के झंडे लहराए गए हैं। कई मामलों में झंडे दिखाने वाले लोग तौहीदी जनता से जुड़े पाए गए। इसके अलावा, समूह ने सोशल मीडिया अभियान और सड़क पर कलेमा के झंडों के साथ मार्च के ज़रिए फिलिस्तीन मुद्दे पर मुसलमानों को एकजुट करने की कोशिश की है।
गौरतलब है कि अतीत में इस समूह पर बांग्लादेश में सूफी दरगाहों और बाउल सभाओं पर हमलों का आरोप लग चुका है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
भारतीय खुफिया एजेंसियाँ इन घटनाक्रमों पर करीबी नज़र रखे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि तौहीदी जनता की अनिश्चित संरचना ही उसे निगरानी के लिए सबसे कठिन बनाती है। "वे टेरर मॉड्यूल या स्लीपर सेल पर निर्भर नहीं हैं, जिससे उनकी गतिविधियों पर नज़र रखना और भी मुश्किल हो जाता है," एक अधिकारी ने कहा।
सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, हमास और तौहीदी जनता के बीच यह कथित गठजोड़ बांग्लादेश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और इसके प्रभाव भारत तक पहुँच सकते हैं। आने वाले समय में इस संबंध पर एजेंसियों की निगरानी और तेज़ होने की उम्मीद है।