हाशिम मूसा एनकाउंटर पर BJP विधायक सुनील भारद्वाज बोले — जम्मू-कश्मीर में जीरो टॉलरेंस जारी रहेगा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर और पहलगाम हमले के कथित मास्टरमाइंड हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद 30 सितंबर को राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सुनील भारद्वाज ने इस एनकाउंटर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आतंकवाद मुक्त और विकसित जम्मू-कश्मीर' के संकल्प की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया। विपक्षी और निर्दलीय विधायकों ने भी घाटी में बदलाव को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही सुरक्षा कार्रवाइयों में आम नागरिकों और युवाओं पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए।
BJP का रुख: आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
भाजपा विधायक सुनील भारद्वाज ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि वे एक विकसित भारत की ओर बढ़ते हुए जम्मू-कश्मीर को विकसित बनाएंगे। जम्मू-कश्मीर को विकसित बनाने के लिए सबसे जरूरी है कि वह शांतिपूर्ण रहे और आतंकवाद से मुक्त रहे। हमारे गृहमंत्री भी कहते हैं कि आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस होनी चाहिए।' उनके अनुसार हाशिम मूसा का खात्मा इसी नीति का परिणाम है।
भारद्वाज ने इंडिया ब्लॉक की बैठक पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि विपक्षी गठबंधन वर्षों से BJP को हराने के तरीके खोज रहा है और चुनाव परिणामों को अपनी सुविधा के अनुसार परिभाषित करता है — जीत पर पारदर्शिता की तारीफ और हार पर धाँधली का आरोप।
विपक्ष की मिली-जुली प्रतिक्रिया
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक मुबारक गुल ने विधानसभा में हंगामे को जवाबदेही की दृष्टि से उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि सत्र में 25 में से केवल 5 सवाल लिए गए, लेकिन सरकार को सभी पर कार्रवाई करनी थी — जिसके लिए बारामूला, कुपवाड़ा, कुलगाम, श्रीनगर और जम्मू के उपायुक्तों को निर्देश दिए गए।
हाशिम मूसा के एनकाउंटर पर गुल ने कहा कि पहले उग्रवादियों की संख्या कहीं अधिक थी। आज हालात बदले हैं क्योंकि अमेरिका में हुए आतंकी हमलों के बाद दुनियाभर में आतंक के खिलाफ चेतना जागी और आतंकियों की फंडिंग व समर्थन तंत्र कमजोर हुआ। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मुद्दे और विकास दोनों अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं।
निर्दलीय विधायक की दो-टूक: बाहरी दखल और आंतरिक जवाबदेही
निर्दलीय विधायक शब्बीर अहमद कुल्ले ने माना कि पिछले 10 वर्षों में कश्मीर में युवा और समाज दोनों बदले हैं, लेकिन उन्होंने सरकारी मानसिकता पर सवाल उठाया। उनके अनुसार पहलगाम जैसी किसी भी घटना के बाद पूरे कश्मीर के नौजवानों को 10 से 15 दिनों के लिए हिरासत में लेने की पुरानी प्रवृत्ति अभी भी जारी है, जो उचित नहीं है।
कुल्ले ने यह भी कहा कि पड़ोसी देश की कोशिश रहेगी कि कश्मीर को अस्थिर किया जाए, लेकिन इसका जवाब अपने 'घर को ठीक रखने' में है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्ष की माँग पर कहा कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और जिस तरह से नाम हटाए गए हैं, उनका कानूनी अधिकार क्षेत्र संदिग्ध है।
पृष्ठभूमि: हाशिम मूसा कौन था
हाशिम मूसा को लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रमुख ऑपरेटिव और पहलगाम हमले का कथित मास्टरमाइंड बताया जाता है। सुरक्षा बलों के साथ एनकाउंटर में उसके मारे जाने को सुरक्षा एजेंसियाँ एक बड़ी सफलता मान रही हैं। यह ऐसे समय में हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सत्र चल रहा है और सियासी माहौल गरम है।
आगे क्या
विधानसभा में सत्र जारी है और विकास, सुरक्षा तथा नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे केंद्र में हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एक शीर्ष कमांडर के खात्मे के बाद संगठन पुनर्गठन की कोशिश कर सकता है, इसलिए सतर्कता बनाए रखना ज़रूरी होगा।