30 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हाशिम मूसा एनकाउंटर पर BJP विधायक सुनील भारद्वाज बोले — जम्मू-कश्मीर में जीरो टॉलरेंस जारी रहेगा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हाशिम मूसा एनकाउंटर पर BJP विधायक सुनील भारद्वाज बोले — जम्मू-कश्मीर में जीरो टॉलरेंस जारी रहेगा

सारांश

लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर हाशिम मूसा के एनकाउंटर के बाद जम्मू-कश्मीर में सियासी बहस तेज हो गई है। BJP ने इसे मोदी की जीरो टॉलरेंस नीति की जीत बताया, जबकि निर्दलीय विधायक ने आम कश्मीरी युवाओं की हिरासत की पुरानी मानसिकता पर सवाल उठाए — जो इस एनकाउंटर से परे एक बड़े तनाव को उजागर करता है।

मुख्य बातें

लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर और पहलगाम हमले के कथित मास्टरमाइंड हाशिम मूसा को 30 सितंबर को सुरक्षा बलों के साथ एनकाउंटर में मार गिराया गया।
BJP विधायक सुनील भारद्वाज ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'आतंकवाद मुक्त जम्मू-कश्मीर' नीति की बड़ी सफलता बताया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक मुबारक गुल ने माना कि आतंकियों की फंडिंग और समर्थन तंत्र पिछले 10 वर्षों में कमजोर हुआ है।
निर्दलीय विधायक शब्बीर अहमद कुल्ले ने किसी भी घटना के बाद कश्मीरी युवाओं को 10-15 दिनों के लिए हिरासत में लेने की प्रवृत्ति पर आपत्ति जताई।
CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के मामले पर कुल्ले ने कहा कि यह विषय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर और पहलगाम हमले के कथित मास्टरमाइंड हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद 30 सितंबर को राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सुनील भारद्वाज ने इस एनकाउंटर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आतंकवाद मुक्त और विकसित जम्मू-कश्मीर' के संकल्प की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया। विपक्षी और निर्दलीय विधायकों ने भी घाटी में बदलाव को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही सुरक्षा कार्रवाइयों में आम नागरिकों और युवाओं पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए।

BJP का रुख: आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस

भाजपा विधायक सुनील भारद्वाज ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि वे एक विकसित भारत की ओर बढ़ते हुए जम्मू-कश्मीर को विकसित बनाएंगे। जम्मू-कश्मीर को विकसित बनाने के लिए सबसे जरूरी है कि वह शांतिपूर्ण रहे और आतंकवाद से मुक्त रहे। हमारे गृहमंत्री भी कहते हैं कि आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस होनी चाहिए।' उनके अनुसार हाशिम मूसा का खात्मा इसी नीति का परिणाम है।

भारद्वाज ने इंडिया ब्लॉक की बैठक पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि विपक्षी गठबंधन वर्षों से BJP को हराने के तरीके खोज रहा है और चुनाव परिणामों को अपनी सुविधा के अनुसार परिभाषित करता है — जीत पर पारदर्शिता की तारीफ और हार पर धाँधली का आरोप।

विपक्ष की मिली-जुली प्रतिक्रिया

नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक मुबारक गुल ने विधानसभा में हंगामे को जवाबदेही की दृष्टि से उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि सत्र में 25 में से केवल 5 सवाल लिए गए, लेकिन सरकार को सभी पर कार्रवाई करनी थी — जिसके लिए बारामूला, कुपवाड़ा, कुलगाम, श्रीनगर और जम्मू के उपायुक्तों को निर्देश दिए गए।

हाशिम मूसा के एनकाउंटर पर गुल ने कहा कि पहले उग्रवादियों की संख्या कहीं अधिक थी। आज हालात बदले हैं क्योंकि अमेरिका में हुए आतंकी हमलों के बाद दुनियाभर में आतंक के खिलाफ चेतना जागी और आतंकियों की फंडिंग व समर्थन तंत्र कमजोर हुआ। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मुद्दे और विकास दोनों अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं।

निर्दलीय विधायक की दो-टूक: बाहरी दखल और आंतरिक जवाबदेही

निर्दलीय विधायक शब्बीर अहमद कुल्ले ने माना कि पिछले 10 वर्षों में कश्मीर में युवा और समाज दोनों बदले हैं, लेकिन उन्होंने सरकारी मानसिकता पर सवाल उठाया। उनके अनुसार पहलगाम जैसी किसी भी घटना के बाद पूरे कश्मीर के नौजवानों को 10 से 15 दिनों के लिए हिरासत में लेने की पुरानी प्रवृत्ति अभी भी जारी है, जो उचित नहीं है।

कुल्ले ने यह भी कहा कि पड़ोसी देश की कोशिश रहेगी कि कश्मीर को अस्थिर किया जाए, लेकिन इसका जवाब अपने 'घर को ठीक रखने' में है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्ष की माँग पर कहा कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और जिस तरह से नाम हटाए गए हैं, उनका कानूनी अधिकार क्षेत्र संदिग्ध है।

पृष्ठभूमि: हाशिम मूसा कौन था

हाशिम मूसा को लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रमुख ऑपरेटिव और पहलगाम हमले का कथित मास्टरमाइंड बताया जाता है। सुरक्षा बलों के साथ एनकाउंटर में उसके मारे जाने को सुरक्षा एजेंसियाँ एक बड़ी सफलता मान रही हैं। यह ऐसे समय में हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सत्र चल रहा है और सियासी माहौल गरम है।

आगे क्या

विधानसभा में सत्र जारी है और विकास, सुरक्षा तथा नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे केंद्र में हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एक शीर्ष कमांडर के खात्मे के बाद संगठन पुनर्गठन की कोशिश कर सकता है, इसलिए सतर्कता बनाए रखना ज़रूरी होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर दब जाता है। सुरक्षा की सफलता और नागरिक स्वतंत्रता के बीच यह तनाव जम्मू-कश्मीर की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना किसी कमांडर का खात्मा।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाशिम मूसा कौन था और उसे क्यों मारा गया?
हाशिम मूसा लश्कर-ए-तैयबा का एक शीर्ष कमांडर था, जिसे पहलगाम हमले का कथित मास्टरमाइंड बताया जाता है। 30 सितंबर को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में वह मारा गया।
BJP विधायक सुनील भारद्वाज ने इस एनकाउंटर पर क्या कहा?
भाजपा विधायक सुनील भारद्वाज ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'आतंकवाद मुक्त और विकसित जम्मू-कश्मीर' नीति की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह कार्रवाई हुई है।
विपक्षी विधायकों ने एनकाउंटर पर क्या रुख अपनाया?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक मुबारक गुल ने माना कि पिछले 10 वर्षों में आतंकियों की फंडिंग और समर्थन तंत्र कमजोर हुआ है। हालांकि निर्दलीय विधायक शब्बीर अहमद कुल्ले ने किसी भी घटना के बाद कश्मीरी युवाओं को 10-15 दिनों के लिए हिरासत में लेने की प्रवृत्ति पर आपत्ति जताई।
CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग पर क्या स्थिति है?
निर्दलीय विधायक शब्बीर अहमद कुल्ले ने कहा कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उनके अनुसार जिस तरह से नाम हटाए गए हैं, उनका कानूनी अधिकार क्षेत्र संदिग्ध है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र में क्या प्रमुख मुद्दे उठे?
विधानसभा सत्र में हंगामे के बीच 25 में से केवल 5 सवाल लिए गए, जिन पर बारामूला, कुपवाड़ा, कुलगाम, श्रीनगर और जम्मू के उपायुक्तों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक मुबारक गुल ने कहा कि यह हंगामा जवाबदेही की दृष्टि से उपयोगी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 9 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले