जम्मू-कश्मीर में शराब पर प्रतिबंध आवश्यक: जुहैब यूसुफ मीर
सारांश
Key Takeaways
- शराब पर प्रतिबंध की आवश्यकता पर जोर
- पर्यटन में गिरावट
- बेरोजगारी की गंभीर स्थिति
- संस्कृति का संरक्षण आवश्यक
- सरकार को कार्रवाई करने की आवश्यकता
श्रीनगर, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पीडीपी प्रवक्ता जुहैब यूसुफ मीर ने नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक हसनैन मसूदी के शराब प्रतिबंध संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यहां का पर्यटन समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। हमें इस वक्त अपनी संस्कृति का संरक्षण करना है। पिछले वर्ष भी कई स्थानों पर लोग नाव और ऑटो में शराब पीते हुए देखे गए थे और कई स्थानों पर हमले की घटनाएं हुई थीं। इन सभी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, जम्मू-कश्मीर में शराब पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री ने वहां शराब पर प्रतिबंध लगाया है, गुजरात में भी शराब पर बैन है। तो फिर कश्मीर की संस्कृति का सम्मान क्यों नहीं किया जाएगा? यहां के मुख्यमंत्री को भी चाहिए कि वे लोगों की भावनाओं का ध्यान रखें। यदि जम्मू-कश्मीर में शराब पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तो यह एक सकारात्मक कदम होगा।
उन्होंने कहा कि जब से नेशनल कॉन्फ्रेंस सत्ता में आई है, तब से ये लोग दोहरे बयानों का सहारा ले रहे हैं। पहले इन लोगों ने शराब पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया था, और अब ये इसे जारी रखने के लिए तर्क दे रहे हैं।
उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि रोजगार की स्थिति बहुत खराब है। जम्मू-कश्मीर में हर साल २५ से ३० हजार छात्र स्नातक होते हैं, लेकिन उनके पास कौशल की कमी है और बाजार में उनके लिए रोजगार नहीं है। जम्मू-कश्मीर में करीब साढ़े तीन लाख लोग बेरोजगार हैं। पहलगाम में आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पर्यटन में भारी गिरावट आई है। कई व्यापार भी ठप हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर बिजली की कमी के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहा है। यदि किसी की छोटी सी राशि भी बकाया है तो उनकी भी बिजली काट दी जाती है। रमजान के दौरान भी बिजली काटी गई। एक तरफ बेरोजगारी, दूसरी ओर बिजली के बिल में वृद्धि, ऐसे में लोग अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे?