मीरवाइज उमर फारूक: जम्मू-कश्मीर में शराब पर रोक बिना नशा-विरोधी अभियान अधूरा

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मीरवाइज उमर फारूक: जम्मू-कश्मीर में शराब पर रोक बिना नशा-विरोधी अभियान अधूरा

सारांश

मीरवाइज उमर फारूक ने श्रीनगर में साफ कहा — नशे के खिलाफ अभियान तब तक अधूरा है जब तक शराब की बिक्री बेरोकटोक जारी है। धार्मिक और सामाजिक दोनों आधारों पर शराबबंदी की माँग करते हुए उन्होंने क्षेत्र-भेदभावपूर्ण कार्रवाई और परिवारों के उत्पीड़न पर भी सवाल उठाए।

मुख्य बातें

मीरवाइज उमर फारूक ने 12 मई को श्रीनगर में कहा कि शराब पर रोक बिना नशा-विरोधी अभियान सफल नहीं होगा।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर प्रशासन पर एक बुराई के खिलाफ कार्रवाई और दूसरी को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया।
तमिलनाडु में नई सरकार द्वारा 700 शराब की दुकानें बंद करने का उदाहरण दिया।
नशा-विरोधी अभियान में क्षेत्र-भेदभाव और परिवारों के उत्पीड़न पर चिंता जताई।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व में 100 दिवसीय नशा मुक्त अभियान जारी; तस्करों के पासपोर्ट, आधार, लाइसेंस रद्द करने और संपत्ति जब्ती का प्रावधान।

कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने 12 मई को श्रीनगर में कहा कि जम्मू-कश्मीर में शराब की बिक्री पर रोक लगाए बिना मादक पदार्थों के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकता। एक स्थानीय सुपरमार्केट के उद्घाटन समारोह के अवसर पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने शराब पर पूर्ण प्रतिबंध की अपनी पुरानी माँग को एक बार फिर दोहराया।

मुख्य बयान और तर्क

मीरवाइज उमर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नशीले पदार्थ और शराब दोनों ही समाज के लिए समान रूप से हानिकारक हैं। उनका तर्क था कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन एक बुराई के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए दूसरी को खुलेआम चलने देना उचित नहीं ठहरा सकता। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत के कई गैर-मुस्लिम बहुल राज्यों ने भी सामाजिक नुकसान को देखते हुए शराब पर प्रतिबंध या आंशिक रोक लगाई है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में नई सरकार का पहला कदम 700 शराब की दुकानों को बंद करना था।

नशा-विरोधी अभियान पर चिंताएँ

मीरवाइज उमर ने जम्मू-कश्मीर में चल रहे 100 दिवसीय 'नशा मुक्त अभियान' की दिशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि अभियान क्षेत्र-भेदभावपूर्ण नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि किसी एक व्यक्ति के कथित अपराध के लिए उसके परिवार के सदस्यों को परेशान करना या उनके घर ध्वस्त करना न्यायसंगत नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पुलिस ड्रग पेडलर्स और तस्करों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई कर रही है।

जामा मस्जिद संबोधन की पुनरावृत्ति

गौरतलब है कि मीरवाइज उमर ने इससे पहले जामा मस्जिद में अपने शुक्रवार के संबोधन में भी नशीली दवाओं की लत के बढ़ते खतरे और शराब पर प्रतिबंध की आवश्यकता पर जोर दिया था। सुपरमार्केट उद्घाटन के दौरान उनका बयान उसी चिंता की निरंतरता थी, जो उनके नियमित धार्मिक प्रवचनों में भी उभरती रही है।

प्रशासन की मौजूदा कार्रवाई

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नशा मुक्त अभियान की शुरुआत करते हुए कहा था कि मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों के खिलाफ अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई में पासपोर्ट, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करना और तस्करी से अर्जित संपत्ति जब्त करना शामिल होगा। ये कदम मादक पदार्थ तस्करी-विरोधी कानूनों के तहत निर्धारित सज़ा के अतिरिक्त हैं। पुलिस इस अभियान के तहत ड्रग पेडलर्स और बिक्री नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ सक्रिय है।

आगे की राह

मीरवाइज उमर की माँग धार्मिक और सामाजिक दोनों आधारों पर टिकी है, और यह देखना होगा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन शराब नीति पर उनकी चिंताओं को किस तरह संबोधित करता है। फिलहाल अभियान जारी है और इसके परिणाम आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। परिवारों के घर ध्वस्त करने जैसी सामूहिक सज़ा की प्रवृत्ति कानूनी और नैतिक दोनों मोर्चों पर कमज़ोर पड़ती है। प्रशासन को यह तय करना होगा कि 'नशा मुक्त' अभियान चुनिंदा सख्ती का औज़ार बनेगा या वास्तव में समग्र सामाजिक नीति का हिस्सा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीरवाइज उमर फारूक ने जम्मू-कश्मीर में शराबबंदी की माँग क्यों की?
मीरवाइज उमर फारूक का कहना है कि नशीले पदार्थ और शराब दोनों समाज के लिए समान रूप से हानिकारक हैं, इसलिए एक के खिलाफ अभियान चलाते हुए दूसरे को नज़रअंदाज़ करना उचित नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि शराब पर रोक लगाए बिना नशा-विरोधी अभियान अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकता।
जम्मू-कश्मीर का 100 दिवसीय नशा मुक्त अभियान क्या है?
यह उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा शुरू किया गया अभियान है जिसमें पुलिस ड्रग पेडलर्स और तस्करों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई कर रही है। इसमें दोषियों के पासपोर्ट, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करना और तस्करी से अर्जित संपत्ति जब्त करने का प्रावधान है।
मीरवाइज उमर ने परिवारों के उत्पीड़न पर क्या कहा?
मीरवाइज उमर ने चेतावनी दी कि नशा-विरोधी अभियान क्षेत्र-भेदभावपूर्ण नहीं होना चाहिए और किसी एक व्यक्ति के कार्यों के लिए उसके परिवार के सदस्यों को परेशान करना या घर ध्वस्त करना न्यायसंगत नहीं है।
क्या भारत के अन्य राज्यों में शराबबंदी है?
मीरवाइज उमर के अनुसार, भारत के कई गैर-मुस्लिम बहुल राज्यों ने भी सामाजिक नुकसान को देखते हुए शराब पर प्रतिबंध या आंशिक रोक लगाई है। उन्होंने तमिलनाडु का उदाहरण दिया जहाँ नई सरकार ने सत्ता में आते ही 700 शराब की दुकानें बंद कीं।
मीरवाइज उमर फारूक कौन हैं?
मीरवाइज उमर फारूक कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु और वरिष्ठ धार्मिक नेता हैं। वे जामा मस्जिद श्रीनगर से जुड़े हैं और घाटी में सामाजिक व धार्मिक मुद्दों पर नियमित रूप से अपनी राय रखते हैं।
राष्ट्र प्रेस