हाथरस: पानी की बोतल पर ₹2 अधिक वसूले, बीसीसीएन रेस्टोरेंट पर ₹1.06 लाख का जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के हाथरस स्थित बीसीसीएन रेस्टोरेंट को पानी की बोतल पर महज ₹2 की अतिरिक्त वसूली और उस पर अलग से जीएसटी लगाने की जुर्रत इतनी महँगी पड़ी कि अलीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उसे ₹1.06 लाख के आर्थिक दंड और मुआवज़े का आदेश दे दिया। यह फैसला गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को एकपक्षीय सुनवाई के बाद सुनाया गया, क्योंकि रेस्टोरेंट ने बार-बार नोटिस के बावजूद आयोग के समक्ष उपस्थित होना उचित नहीं समझा।
मामले की जड़: ₹18 की बोतल, वसूले ₹20
शिकायतकर्ता के अनुसार बीसीसीएन रेस्टोरेंट में भोजन के दौरान एक पानी की बोतल दी गई, जिस पर एमआरपी ₹18 अंकित थी। रेस्टोरेंट ने उसके ₹20 वसूले और ऊपर से अलग से जीएसटी भी जोड़ दिया — जो कि उपभोक्ता संरक्षण कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। जब ग्राहक ने इस पर आपत्ति जताई तो रेस्टोरेंट की ओर से मिला जवाब और भी चौंकाने वाला था।
रेस्टोरेंट का जवाब: 'बड़ा होटल होता तो ₹50 लेते'
मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर अग्रवाल, उपभोक्ता फोरम अलीगढ़, के मुताबिक जब अतिरिक्त शुल्क और अनुचित जीएसटी वसूली पर आपत्ति जताई गई तो रेस्टोरेंट प्रबंधन ने कहा — 'अगर हमारा और बड़ा होटल होता तो इसी बोतल के ₹50 लेते।' इस रवैये के बाद रेस्टोरेंट को औपचारिक कानूनी नोटिस भेजा गया, जिसका कोई जवाब नहीं आया।
उपभोक्ता आयोग में शिकायत और एकपक्षीय फैसला
मामला अलीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग तक पहुँचा। अधिवक्ता अग्रवाल के अनुसार, आयोग द्वारा भेजे गए कई नोटिसों के बाद भी रेस्टोरेंट की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। इस पर आयोग ने एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए तीन हिस्सों में दंड निर्धारित किया।
आयोग का आदेश: कुल ₹1.06 लाख का दंड
आयोग के आदेश के अनुसार रेस्टोरेंट को ₹1 लाख जिला उपभोक्ता वेलफेयर फंड में जमा करने होंगे। इसके अलावा ₹5,000 अधिवक्ता शुल्क के रूप में और ₹1,000 शिकायतकर्ता को मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में देने का निर्देश दिया गया है। यानी महज ₹2 की अतिरिक्त वसूली से शुरू हुआ विवाद ₹1,06,000 के दंड में तब्दील हो गया।
आम जनता के लिए संदेश
यह मामला उपभोक्ता अधिकारों की ताकत का एक अहम उदाहरण बनकर सामने आया है। गौरतलब है कि भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत एमआरपी से अधिक मूल्य वसूलना और उस पर अलग से जीएसटी लगाना दोनों ही दंडनीय अपराध हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फैसले रेस्टोरेंट और होटल उद्योग में मूल्य पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उपभोक्ता आयोग देशभर में मूल्य-उल्लंघन के मामलों में तेज़ी से कार्रवाई कर रहे हैं।