कनॉट प्लेस प्रदर्शन से ₹200 करोड़ का नुकसान, रेस्तरां मालिक ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के प्रतिष्ठित व्यावसायिक केंद्र कनॉट प्लेस में लगातार हो रहे प्रदर्शनों के कारण कारोबार को भारी नुकसान का हवाला देते हुए एक प्रमुख रेस्तरां मालिक ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें प्रदर्शनों पर रोक और आर्थिक क्षतिपूर्ति की माँग की गई है। 16 अक्टूबर 2026 को दायर इस याचिका में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) और अनुच्छेद 21 के तहत व्यवसायियों के मौलिक अधिकारों का हनन होने का तर्क दिया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
रेस्तरां मालिक के वकील उमंग त्यागी के अनुसार, 10 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में हुए एक प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र के दुकानदारों और रेस्तरां संचालकों को कथित तौर पर लगभग ₹200 करोड़ का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। यह आँकड़ा उद्योग जगत के एक संगठन द्वारा जारी किया गया था। इसके बाद 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में एक और प्रदर्शन के आह्वान की सूचना मिलने पर यह याचिका दायर की गई।
याचिका में उठाई गई प्रमुख माँगें
वकील उमंग त्यागी ने बताया कि याचिका में दो मुख्य माँगें रखी गई हैं। पहली, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के आसपास के क्षेत्रों में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। दूसरी, प्रदर्शनों के कारण हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई की जाए। याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के 2019 के उस फैसले का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार यदि अनधिसूचित स्थानों पर प्रदर्शन किए जाते हैं, तो उससे प्रभावित व्यक्तियों की आजीविका के नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए।
संवैधानिक आधार
त्यागी ने तर्क दिया कि व्यवसायियों को भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत व्यापार करने की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत जीविका के अधिकार का संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में बार-बार होने वाले प्रदर्शनों से उनके कारोबार पर पड़ने वाला प्रतिकूल असर संविधानसम्मत नहीं है।
अदालत का रुख और आगे की सुनवाई
सुनवाई के दौरान अदालत ने संज्ञान लिया कि इसी प्रकार की अन्य याचिकाओं पर बुधवार को कुछ आदेश पारित किए गए थे। इस पृष्ठभूमि में प्रस्तुत याचिका की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है, जो दिल्ली हाई कोर्ट के पुनः खुलने की तिथि है।
जमीनी हालात और पुलिस तैनाती
गौरतलब है कि 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में तिरंगा प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। इस सिलसिले में अभिजीत दिपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने किसी भी प्रदर्शन को रोकने और स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए कनॉट प्लेस में भारी संख्या में बल तैनात किया है। यह मामला व्यावसायिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन की बहस को नए सिरे से सामने ला रहा है। 29 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अदालत का रुख स्पष्ट होने की उम्मीद है।