9 जुलाई 2026
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मोदी-अल्बनीज मेलबर्न बैठक में चीन के ICBM परीक्षण पर चिंता, हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर बनी सहमति

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मोदी-अल्बनीज मेलबर्न बैठक में चीन के ICBM परीक्षण पर चिंता, हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर बनी सहमति

सारांश

मेलबर्न में मोदी-अल्बनीज की बैठक महज़ शिष्टाचार मुलाकात नहीं थी — चीन के ताज़े ICBM परीक्षण ने एजेंडा तय कर दिया। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत में स्थिरता की साझा ज़रूरत पर मुहर लगाई, जबकि ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और ताइवान पहले ही बीजिंग के इस कदम की आलोचना कर चुके थे।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई PM एंथनी अल्बनीज की 9 जुलाई को मेलबर्न में बैठक हुई।
अल्बनीज ने बैठक में चीन के दक्षिण प्रशांत ICBM परीक्षण का मुद्दा उठाया; विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पुष्टि की।
चीन की परमाणु पनडुब्बी ने सोमवार को प्रशांत महासागर की दिशा में मिसाइल परीक्षण किया था।
ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने परीक्षण को 'क्षेत्र के लिए अस्थिरता पैदा करने वाला' बताया।
न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इसे चीन की 'बार-बार दोहराई जाने वाली नीति' कहा; 2024 के परीक्षण का भी हवाला दिया।
ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता कैरेन कुओ ने चीन से संयम और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन की अपील की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच 9 जुलाई को मेलबर्न में हुई द्विपक्षीय बैठक में चीन द्वारा दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में किए गए इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) परीक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने विदेश मंत्रालय (MEA) की विशेष मीडिया ब्रीफिंग में इसकी पुष्टि की। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने को लेकर साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक में क्या हुआ

विदेश सचिव मिस्री ने पत्रकारों को बताया, 'इस मुद्दे को ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने उठाया था और इस घटनाक्रम को लेकर कुछ चिंता भी जताई गई।' उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र को ऐसा इलाका मानता है जहाँ शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनी रहनी चाहिए। मिस्री के अनुसार, दोनों देशों के हित और लक्ष्य इस मसले पर एकसमान हैं और वे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाते रहेंगे।

चीन का ICBM परीक्षण: क्या हुआ

इससे पहले सोमवार को चीन की एक परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी ने प्रशांत महासागर की दिशा में एक मिसाइल का परीक्षण किया था। यह परीक्षण क्षेत्र के कई देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया। गौरतलब है कि चीन ने 2024 में भी दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में ICBM परीक्षण किया था, जिसे न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने चीन की 'बार-बार दोहराई जाने वाली नीति' का हिस्सा बताया।

क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएँ

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने इस मिसाइल लॉन्च को 'क्षेत्र के लिए अस्थिरता पैदा करने वाला' करार दिया। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री पीटर्स ने कहा कि उनका देश परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों के ऐसे परीक्षणों को लेकर 'चिंतित' है।

ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय ने भी इस परीक्षण की कड़ी निंदा की। कार्यालय की प्रवक्ता कैरेन कुओ ने आरोप लगाया कि बीजिंग ने इस परीक्षण के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डराने की कोशिश की है और यह कदम अंतरराष्ट्रीय शांति व स्थिरता को नुकसान पहुँचाता है। कुओ ने चीन से संयम बरतने, अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने और ऐसी 'गैर-जिम्मेदाराना एकतरफा कार्रवाइयों' को तुरंत रोकने की अपील की।

भारत-ऑस्ट्रेलिया की साझा स्थिति

यह बैठक ऐसे समय में हुई जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही क्वाड (QUAD) के सदस्य हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर नियमित रूप से विचार-विमर्श करते हैं। मिस्री ने स्पष्ट किया कि दोनों देश आगे भी इस मुद्दे पर अपने विचार साझा करते रहेंगे।

आगे क्या

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हिंद-प्रशांत सुरक्षा को लेकर यह संवाद आने वाले समय में क्वाड और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के ढाँचे में और मज़बूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के बढ़ते मिसाइल परीक्षणों के मद्देनज़र क्षेत्रीय देशों के बीच समन्वय और घनिष्ठ होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

ये बयान चीन की रणनीतिक गणना पर कोई असर डालने में सक्षम नहीं होंगे।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोदी-अल्बनीज बैठक में चीन के ICBM परीक्षण का मुद्दा क्यों उठा?
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने स्वयं यह मुद्दा उठाया क्योंकि चीन ने हाल ही में दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में ICBM परीक्षण किया था, जिससे क्षेत्रीय देशों में चिंता फैली। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पुष्टि की कि बैठक में इस पर चर्चा हुई और दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत स्थिरता पर साझा रुख अपनाया।
चीन ने कब और कैसे यह मिसाइल परीक्षण किया?
सोमवार को चीन की एक परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी ने प्रशांत महासागर की दिशा में मिसाइल का परीक्षण किया। यह 2024 के बाद दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में चीन का दूसरा ICBM परीक्षण बताया जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने इस परीक्षण पर क्या कहा?
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने इसे 'क्षेत्र के लिए अस्थिरता पैदा करने वाला' बताया। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने कहा कि उनका देश इस परीक्षण को लेकर 'चिंतित' है और यह चीन की 'बार-बार दोहराई जाने वाली नीति' का हिस्सा लगता है।
ताइवान ने चीन के इस मिसाइल परीक्षण पर क्या प्रतिक्रिया दी?
ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय ने परीक्षण की कड़ी निंदा की। प्रवक्ता कैरेन कुओ ने कहा कि बीजिंग ने इसके ज़रिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डराने की कोशिश की है और यह अंतरराष्ट्रीय शांति व स्थिरता को नुकसान पहुँचाता है। उन्होंने चीन से ऐसी 'गैर-जिम्मेदाराना एकतरफा कार्रवाइयाँ' तुरंत रोकने की अपील की।
भारत और ऑस्ट्रेलिया हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर मिलकर क्या कदम उठाएँगे?
विदेश सचिव मिस्री के अनुसार, दोनों देश इस मुद्दे पर अपने विचार साझा करते रहेंगे और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएँगे। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों क्वाड के सदस्य हैं, जो हिंद-प्रशांत में स्थिरता के लिए काम करता है।
राष्ट्र प्रेस
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