मोदी-अल्बनीज मेलबर्न बैठक में चीन के ICBM परीक्षण पर चिंता, हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच 9 जुलाई को मेलबर्न में हुई द्विपक्षीय बैठक में चीन द्वारा दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में किए गए इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) परीक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने विदेश मंत्रालय (MEA) की विशेष मीडिया ब्रीफिंग में इसकी पुष्टि की। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने को लेकर साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक में क्या हुआ
विदेश सचिव मिस्री ने पत्रकारों को बताया, 'इस मुद्दे को ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने उठाया था और इस घटनाक्रम को लेकर कुछ चिंता भी जताई गई।' उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र को ऐसा इलाका मानता है जहाँ शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनी रहनी चाहिए। मिस्री के अनुसार, दोनों देशों के हित और लक्ष्य इस मसले पर एकसमान हैं और वे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाते रहेंगे।
चीन का ICBM परीक्षण: क्या हुआ
इससे पहले सोमवार को चीन की एक परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी ने प्रशांत महासागर की दिशा में एक मिसाइल का परीक्षण किया था। यह परीक्षण क्षेत्र के कई देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया। गौरतलब है कि चीन ने 2024 में भी दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में ICBM परीक्षण किया था, जिसे न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने चीन की 'बार-बार दोहराई जाने वाली नीति' का हिस्सा बताया।
क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएँ
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने इस मिसाइल लॉन्च को 'क्षेत्र के लिए अस्थिरता पैदा करने वाला' करार दिया। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री पीटर्स ने कहा कि उनका देश परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों के ऐसे परीक्षणों को लेकर 'चिंतित' है।
ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय ने भी इस परीक्षण की कड़ी निंदा की। कार्यालय की प्रवक्ता कैरेन कुओ ने आरोप लगाया कि बीजिंग ने इस परीक्षण के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डराने की कोशिश की है और यह कदम अंतरराष्ट्रीय शांति व स्थिरता को नुकसान पहुँचाता है। कुओ ने चीन से संयम बरतने, अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने और ऐसी 'गैर-जिम्मेदाराना एकतरफा कार्रवाइयों' को तुरंत रोकने की अपील की।
भारत-ऑस्ट्रेलिया की साझा स्थिति
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही क्वाड (QUAD) के सदस्य हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर नियमित रूप से विचार-विमर्श करते हैं। मिस्री ने स्पष्ट किया कि दोनों देश आगे भी इस मुद्दे पर अपने विचार साझा करते रहेंगे।
आगे क्या
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हिंद-प्रशांत सुरक्षा को लेकर यह संवाद आने वाले समय में क्वाड और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के ढाँचे में और मज़बूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के बढ़ते मिसाइल परीक्षणों के मद्देनज़र क्षेत्रीय देशों के बीच समन्वय और घनिष्ठ होगा।