12 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

शहरीकरण से बनेगा विकसित भारत 2047: 16वें वित्त आयोग अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
शहरीकरण से बनेगा विकसित भारत 2047: 16वें वित्त आयोग अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया

सारांश

16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने तिरुवनंतपुरम में साफ़ कहा — $30 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था और विकसित भारत 2047 का सपना उत्पादक शहरों के बिना संभव नहीं। लेकिन असली चुनौती भूमि अधिग्रहण की जटिलता और कमज़ोर नगरपालिका शासन है।

मुख्य बातें

16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने तिरुवनंतपुरम में शहरीकरण को विकसित भारत 2047 का आधार बताया।
भारत का लक्ष्य $30 ट्रिलियन की वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनना है, जो कुशल शहरों के बिना संभव नहीं।
शहरी ज़मीन की कमी, बँटा हुआ स्वामित्व और अस्पष्ट दस्तावेज़ आर्थिक गतिविधियों की सबसे बड़ी बाधा।
सिंगूर परियोजना का उदाहरण देते हुए भूमि अधिग्रहण सुधारों की तत्काल ज़रूरत पर बल।
राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने कहा — शहरीकरण भारतीय संस्कृति और जड़ों से प्रेरित हो, पश्चिमी मॉडल की नकल न हो।

16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने 13 अगस्त 2025 को तिरुवनंतपुरम में स्पष्ट किया कि भारत के $30 ट्रिलियन की वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनने और 2047 तक विकसित राष्ट्र का दर्जा हासिल करने का सपना उत्पादक, सुदृढ़ और कुशल शहरों के बिना पूरा नहीं हो सकता। राजभवन द्वारा आयोजित 'लोक भवन कन्वर्सेशन' के छठे संस्करण में उन्होंने शहरीकरण को भारत के आर्थिक रूपांतरण का केंद्रीय स्तंभ बताया।

शहरीकरण क्यों है अनिवार्य

पनगढ़िया ने रेखांकित किया कि विश्व के लगभग हर विकसित देश में शहरीकरण का स्तर ऊँचा है। उन्होंने कहा कि भारत का शहरी विकास का समृद्ध इतिहास रहा है और देश को इस दिशा में आगे बढ़ने में कोई संकोच नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार, 'आर्थिक गतिविधियाँ शहरीकरण को गति देती हैं' — रोज़गार सृजन से ग्रामीण बस्तियाँ और बड़े शहरों के आसपास के क्षेत्र भी जीवंत शहरी केंद्रों में बदल सकते हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शहरीकरण का उद्देश्य केवल मौजूदा शहरी निवासियों की जीवन-दशाएँ सुधारना नहीं है — शहरों को कारोबार और रोज़गार के अनुकूल बनाना होगा ताकि ग्रामीण क्षेत्रों से जनशक्ति का प्रवाह हो सके और नए अवसर पैदा हों।

भूमि अधिग्रहण: सबसे बड़ी बाधा

पनगढ़िया ने शहरी ज़मीन की कमी और उसकी ऊँची लागत को भारतीय शहरों में आर्थिक गतिविधियों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए बड़े भूखंड जुटाना अत्यंत कठिन है, क्योंकि ज़मीन का स्वामित्व बेहद बँटा हुआ है और स्पष्ट स्वामित्व दस्तावेज़ प्राय: उपलब्ध नहीं होते।

उन्होंने पश्चिम बंगाल के सिंगूर परियोजना का उदाहरण देते हुए बताया कि वहाँ हज़ारों अलग-अलग भूखंडों का अधिग्रहण करना पड़ा था। इसके विपरीत, अमेरिका जैसे देशों में बड़े प्रोजेक्ट के लिए भूमि स्वामित्व अपेक्षाकृत कम विखंडित है। उन्होंने उत्पादक आर्थिक गतिविधियों हेतु भूमि उपलब्धता सुगम बनाने और अधिग्रहण-संबंधी अड़चनें दूर करने के लिए ठोस सुधारों की ज़रूरत पर बल दिया।

शासन और समन्वय की दरकार

वित्त आयोग के अध्यक्ष ने मज़बूत नगरपालिका प्रशासन और शहरी विकास से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। उनके अनुसार, शहरी शासन-व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो आर्थिक गतिविधियों, बुनियादी ढाँचे और रोज़गार सृजन को एक साथ समर्थन दे सके। शहरी नियोजन और भूमि-उपयोग नीतियों को नागरिकों की जीवन-दशाएँ सुधारने के साथ-साथ उद्यमिता को भी प्रोत्साहन देना चाहिए।

राज्यपाल की सांस्कृतिक दृष्टि

इस अवसर पर केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने कहा कि शहरीकरण को पश्चिमीकरण का पर्याय नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'शहरीकरण की शुरुआत हमारी जड़ों से होनी चाहिए।' राज्यपाल ने ज़ोर दिया कि भारत का शहरी विकास पश्चिमी मॉडल की अंधी नकल के बजाय देश की अपनी संस्कृति, परंपराओं और विचार-प्रक्रियाओं से प्रेरित होना चाहिए और यह विकसित भारत के विज़न को साकार करने में निर्णायक योगदान देगा।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत की शहरी जनसंख्या तेज़ी से बढ़ रही है और स्मार्ट सिटी मिशन जैसी योजनाओं के परिणामों पर बहस जारी है। गौरतलब है कि 16वाँ वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच संसाधन-वितरण की सिफारिशें करता है, इसलिए शहरी वित्त पोषण पर पनगढ़िया के विचार नीतिगत दिशा के संकेतक माने जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि सुधार और नगरपालिका वित्त को मज़बूत किए बिना शहरीकरण की संभावनाएँ सीमित रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए इसे महज़ अकादमिक राय नहीं माना जा सकता — यह आगामी राजकोषीय सिफारिशों की दिशा का संकेत भी है। लेकिन विरोधाभास यह है कि भूमि सुधार राज्य का विषय है और केंद्र की नीतिगत इच्छाशक्ति के बावजूद सिंगूर जैसे अनुभव बताते हैं कि राजनीतिक लागत बहुत ऊँची है। स्मार्ट सिटी मिशन के एक दशक बाद भी नगरपालिकाओं की वित्तीय स्वायत्तता सीमित है और अधिकांश शहरी निकाय केंद्रीय अनुदान पर निर्भर हैं। जब तक शहरी स्थानीय निकायों को स्वतंत्र कर-संग्रह और बॉन्ड बाज़ार तक वास्तविक पहुँच नहीं मिलती, तब तक 'उत्पादक शहर' की परिकल्पना कागज़ों पर ही रहेगी।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरविंद पनगढ़िया ने विकसित भारत 2047 के लिए शहरीकरण को क्यों ज़रूरी बताया?
पनगढ़िया के अनुसार, भारत का $30 ट्रिलियन की वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य उत्पादक और कुशल शहरों के बिना हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि लगभग हर विकसित देश में शहरीकरण का स्तर ऊँचा है और भारत को इस दिशा में संकोच नहीं करना चाहिए।
भारत में शहरी भूमि अधिग्रहण की सबसे बड़ी चुनौतियाँ क्या हैं?
पनगढ़िया ने बताया कि ज़मीन का अत्यधिक विखंडित स्वामित्व और अस्पष्ट दस्तावेज़ीकरण औद्योगिक परियोजनाओं के लिए बड़े भूखंड जुटाना बेहद कठिन बना देते हैं। सिंगूर परियोजना में हज़ारों अलग-अलग भूखंडों का अधिग्रहण करना पड़ा था, जो इस समस्या की गंभीरता दर्शाता है।
16वाँ वित्त आयोग शहरी विकास में क्या भूमिका निभाता है?
16वाँ वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच राजकोषीय संसाधनों के वितरण की सिफारिशें करता है। इसके अध्यक्ष के रूप में पनगढ़िया के शहरी वित्त पोषण संबंधी विचार आगामी सिफारिशों की दिशा तय कर सकते हैं।
राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने शहरीकरण पर क्या कहा?
केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने कहा कि शहरीकरण को पश्चिमीकरण का पर्याय नहीं माना जाना चाहिए और इसकी शुरुआत भारत की अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से होनी चाहिए। उन्होंने पश्चिमी मॉडल की अंधी नकल के बजाय भारतीय विचार-प्रक्रिया से प्रेरित शहरी विकास पर बल दिया।
शहरीकरण से ग्रामीण क्षेत्रों पर क्या असर पड़ेगा?
पनगढ़िया के अनुसार, रोज़गार सृजन से ग्रामीण बस्तियाँ और बड़े शहरों के आसपास के क्षेत्र भी जीवंत शहरी केंद्रों में बदल सकते हैं। शहरों को कारोबार-अनुकूल बनाने से ग्रामीण क्षेत्रों से जनशक्ति का प्रवाह होगा और नए रोज़गार के अवसर पैदा होंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले