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हुसैन दलवई का मराठी को अनिवार्य करने पर समर्थन: क्या है इसका महत्व?

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हुसैन दलवई का मराठी को अनिवार्य करने पर समर्थन: क्या है इसका महत्व?

सारांश

हुसैन दलवई ने महाराष्ट्र में टैक्सी और ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा के अनिवार्य होने पर समर्थन जताया है। क्या यह कदम राज्य की संस्कृति को सहेजने में सहायक होगा? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

मुख्य बातें

मराठी भाषा का अनिवार्य होना स्थानीय संस्कृति का संरक्षण कर सकता है।
महिलाओं के लिए काम उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है।
केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए गए हैं।
राजनीतिक वादों की पूर्ति में कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया गया।

मुंबई, ११ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के नेता हुसैन दलवई ने शनिवार को महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य करने के मुद्दे पर समर्थन व्यक्त किया।

हुसैन दलवई ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता कि इसमें कुछ भी गलत है। अगर आप महाराष्ट्र में रहना चाहते हैं तो आपको मराठी आनी चाहिए। अगर आपका कोई मराठी रिश्तेदार है तो उनसे मराठी में बात करनी चाहिए। अगर भाषा नहीं आती तो सीखिए। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।"

दलवई ने कहा कि स्थानीय भाषा और संस्कृति की रक्षा करना हर राज्य का अधिकार है, और इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

लाडली बहना योजना के संबंध में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाए जाने पर हुसैन दलवई ने कहा कि महिलाओं को सिर्फ पैसे देने के बजाय उन्हें काम उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने कहा, "मेरी नजर में यह गलत है। इससे अर्थव्यवस्था में दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। यह समस्या पहले से ही अनुमानित थी, इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है।"

यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने के मुद्दे पर कांग्रेस नेता ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "ये सब कोरे आश्वासन हैं। २०१४ के चुनावों में जो वादे किए गए थे, उनका क्या हुआ? यूसीसी, सीएए, एनआरसी आदि के नाम पर जान-बूझकर लोगों के बीच दरार पैदा की जा रही है। आप यूसीसी कैसे लाएंगे? मुझे बताइए।"

दलवई ने कहा कि सरकार चुनावी घोषणापत्र में दिए वादों को पूरा करने में नाकाम रही है और अब नए-नए मुद्दे उठाकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के मुद्दे पर हुसैन दलवई ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान शांति का मसीहा कैसे बन सकता है? वहां तो हमेशा कोई न कोई समस्या बनी रहती है, लेकिन पाकिस्तान को यह भूमिका इसलिए मिली, क्योंकि हमारी सरकार ने एक गलत कदम उठाया। प्रधानमंत्री युद्ध शुरू होने से ठीक दो दिन पहले इजराइल के दौरे पर गए थे। वे वहां क्यों गए थे?"

दलवई ने कहा कि केंद्र सरकार की विदेश नीति असंगत और अव्यवस्थित है, जिसके कारण भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित हो रही है। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने समग्र रूप से केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा कि विकास के नाम पर जनता को भ्रमित किया जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुसैन दलवई ने मराठी भाषा के अनिवार्य होने पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में रहने के लिए मराठी आनी चाहिए और यह एक सही कदम है।
लाडली बहना योजना पर दलवई का क्या मत है?
उन्होंने कहा कि महिलाओं को पैसे देने के बजाय उन्हें काम उपलब्ध कराना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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