हैदराबाद में 'डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू' नामकरण पर विवाद, कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना सरकार द्वारा हैदराबाद में अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास के निकट स्थित एक प्रमुख सड़क का नाम 'डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू' रखने के प्रस्ताव ने राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। छत्तीसगढ़ के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंह देव ने इस फैसले को सिद्धांततः गलत ठहराते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।
सिंह देव की आपत्ति: जीवित व्यक्ति के नाम पर नामकरण उचित नहीं
अंबिकापुर में मीडिया से बातचीत के दौरान टीएस सिंह देव ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मुझे ट्रंप के नाम पर सड़क का नाम रखने का कोई औचित्य समझ नहीं आता। सिद्धांत रूप में, सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे का नाम जीवित व्यक्तियों के नाम पर नहीं रखा जाना चाहिए।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है, तो इसके पीछे आर्थिक या अन्य कारण हो सकते हैं, परंतु फिर भी इस तरह के नामकरण की प्रासंगिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मुख्य घटनाक्रम: कब और कैसे हुई घोषणा
तेलंगाना सरकार ने दिसंबर 2024 में घोषणा की थी कि हैदराबाद में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के समीप से गुजरने वाली सड़क को 'डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू' का नाम दिया जाएगा। अब यह भी बताया जा रहा है कि 23 जून को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी इस सड़क का औपचारिक उद्घाटन कर सकते हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने की कोशिशें जारी हैं।
अन्य नामकरण प्रस्ताव: रतन टाटा और गूगल को सम्मान
तेलंगाना सरकार ने केवल ट्रंप एवेन्यू तक ही अपनी नामकरण योजना सीमित नहीं रखी है। प्रस्तावित रीजनल रिंग रोड (RRR) से जोड़ने वाली एक नई संपर्क सड़क का नाम दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के सम्मान में रखा जाएगा। इसके अलावा, तकनीकी क्षेत्र की वैश्विक कंपनी गूगल के योगदान को मान्यता देते हुए एक प्रमुख मार्ग को 'गूगल स्ट्रीट' नाम दिए जाने की भी योजना है।
सरकार का पक्ष: वैश्विक पहचान की रणनीति
राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह पहल तेलंगाना को नवाचार और वैश्विक पहचान के केंद्र के रूप में स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। सरकार का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हस्तियों और कंपनियों के योगदान को प्रतीकात्मक रूप से सम्मानित करने से राज्य की वैश्विक छवि मजबूत होगी।
आगे क्या होगा
यदि 23 जून को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा उद्घाटन होता है, तो यह नामकरण विवाद और गहरा हो सकता है। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक स्थलों के नामकरण में राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक मूल्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह देखना होगा कि केंद्र सरकार और अन्य राजनीतिक दल इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।