IDSFFK 2026: 31 फिल्मों की स्क्रीनिंग विवाद पर सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने दी सफाई, शशि थरूर ने उठाए थे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
18वें इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल (IDSFFK) के आगाज़ से ठीक पहले 31 फिल्मों की स्क्रीनिंग को लेकर तीखा विवाद उठ खड़ा हुआ है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक समाचार रिपोर्ट साझा करते हुए दावा किया कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने फेस्टिवल में चुनी गई इन फिल्मों को स्क्रीन करने की अनुमति नहीं दी। मंत्रालय ने बाद में स्पष्ट किया कि किसी भी फिल्म की स्क्रीनिंग से इनकार नहीं किया गया है, बल्कि कुछ फिल्मों से विस्तृत सारांश माँगा गया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
केरल का यह प्रतिष्ठित डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल 25 से 30 सितंबर 2026 तक तिरुवनंतपुरम में आयोजित होने वाला है। केरल चलचित्र एकेडमी ने कुल 347 फिल्मों की सूची सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भेजकर स्क्रीनिंग के लिए आवश्यक छूट माँगी थी। इसके बाद मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि इनमें से 31 फिल्मों को स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं मिली।
कथित तौर पर रोकी गई इन फिल्मों में फेस्टिवल की आधिकारिक सूची की 18 फिल्में, इंटरनेशनल नॉन-फिक्शन सेक्शन की 9 फिल्में, फेस्टिवल विनर्स श्रेणी की 3 फिल्में और नेपाल पैकेज की 1 फिल्म शामिल बताई गई थीं।
किन फिल्मों पर उठे सवाल
विवादित सूची में शामिल फिल्मों में 'पार्लियामेंट स्ट्रीट', 'सैनिटाइज्ड रिपब्लिक: कास्ट एंड कॉन्ट्रैक्ट्स', 'ग्लोब' (मलयालम), 'मेमोरीज ऑफ ए विंडो', 'बर्ड्स ऑफ वॉर', 'पुट योर सोल ऑन योर हैंड एंड वॉक' और 'अवर लैंड' जैसे नाम शामिल हैं। इनमें से 'पुट योर सोल ऑन योर हैंड एंड वॉक' गाजा में रह रही एक फिलिस्तीनी फोटो जर्नलिस्ट की जीवन-यात्रा पर आधारित है। 'मेमोरीज ऑफ ए विंडो' ईरान में हुए प्रदर्शनों को आम नागरिकों के रिकॉर्ड किए फुटेज के माध्यम से दर्शाती है, जबकि 'बर्ड्स ऑफ वॉर' में युद्ध और विस्थापन से जुड़ी निजी तस्वीरों और आर्काइव सामग्री का उपयोग किया गया है।
शशि थरूर का पोस्ट और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, 'मुझे यह जानकर हैरानी हुई कि 31 फिल्मों को स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं दी गई है। यह न सिर्फ भारत की परंपरा के साथ धोखा है, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी पर भी हमला है। इस तरह के फैसले से दुनियाभर के फिल्ममेकर्स, लेखक और कलाकारों के बीच भारत की छवि प्रभावित होती है।' उन्होंने सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सेंसरशिप और सरकारी हस्तक्षेप का मुद्दा पहले से ही वैश्विक बहस का हिस्सा बना हुआ है।
केरल सरकार की प्रतिक्रिया
केरल के पर्यटन, संस्कृति और सिनेमा मंत्री पी.सी. विष्णुनाध ने केंद्र से इस फैसले पर पुनर्विचार की माँग की। उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्में समाज की विविध सच्चाइयों को सामने लाने का माध्यम हैं और अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में विभिन्न विचारों और चर्चाओं के लिए जगह होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दर्शकों को फिल्में देखकर स्वयं अपनी राय बनाने का अवसर मिलना चाहिए।
सूचना-प्रसारण मंत्रालय का स्पष्टीकरण
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने थरूर के एक्स पोस्ट को रीशेयर करते हुए अपना पक्ष रखा। मंत्रालय ने कहा, '18वें IDSFFK में किसी भी फिल्म की स्क्रीनिंग की अनुमति से इनकार नहीं किया गया है। 6 से अधिक फिल्मों से विस्तृत सारांश देने को कहा गया है। फिल्मों के विषय को देखते हुए कुछ फिल्मों को संबंधित सेक्टरल अथॉरिटीज के पास समीक्षा के लिए भेजा गया है।'
यह विवाद फेस्टिवल के 25 सितंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में आरंभ होने से पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। अब सबकी नज़रें इस बात पर हैं कि मंत्रालय की समीक्षा प्रक्रिया फेस्टिवल की शुरुआत से पहले पूरी होती है या नहीं, और क्या सभी 31 फिल्मों को अंततः स्क्रीनिंग की हरी झंडी मिल पाती है।