केरल 'काफिर स्क्रीनशॉट' मामला: एसआईटी जांच तेज, डीवाईएफआई ब्लॉक अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
केरल के बहुचर्चित 'काफिर स्क्रीनशॉट' मामले में नई विशेष जांच दल (एसआईटी) की पूछताछ तेज होते ही डीवाईएफआई वडकारा ब्लॉक अध्यक्ष रिबेश रामकृष्णन ने शनिवार, 7 जून 2025 को अपने संगठनात्मक पद से इस्तीफा दे दिया। एसआईटी द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने से ठीक पहले आया यह इस्तीफा कोझिकोड में राजनीतिक हलचल का नया केंद्र बन गया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह मामला 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान वडकारा संसदीय क्षेत्र में उस समय सामने आया था, जब सोशल मीडिया पर एक कथित फर्जी पोस्ट प्रसारित हुई थी जिसमें 'काफिर' शब्द का इस्तेमाल किया गया था। आरोप था कि यह पोस्ट कांग्रेस (INC) उम्मीदवार शफी परांबिल को निशाना बनाकर तैयार की गई थी। उस चुनाव में परांबिल ने माकपा की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के. के. शैलजा को हराकर सीपीएम को बड़ा झटका दिया था।
इस पोस्ट को लेकर यूडीएफ और एलडीएफ के बीच तीखा राजनीतिक विवाद छिड़ गया था। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि चुनावी माहौल को सांप्रदायिक रूप से प्रभावित करने और ध्रुवीकरण पैदा करने के उद्देश्य से यह सामग्री प्रसारित की गई थी।
पहली जांच और मामले का बंद होना
मामले की शुरुआती जांच पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल में हुई थी। पर्याप्त सबूत नहीं मिलने और स्क्रीनशॉट के मूल स्रोत का पता न चल पाने के कारण पुलिस ने जांच बंद कर दी थी। प्रारंभ में एमएसएफ नेता मोहम्मद कासीम के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में केरल उच्च न्यायालय ने कहा कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।
नई एसआईटी और जांच का दायरा
वीडी सतीशन के नेतृत्व वाले यूडीएफ के सत्ता में आने के कुछ दिनों बाद इस मामले को पुनः खोला गया और नई एसआईटी को ताजा जांच का जिम्मा सौंपा गया। डीआईजी यतीश चंद्र की निगरानी में और ग्रामीण एसपी टी. फराश के नेतृत्व में काम कर रही यह एसआईटी साइबर जांच के जरिए स्क्रीनशॉट तैयार करने वाले और इसे सबसे पहले प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है।
सूत्रों के अनुसार, जांच का फोकस वामपंथी विचारधारा से जुड़े कुछ साइबर समूहों पर भी है। संकेत मिले हैं कि विवादित स्क्रीनशॉट संभवतः 'वडकारा स्क्वाड' नामक व्हाट्सएप समूह जैसे प्लेटफॉर्मों के माध्यम से सबसे पहले प्रसारित हुआ था।
इस्तीफा और नए संदिग्ध
रिबेश रामकृष्णन ने ब्लॉक अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है, हालांकि वह डीवाईएफआई ब्लॉक समिति के सदस्य बने रहेंगे। उनके अलावा मनेश और अथुल को भी वडकारा क्राइम ब्रांच कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। अथुल और मनेश 'रेड वॉलंटियर्स बटालियन' नामक व्हाट्सएप समूह के सदस्य बताए जाते हैं।
एसआईटी ने पोस्ट के प्रसार से जुड़े ऑनलाइन समूहों के एडमिन और सदस्यों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। इससे पहले की जांच केवल कुछ सोशल मीडिया समूहों के प्रशासकों तक सीमित थी।
आगे क्या होगा
फिलहाल जांच का मुख्य उद्देश्य स्क्रीनशॉट के मूल स्रोत का पता लगाना, इसके निर्माण और प्रसार में शामिल लोगों की पहचान करना तथा यह जांचना है कि क्या इसे सांप्रदायिक संदेशों के जरिए चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। यह मामला केरल की राजनीति में सत्ता-परिवर्तन के बाद पुरानी जांचों को पुनर्जीवित करने की प्रवृत्ति की एक और कड़ी बनता दिख रहा है।