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केरल 'काफिर स्क्रीनशॉट' मामला: एसआईटी जांच तेज, डीवाईएफआई ब्लॉक अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

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केरल 'काफिर स्क्रीनशॉट' मामला: एसआईटी जांच तेज, डीवाईएफआई ब्लॉक अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

सारांश

केरल के 'काफिर स्क्रीनशॉट' मामले में नई एसआईटी की पूछताछ शुरू होते ही डीवाईएफआई वडकारा ब्लॉक अध्यक्ष रिबेश रामकृष्णन ने इस्तीफा दे दिया। यूडीएफ सरकार द्वारा पुनर्जीवित यह जांच 2024 के लोकसभा चुनाव से जुड़े सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के आरोपों की तह तक जाने की कोशिश है।

मुख्य बातें

डीवाईएफआई वडकारा ब्लॉक अध्यक्ष रिबेश रामकृष्णन ने एसआईटी पूछताछ से पहले शनिवार को पद से इस्तीफा दिया।
विवाद 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान वडकारा संसदीय क्षेत्र में 'काफिर' शब्द वाली कथित फर्जी पोस्ट के प्रसार से जुड़ा है।
एमएसएफ नेता मोहम्मद कासीम के खिलाफ पहले दर्ज केस में केरल उच्च न्यायालय ने सबूत न मिलने की बात कही थी।
नई एसआईटी डीआईजी यतीश चंद्र की निगरानी और एसपी टी.
फराश के नेतृत्व में 'वडकारा स्क्वाड' व 'रेड वॉलंटियर्स बटालियन' व्हाट्सएप समूहों की साइबर जांच कर रही है।
मनेश और अथुल को भी वडकारा क्राइम ब्रांच में पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
पिनाराई विजयन सरकार में बंद हुई यह जांच वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार के सत्ता में आने के बाद पुनः खोली गई।

केरल के बहुचर्चित 'काफिर स्क्रीनशॉट' मामले में नई विशेष जांच दल (एसआईटी) की पूछताछ तेज होते ही डीवाईएफआई वडकारा ब्लॉक अध्यक्ष रिबेश रामकृष्णन ने शनिवार, 7 जून 2025 को अपने संगठनात्मक पद से इस्तीफा दे दिया। एसआईटी द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने से ठीक पहले आया यह इस्तीफा कोझिकोड में राजनीतिक हलचल का नया केंद्र बन गया है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह मामला 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान वडकारा संसदीय क्षेत्र में उस समय सामने आया था, जब सोशल मीडिया पर एक कथित फर्जी पोस्ट प्रसारित हुई थी जिसमें 'काफिर' शब्द का इस्तेमाल किया गया था। आरोप था कि यह पोस्ट कांग्रेस (INC) उम्मीदवार शफी परांबिल को निशाना बनाकर तैयार की गई थी। उस चुनाव में परांबिल ने माकपा की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के. के. शैलजा को हराकर सीपीएम को बड़ा झटका दिया था।

इस पोस्ट को लेकर यूडीएफ और एलडीएफ के बीच तीखा राजनीतिक विवाद छिड़ गया था। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि चुनावी माहौल को सांप्रदायिक रूप से प्रभावित करने और ध्रुवीकरण पैदा करने के उद्देश्य से यह सामग्री प्रसारित की गई थी।

पहली जांच और मामले का बंद होना

मामले की शुरुआती जांच पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल में हुई थी। पर्याप्त सबूत नहीं मिलने और स्क्रीनशॉट के मूल स्रोत का पता न चल पाने के कारण पुलिस ने जांच बंद कर दी थी। प्रारंभ में एमएसएफ नेता मोहम्मद कासीम के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में केरल उच्च न्यायालय ने कहा कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।

नई एसआईटी और जांच का दायरा

वीडी सतीशन के नेतृत्व वाले यूडीएफ के सत्ता में आने के कुछ दिनों बाद इस मामले को पुनः खोला गया और नई एसआईटी को ताजा जांच का जिम्मा सौंपा गया। डीआईजी यतीश चंद्र की निगरानी में और ग्रामीण एसपी टी. फराश के नेतृत्व में काम कर रही यह एसआईटी साइबर जांच के जरिए स्क्रीनशॉट तैयार करने वाले और इसे सबसे पहले प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है।

सूत्रों के अनुसार, जांच का फोकस वामपंथी विचारधारा से जुड़े कुछ साइबर समूहों पर भी है। संकेत मिले हैं कि विवादित स्क्रीनशॉट संभवतः 'वडकारा स्क्वाड' नामक व्हाट्सएप समूह जैसे प्लेटफॉर्मों के माध्यम से सबसे पहले प्रसारित हुआ था।

इस्तीफा और नए संदिग्ध

रिबेश रामकृष्णन ने ब्लॉक अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है, हालांकि वह डीवाईएफआई ब्लॉक समिति के सदस्य बने रहेंगे। उनके अलावा मनेश और अथुल को भी वडकारा क्राइम ब्रांच कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। अथुल और मनेश 'रेड वॉलंटियर्स बटालियन' नामक व्हाट्सएप समूह के सदस्य बताए जाते हैं।

एसआईटी ने पोस्ट के प्रसार से जुड़े ऑनलाइन समूहों के एडमिन और सदस्यों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। इससे पहले की जांच केवल कुछ सोशल मीडिया समूहों के प्रशासकों तक सीमित थी।

आगे क्या होगा

फिलहाल जांच का मुख्य उद्देश्य स्क्रीनशॉट के मूल स्रोत का पता लगाना, इसके निर्माण और प्रसार में शामिल लोगों की पहचान करना तथा यह जांचना है कि क्या इसे सांप्रदायिक संदेशों के जरिए चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। यह मामला केरल की राजनीति में सत्ता-परिवर्तन के बाद पुरानी जांचों को पुनर्जीवित करने की प्रवृत्ति की एक और कड़ी बनता दिख रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह अपराध-स्वीकृति नहीं है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि केरल उच्च न्यायालय पहले ही एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में क्लीन चिट दे चुका है — नई एसआईटी को इस बाधा को पार करने के लिए ठोस साइबर साक्ष्य जुटाने होंगे, अन्यथा यह जांच भी राजनीतिक उपकरण के रूप में आलोचना झेलेगी।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल का 'काफिर स्क्रीनशॉट' मामला क्या है?
यह 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान वडकारा संसदीय क्षेत्र में सामने आया विवाद है, जिसमें सोशल मीडिया पर 'काफिर' शब्द वाली एक कथित फर्जी पोस्ट प्रसारित हुई थी। आरोप था कि यह पोस्ट कांग्रेस उम्मीदवार शफी परांबिल को निशाना बनाकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के उद्देश्य से तैयार की गई थी।
रिबेश रामकृष्णन ने इस्तीफा क्यों दिया?
डीवाईएफआई वडकारा ब्लॉक अध्यक्ष रिबेश रामकृष्णन ने एसआईटी द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने से ठीक पहले अपने संगठनात्मक पद से इस्तीफा दिया। हालांकि वह डीवाईएफआई ब्लॉक समिति के सदस्य बने रहेंगे।
पहली जांच क्यों बंद हुई थी और अब क्यों खोली गई?
पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल में पर्याप्त सबूत नहीं मिलने और स्क्रीनशॉट के मूल स्रोत का पता न चलने के कारण जांच बंद कर दी गई थी। वीडी सतीशन के नेतृत्व में यूडीएफ के सत्ता में आने के बाद इस मामले को पुनः खोला गया और नई एसआईटी को जांच सौंपी गई।
नई एसआईटी की जांच का दायरा क्या है?
डीआईजी यतीश चंद्र की निगरानी में काम कर रही एसआईटी साइबर जांच के जरिए 'वडकारा स्क्वाड' और 'रेड वॉलंटियर्स बटालियन' जैसे व्हाट्सएप समूहों की भूमिका खंगाल रही है। जांच का उद्देश्य स्क्रीनशॉट के निर्माण, उसके प्रसार और चुनाव को सांप्रदायिक रूप से प्रभावित करने के संभावित इरादे की पड़ताल करना है।
मोहम्मद कासीम के मामले में क्या हुआ था?
शुरुआत में एमएसएफ नेता मोहम्मद कासीम के खिलाफ इस मामले में केस दर्ज किया गया था। बाद में केरल उच्च न्यायालय ने कहा कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे उन्हें राहत मिली।
राष्ट्र प्रेस
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