ओडिशा बंद: इंडिया गठबंधन के 12 घंटे के बंद से पूरे राज्य में जनजीवन ठप, ट्रेन-बस सेवाएँ प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
इंडिया गठबंधन ने 8 अक्टूबर 2026 को ओडिशा में 12 घंटे का राज्यव्यापी बंद आयोजित किया, जिससे परिवहन, व्यापार और शिक्षा सहित सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने यह बंद चार प्रमुख मांगों को लेकर बुलाया, जिनमें स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के चलते मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा सबसे अहम माँग थी।
बंद का असर और ज़मीनी हालात
बंद के दौरान ओडिशा के प्रमुख शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात लगभग ठप रहा। कम्युनिस्ट पार्टियों, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर टायर जलाकर रास्ते अवरुद्ध किए। पैसेंजर बसें, ऑटो-रिक्शा और ट्रक अधिकांश मार्गों से नदारद रहे।
हाईवे पर सैकड़ों वाहन घंटों तक फँसे रहे, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। बड़े शहरों में निजी संस्थान, बाज़ार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी बंद रहे। यूथ कांग्रेस के सदस्यों ने राज्यभर में बाइक रैलियाँ निकालीं।
ट्रेन सेवाएँ प्रभावित, सुरक्षाबलों से झड़प
कई स्थानों पर कुछ घंटों के लिए ट्रेन सेवाएँ भी बाधित हुईं। कथित तौर पर इंडिया ब्लॉक के कार्यकर्ता रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनें रोकने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। इमरजेंसी सेवाओं को संचालित रहने की अनुमति दी गई थी और भुवनेश्वर में पर्यटकों तथा बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए कुछ छूट भी दी गई।
चार मुख्य माँगें
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने मीडिया को बताया कि बंद चार माँगों को लेकर बुलाया गया है। पहली माँग — SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के चलते मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा। दूसरी माँग — MMDR संशोधन अधिनियम 2026 को रद्द करना। तीसरी माँग — पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियों के लिए ओडिशा के स्कूल और जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा। चौथी माँग — राज्य में हाल की बाढ़ से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत और मुआवजा।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया और चेतावनी
दास ने कहा कि बंद का असर शहरों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में अधिक देखा गया और लोगों ने इसे स्वतःस्फूर्त समर्थन दिया। उन्होंने बार-बार कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण आंदोलन बनाए रखने की अपील की।
दास ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इन चार माँगों को पूरा करने में नाकाम रही, तो आंदोलन और तेज होगा और अगले दो महीनों में इसका दायरा काफी बढ़ सकता है। गौरतलब है कि यह बंद ऐसे समय में आया है जब SIR प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्ष का विरोध तेज हो रहा है।
आगे क्या
इंडिया ब्लॉक ने स्पष्ट किया है कि माँगें पूरी न होने पर वे और व्यापक आंदोलन की रणनीति बनाएँगे। ओडिशा सरकार की ओर से बंद के दौरान कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। आने वाले दिनों में राज्य की राजनीतिक गतिविधियाँ और तेज होने की संभावना है।