ओडिशा CEO गोपालन ने VRS के लिए आवेदन किया, SIR विवाद से इनकार; BJD ने उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और 2001 बैच के आईएएस अधिकारी आर.एस. गोपालन ने 1 अक्टूबर 2026 को अपनी सेवानिवृत्ति से लगभग 21 महीने पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राज्य में हाल ही में संपन्न 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विवाद चल रहा है।
गोपालन का फैसला और उनका पक्ष
गोपालन ने बुधवार को VRS के लिए अप्लाई किया और गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए अपने निर्णय को पूरी तरह निजी बताया। उन्होंने कहा, "मैंने 25 साल की सर्विस पूरी कर ली है और अब मैं पेंशन के लिए योग्य हूँ। मेरी सर्विस के लगभग दो साल ही बचे हैं। ओडिशा प्रशासन ने मेरा बहुत अच्छा ख्याल रखा है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फैसले का SIR प्रक्रिया या उससे जुड़े किसी भी विवाद से कोई संबंध नहीं है।
SIR प्रक्रिया पर गोपालन का दावा
एसआईआर का उल्लेख करते हुए गोपालन ने कहा कि ओडिशा में यह प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हुई। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत राज्य में लगभग 58 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए। उन्होंने कहा, "हमने राज्य में यह प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी की है। मेरे फैसले के पीछे ऐसा कुछ नहीं है जैसा मीडिया में अंदाज़ा लगाया जा रहा है।" सेवानिवृत्ति के बाद गोपालन ने पेशेवर क्षेत्र में नई संभावनाएँ तलाशने की इच्छा जताई।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के उप नेता और वरिष्ठ बीजू जनता दल (BJD) नेता प्रसन्न आचार्य ने गोपालन के VRS के समय पर गंभीर सवाल उठाए। आचार्य ने कहा, "अहम सवाल यह है कि देश में कई नौकरशाह समय से पहले इस्तीफा दे रहे हैं और वह भी SIR की प्रक्रिया के बीच। यह स्वाभाविक है कि लोगों के मन में शक पैदा हो कि इतने सारे नौकरशाह, खासकर वे जो इस SIR काम से जुड़े हैं, इस्तीफा क्यों दे रहे हैं।" आलोचकों का कहना है कि इस तरह के एक साथ इस्तीफे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।
व्यापक संदर्भ: एक और IPS अधिकारी का इस्तीफा
गौरतलब है कि इससे पहले 2013 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी जगमोहन मीणा ने भी निजी कारणों का हवाला देते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। यह ऐसे समय में आया है जब SIR को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस गरमाई हुई है और कई राज्यों में इस प्रक्रिया पर विपक्षी दलों ने आपत्तियाँ जताई हैं। वरिष्ठ नौकरशाहों के एक के बाद एक इस्तीफों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और हवा दे दी है।
आगे क्या होगा
अब यह देखना होगा कि VRS आवेदन को ओडिशा सरकार कब और किस आधार पर स्वीकृत करती है, और गोपालन के स्थान पर नए CEO की नियुक्ति कैसे होती है। SIR विवाद को देखते हुए इस बदलाव पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से नज़र रहेगी।