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ओडिशा CEO गोपालन ने VRS के लिए आवेदन किया, SIR विवाद से इनकार; BJD ने उठाए सवाल

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ओडिशा CEO गोपालन ने VRS के लिए आवेदन किया, SIR विवाद से इनकार; BJD ने उठाए सवाल

सारांश

ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आर.एस. गोपालन का रिटायरमेंट से 21 महीने पहले VRS माँगना और देशभर में SIR विवाद के बीच नौकरशाहों के इस्तीफे — BJD ने सवाल उठाया कि यह महज़ संयोग है या कुछ और। गोपालन फैसले को निजी बता रहे हैं, पर सियासी हलचल थमने का नाम नहीं ले रही।

मुख्य बातें

गोपालन , ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, ने 1 अक्टूबर 2026 को VRS के लिए आवेदन किया — रिटायरमेंट से लगभग 21 महीने पहले।
गोपालन ने VRS को पूरी तरह निजी फैसला बताया और SIR विवाद से किसी भी संबंध से इनकार किया।
ओडिशा में SIR के तहत लगभग 58 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए, जिसे गोपालन ने सुचारू बताया।
वरिष्ठ BJD नेता प्रसन्न आचार्य ने VRS के समय पर सवाल उठाए और SIR से जुड़े नौकरशाहों के इस्तीफों पर संदेह जताया।
2013 बैच के IPS अधिकारी जगमोहन मीणा भी इससे पहले ओडिशा कैडर से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके हैं।

ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और 2001 बैच के आईएएस अधिकारी आर.एस. गोपालन ने 1 अक्टूबर 2026 को अपनी सेवानिवृत्ति से लगभग 21 महीने पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राज्य में हाल ही में संपन्न 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विवाद चल रहा है।

गोपालन का फैसला और उनका पक्ष

गोपालन ने बुधवार को VRS के लिए अप्लाई किया और गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए अपने निर्णय को पूरी तरह निजी बताया। उन्होंने कहा, "मैंने 25 साल की सर्विस पूरी कर ली है और अब मैं पेंशन के लिए योग्य हूँ। मेरी सर्विस के लगभग दो साल ही बचे हैं। ओडिशा प्रशासन ने मेरा बहुत अच्छा ख्याल रखा है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फैसले का SIR प्रक्रिया या उससे जुड़े किसी भी विवाद से कोई संबंध नहीं है।

SIR प्रक्रिया पर गोपालन का दावा

एसआईआर का उल्लेख करते हुए गोपालन ने कहा कि ओडिशा में यह प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हुई। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत राज्य में लगभग 58 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए। उन्होंने कहा, "हमने राज्य में यह प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी की है। मेरे फैसले के पीछे ऐसा कुछ नहीं है जैसा मीडिया में अंदाज़ा लगाया जा रहा है।" सेवानिवृत्ति के बाद गोपालन ने पेशेवर क्षेत्र में नई संभावनाएँ तलाशने की इच्छा जताई।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के उप नेता और वरिष्ठ बीजू जनता दल (BJD) नेता प्रसन्न आचार्य ने गोपालन के VRS के समय पर गंभीर सवाल उठाए। आचार्य ने कहा, "अहम सवाल यह है कि देश में कई नौकरशाह समय से पहले इस्तीफा दे रहे हैं और वह भी SIR की प्रक्रिया के बीच। यह स्वाभाविक है कि लोगों के मन में शक पैदा हो कि इतने सारे नौकरशाह, खासकर वे जो इस SIR काम से जुड़े हैं, इस्तीफा क्यों दे रहे हैं।" आलोचकों का कहना है कि इस तरह के एक साथ इस्तीफे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।

व्यापक संदर्भ: एक और IPS अधिकारी का इस्तीफा

गौरतलब है कि इससे पहले 2013 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी जगमोहन मीणा ने भी निजी कारणों का हवाला देते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। यह ऐसे समय में आया है जब SIR को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस गरमाई हुई है और कई राज्यों में इस प्रक्रिया पर विपक्षी दलों ने आपत्तियाँ जताई हैं। वरिष्ठ नौकरशाहों के एक के बाद एक इस्तीफों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और हवा दे दी है।

आगे क्या होगा

अब यह देखना होगा कि VRS आवेदन को ओडिशा सरकार कब और किस आधार पर स्वीकृत करती है, और गोपालन के स्थान पर नए CEO की नियुक्ति कैसे होती है। SIR विवाद को देखते हुए इस बदलाव पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उससे जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का एक एक करके हटना क्या संकेत देता है। चुनावी तंत्र की विश्वसनीयता के लिए यह ज़रूरी है कि VRS स्वीकृति की प्रक्रिया पारदर्शी हो और इसका संस्थागत जवाब मिले, न कि केवल व्यक्तिगत स्पष्टीकरण।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा के CEO आर.एस. गोपालन ने VRS क्यों माँगी है?
गोपालन ने अपना फैसला निजी बताया है। उनके अनुसार उन्होंने 25 साल की सेवा पूरी कर ली है, पेंशन के लिए पात्र हैं, और भविष्य में पेशेवर क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। उन्होंने SIR विवाद से किसी संबंध से स्पष्ट इनकार किया है।
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR मतदाता सूची की गहन समीक्षा की एक प्रक्रिया है जिसके तहत संभावित रूप से अपात्र या अनुपस्थित मतदाताओं को नोटिस भेजे जाते हैं। ओडिशा में इस प्रक्रिया के तहत लगभग 58 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों ने इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
BJD ने गोपालन के VRS पर क्या कहा?
BJD के वरिष्ठ नेता और ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के उप नेता प्रसन्न आचार्य ने VRS के समय पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के बीच कई नौकरशाहों का समय से पहले इस्तीफा देना स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा करता है।
क्या ओडिशा में कोई और वरिष्ठ अधिकारी ने भी हाल में VRS लिया है?
हाँ, 2013 बैच के ओडिशा कैडर के IPS अधिकारी जगमोहन मीणा ने भी इससे पहले निजी कारणों का हवाला देते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। दो वरिष्ठ अधिकारियों के लगातार इस्तीफों ने राजनीतिक बहस को और तेज़ कर दिया है।
गोपालन के VRS के बाद ओडिशा में आगे क्या होगा?
अब ओडिशा सरकार को VRS आवेदन पर निर्णय लेना होगा और नए मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी। SIR विवाद की पृष्ठभूमि में यह प्रशासनिक बदलाव राजनीतिक और चुनावी दोनों दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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