ओडिशा बंद: जनता का विपक्ष पर फूटा गुस्सा, नर्सें किलोमीटरों पैदल चलने को मजबूर
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा में 8 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन द्वारा बुलाए गए बंद के कारण राज्यभर में सामान्य जनजीवन बाधित हो गया। भुवनेश्वर सहित कई जिलों में अस्पताल कर्मचारियों, नर्सों और आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा, जिसके चलते सड़कों पर विपक्षी दलों के खिलाफ स्पष्ट नागरिक आक्रोश देखा गया।
आम जनता की परेशानी
भुवनेश्वर निवासी सुनीता राज ने कहा, 'यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। इसका कोई फायदा नहीं है।' उन्होंने आगे कहा कि सरकार के गलत फैसलों से हर किसी को नुकसान होता है, सिर्फ राजनीतिक दलों को नहीं। सुनीता ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रदर्शन से जनता को वास्तविक लाभ मिले तो वे उसका समर्थन करेंगी, परंतु जरूरी कामों के लिए घर से निकलने वालों को रोका नहीं जाना चाहिए।
सुनीता राज ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा, 'विपक्ष को सरकार को परेशान करना चाहिए। जब हम खुद परेशान हैं, उस समय विपक्ष भी हमें परेशान कर रहा है।'
स्वास्थ्यकर्मियों की मुश्किलें
बंद का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्यसेवाओं पर दिखा। एक नर्स ने बताया कि विरोध प्रदर्शनों के कारण उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलकर ड्यूटी पर पहुँचना पड़ा। एक अन्य नर्स ने कहा कि वह तीन किलोमीटर दूर से पैदल आई हैं और आगे भी कई किलोमीटर जाना है। उन्होंने कहा, 'अगर गाड़ी मिलती है तो सही होगा, नहीं तो पैदल ही जाना पड़ेगा।'
बंद के पीछे विपक्ष की माँगें
विपक्षी दलों ने इस बंद का आह्वान कई प्रमुख माँगों को लेकर किया है। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, संशोधित एमएमडीआर अधिनियम को रद्द करना, पाठ्यपुस्तकों में गलतियों पर कार्रवाई, शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा और बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए मुआवजा शामिल हैं। गौरतलब है कि पिछले 10 दिनों से विपक्षी कार्यकर्ता इस बंद के प्रचार में लगे थे।
सीपीएम का पक्ष
सीपीएम के ओडिशा महासचिव सुरेश पाणिग्रही ने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन ने आज ओडिशा में बंद का आह्वान किया है और सुंदरगढ़ से लेकर मलकानगिरी तक सभी नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर हैं। उन्होंने बताया कि बंद का पहला और प्रमुख मुद्दा एमएमडीआर संशोधन अधिनियम को रद्द करवाना है। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और मुआवजे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनाव पहले से बना हुआ है।
आगे क्या
नागरिकों की नाराजगी विपक्षी दलों के लिए एक राजनीतिक संदेश है — बंद जैसे हथियारों की स्वीकार्यता आम जनता में घटती जा रही है, खासकर तब जब स्वास्थ्य और आवाजाही जैसी बुनियादी सेवाएँ प्रभावित होती हों। आने वाले दिनों में विपक्ष की इन माँगों पर सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि बंद का राजनीतिक उद्देश्य सफल हो सका या नहीं।