8 अक्टूबर 2026
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ओडिशा बंद: जनता का विपक्ष पर फूटा गुस्सा, नर्सें किलोमीटरों पैदल चलने को मजबूर

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ओडिशा बंद: जनता का विपक्ष पर फूटा गुस्सा, नर्सें किलोमीटरों पैदल चलने को मजबूर

सारांश

ओडिशा में 'इंडिया' गठबंधन के बंद ने उल्टा असर दिखाया — सड़कों पर परेशान नागरिकों ने विपक्ष से ही सवाल पूछे। नर्सें किलोमीटरों पैदल चलीं, और भुवनेश्वर में आम महिला सुनीता राज ने दो टूक कहा: सरकार को निशाना बनाओ, जनता को नहीं।

मुख्य बातें

8 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन के बंद से ओडिशा में सामान्य जनजीवन बाधित।
भुवनेश्वर निवासी सुनीता राज सहित आम नागरिकों ने विपक्षी प्रदर्शन की रणनीति पर खुलकर सवाल उठाए।
एक नर्स को तीन किलोमीटर से अधिक पैदल चलकर ड्यूटी पर पहुँचना पड़ा।
बंद की प्रमुख माँगों में सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एमएमडीआर अधिनियम वापसी और शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा शामिल।
सीपीएम महासचिव सुरेश पाणिग्रही ने कहा कि सुंदरगढ़ से मलकानगिरी तक सभी नेता-कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे।

ओडिशा में 8 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन द्वारा बुलाए गए बंद के कारण राज्यभर में सामान्य जनजीवन बाधित हो गया। भुवनेश्वर सहित कई जिलों में अस्पताल कर्मचारियों, नर्सों और आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा, जिसके चलते सड़कों पर विपक्षी दलों के खिलाफ स्पष्ट नागरिक आक्रोश देखा गया।

आम जनता की परेशानी

भुवनेश्वर निवासी सुनीता राज ने कहा, 'यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। इसका कोई फायदा नहीं है।' उन्होंने आगे कहा कि सरकार के गलत फैसलों से हर किसी को नुकसान होता है, सिर्फ राजनीतिक दलों को नहीं। सुनीता ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रदर्शन से जनता को वास्तविक लाभ मिले तो वे उसका समर्थन करेंगी, परंतु जरूरी कामों के लिए घर से निकलने वालों को रोका नहीं जाना चाहिए।

सुनीता राज ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा, 'विपक्ष को सरकार को परेशान करना चाहिए। जब हम खुद परेशान हैं, उस समय विपक्ष भी हमें परेशान कर रहा है।'

स्वास्थ्यकर्मियों की मुश्किलें

बंद का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्यसेवाओं पर दिखा। एक नर्स ने बताया कि विरोध प्रदर्शनों के कारण उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलकर ड्यूटी पर पहुँचना पड़ा। एक अन्य नर्स ने कहा कि वह तीन किलोमीटर दूर से पैदल आई हैं और आगे भी कई किलोमीटर जाना है। उन्होंने कहा, 'अगर गाड़ी मिलती है तो सही होगा, नहीं तो पैदल ही जाना पड़ेगा।'

बंद के पीछे विपक्ष की माँगें

विपक्षी दलों ने इस बंद का आह्वान कई प्रमुख माँगों को लेकर किया है। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, संशोधित एमएमडीआर अधिनियम को रद्द करना, पाठ्यपुस्तकों में गलतियों पर कार्रवाई, शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा और बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए मुआवजा शामिल हैं। गौरतलब है कि पिछले 10 दिनों से विपक्षी कार्यकर्ता इस बंद के प्रचार में लगे थे।

सीपीएम का पक्ष

सीपीएम के ओडिशा महासचिव सुरेश पाणिग्रही ने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन ने आज ओडिशा में बंद का आह्वान किया है और सुंदरगढ़ से लेकर मलकानगिरी तक सभी नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर हैं। उन्होंने बताया कि बंद का पहला और प्रमुख मुद्दा एमएमडीआर संशोधन अधिनियम को रद्द करवाना है। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और मुआवजे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनाव पहले से बना हुआ है।

आगे क्या

नागरिकों की नाराजगी विपक्षी दलों के लिए एक राजनीतिक संदेश है — बंद जैसे हथियारों की स्वीकार्यता आम जनता में घटती जा रही है, खासकर तब जब स्वास्थ्य और आवाजाही जैसी बुनियादी सेवाएँ प्रभावित होती हों। आने वाले दिनों में विपक्ष की इन माँगों पर सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि बंद का राजनीतिक उद्देश्य सफल हो सका या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भुवनेश्वर की सड़कों पर नागरिकों की प्रत्यक्ष नाराजगी बताती है कि यह औजार अपनी धार खोता जा रहा है। विपक्ष के पास माँगें वैध हो सकती हैं — एमएमडीआर संशोधन और बाढ़ मुआवजे पर सार्वजनिक असंतोष वास्तविक है — लेकिन जब स्वास्थ्यकर्मी किलोमीटरों पैदल चलने पर मजबूर हों, तो राजनीतिक संदेश का केंद्र सरकार से खिसककर खुद विपक्ष पर आ जाता है। यह विरोधाभास 'इंडिया' गठबंधन के लिए गंभीर है: जन-समर्थन जुटाने की कोशिश में जन-असुविधा का जरिया बनना, असल मुद्दों को राजनीतिक शोर में दबा देता है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा बंद 8 अक्टूबर 2026 को किसने बुलाया और क्यों?
यह बंद कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन ने बुलाया। प्रमुख माँगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एमएमडीआर संशोधन अधिनियम को रद्द करना, शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा और बाढ़ प्रभावितों के लिए मुआवजा शामिल हैं।
ओडिशा बंद का आम जनता पर क्या असर पड़ा?
भुवनेश्वर सहित पूरे ओडिशा में यातायात बाधित रहा और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। नर्सें तीन किलोमीटर से अधिक पैदल चलकर ड्यूटी पर पहुँचीं, जबकि आम नागरिकों को अपने गंतव्य तक पहुँचने में भारी कठिनाई हुई।
एमएमडीआर संशोधन अधिनियम क्या है जिसे रद्द करने की माँग हो रही है?
एमएमडीआर (Mines and Minerals Development and Regulation) संशोधन अधिनियम खनन क्षेत्र से जुड़ा कानून है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस संशोधन से आम लोगों और स्थानीय समुदायों के हितों पर विपरीत असर पड़ा है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।
सुनीता राज ने विपक्ष के प्रदर्शन पर क्या कहा?
भुवनेश्वर निवासी सुनीता राज ने कहा कि विपक्ष को सरकार को परेशान करना चाहिए, न कि आम जनता को। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन से जनता को फायदा हो तो वे समर्थन करेंगी, लेकिन जरूरी कामों के लिए घर से निकलने वालों को नहीं रोका जाना चाहिए।
सीपीएम ने बंद को लेकर क्या कहा?
सीपीएम के ओडिशा महासचिव सुरेश पाणिग्रही ने कहा कि पिछले 10 दिनों से बंद का प्रचार हो रहा था और सुंदरगढ़ से मलकानगिरी तक सभी नेता व कार्यकर्ता सड़कों पर हैं। उन्होंने एमएमडीआर संशोधन अधिनियम को रद्द कराना बंद का पहला और प्रमुख मुद्दा बताया।
राष्ट्र प्रेस
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