भारत की मदद से कंबोडिया के काओ पाओ गांव को मिली 1,97,810 वर्ग मीटर बारूदी सुरंग-मुक्त जमीन
सारांश
मुख्य बातें
भारत सरकार की मेकांग-गंगा सहयोग क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट (QIP) योजना के तहत बारूदी सुरंगों और बिना फटे गोला-बारूद से साफ की गई 1,97,810 वर्ग मीटर जमीन 4 अक्टूबर 2026 को कंबोडिया के कोह कोंग प्रांत के काओ पाओ गांव के लोगों को आधिकारिक रूप से सौंप दी गई। इस जमीन से करीब 134 परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा, जो अब इसका उपयोग खेती, आवास निर्माण और रोज़गार के लिए कर सकेंगे।
भूमि हस्तांतरण कार्यक्रम
इस ऐतिहासिक अवसर पर एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें कंबोडिया में भारतीय दूतावास की डिप्टी चीफ ऑफ मिशन डॉ. तनु प्रिया, कोह कोंग प्रांत के डिप्टी गवर्नर वाई. नियरिनेट और कंबोडिया माइन एक्शन एंड विक्टिम असिस्टेंस अथॉरिटी (CMAA) के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल टेप कल्याण उपस्थित रहे।
भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा कि डीसीएम डॉ. तनु प्रिया, CMAA के डीएसजी टेप कल्याण और कोह कोंग प्रांत के डिप्टी गवर्नर की उपस्थिति में मेकांग-गंगा सहयोग क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट के तहत साफ की गई जमीन को समुदाय को वापस सौंपा गया।
आम जनता पर असर
दूतावास के बयान के अनुसार, इस भूमि हस्तांतरण से काओ पाओ गांव के 134 परिवारों को आजीविका, खेती, आवास और अन्य सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित ज़मीन मिलेगी। दशकों से बारूदी सुरंगों के खतरे के कारण यह जमीन बेकार पड़ी थी और ग्रामीण इसका उपयोग करने से डरते थे।
द नोम पेन्ह पोस्ट के अनुसार, साफ की गई जमीन का कुल क्षेत्रफल 1,97,810 वर्ग मीटर है — जो इस क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी एकल भूमि-निष्क्रियीकरण परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।
भारत-कंबोडिया बारूदी सुरंग सहयोग की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि भारत ने 1990 के दशक की शुरुआत से ही कंबोडिया के साथ बारूदी सुरंग निष्क्रियीकरण के मानवीय प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाई है। इस सहयोग में क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, बारूदी सुरंग हटाने के उपकरण, माइन डिटेक्शन डॉग और सुरंग पीड़ितों को सहायता प्रदान करना शामिल रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंध और गहरे कर रहा है। बारूदी सुरंग निष्क्रियीकरण जैसे मानवीय कार्यक्रम इस कूटनीतिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
भारत-कंबोडिया व्यापार में भी उल्लेखनीय वृद्धि
इससे पहले 24 अगस्त को भारत और कंबोडिया ने नोम पेन्ह में आयोजित व्यापार एवं निवेश पर संयुक्त कार्य समूह की तीसरी बैठक में पारंपरिक चिकित्सा, ई-गवर्नेंस, भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता और डिजिटल भुगतान प्रणाली को मज़बूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की थी।
आँकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 36 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है और यह 2025-26 में 40.678 करोड़ डॉलर तक पहुँच गया है।
क्या होगा आगे
मेकांग-गंगा सहयोग ढाँचे के तहत भारत के और भी QIP प्रोजेक्ट कंबोडिया सहित अन्य मेकांग क्षेत्र के देशों में चल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की ज़मीनी स्तर की मानवीय परियोजनाएँ भारत की 'सॉफ्ट पावर' कूटनीति को दीर्घकालिक रूप से मज़बूत करती हैं और क्षेत्रीय विश्वास निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।