बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट रद्द करो: देवेगौड़ा की कर्नाटक सरकार को चेतावनी, विधान सौधा में सत्याग्रह की धमकी
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (सेक्युलर) के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने 14 जुलाई को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए मांग की कि प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट तत्काल रद्द किया जाए और प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी अपील को नज़रअंदाज़ किया, तो वे विधान सौधा में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने सत्याग्रह शुरू करने पर मजबूर होंगे।
मंडलाहल्ली हिंसा और सर्वे विवाद
देवेगौड़ा ने कहा कि सोमवार को मंडलाहल्ली गांव में जॉइंट मेजरमेंट सर्वे (JMC) के दौरान हुई हिंसा दुर्भाग्यपूर्ण थी। उन्होंने स्वीकार किया कि किसी को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन सवाल उठाया कि आखिर स्थिति इस हद तक क्यों बिगड़ने दी गई। उन्होंने सर्वे रोकने के सरकार के फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि यह पर्याप्त नहीं है — सरकार को पूरे प्रोजेक्ट को ही वापस लेना होगा।
किसानों की आजीविका पर खतरा
देवेगौड़ा ने बताया कि प्रस्तावित टाउनशिप से 2,555 छोटे और सीमांत किसान सीधे प्रभावित होंगे, जो अपनी आजीविका के लिए खेती और डेयरी फार्मिंग पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 60,000 लीटर दूध का उत्पादन होता है और किसान अपने मवेशियों के लिए इसी भूमि पर चारा उगाते हैं। उन्होंने कहा कि वे एक सांसद या राजनीतिक नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक किसान के बेटे के रूप में बोल रहे हैं।
मुख्यमंत्री को पत्र, लेकिन पावती नहीं
देवेगौड़ा ने खुलासा किया कि उन्होंने 25 जून को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पत्र लिखकर किसानों की चिंताओं से अवगत कराया था और प्रोजेक्ट पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि लगभग 20 दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें पत्र की पावती तक नहीं मिली। उन्होंने उम्मीद जताई कि शिवकुमार, जो स्वयं को किसान का बेटा बताते हैं, छोटे किसानों की पीड़ा को समझेंगे।
कांग्रेस पर राजनीतिक पलटवार
देवेगौड़ा ने कांग्रेस सरकार पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब एचडी कुमारस्वामी के कार्यकाल में यही टाउनशिप प्रस्ताव आया था, तब कांग्रेस ने इसका विरोध किया था, जांच समिति बनाई थी और प्रोजेक्ट रद्द करवाया था। आलोचकों का कहना है कि आज वही कांग्रेस सरकार अंतिम अधिसूचना जारी करने के बाद इसे लागू कर रही है।
देवेगौड़ा ने यह भी सवाल उठाया कि डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद संभालने के एक महीने के भीतर ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया क्यों शुरू कर दी, जबकि उनके पूर्ववर्ती सिद्दारमैया ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया था।
राजनीतिक समीकरण और आगे की राह
बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट अब कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा विवादास्पद मुद्दा बन चुका है। राज्य सरकार इसे शहरी विकास की प्रमुख पहल बताकर इसका बचाव कर रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP), जनता दल (सेक्युलर) (JDS) और किसानों का एक बड़ा वर्ग इसका विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि यह प्रोजेक्ट हजारों किसानों को उनकी उपजाऊ भूमि और आजीविका से वंचित कर देगा। अब सरकार के अगले कदम पर सभी की नज़रें टिकी हैं।