14 जुलाई 2026
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बिदादी टाउनशिप विरोध: भूमि सर्वेक्षण के दौरान हिंसा, 20 से अधिक किसानों पर एफआईआर दर्ज

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बिदादी टाउनशिप विरोध: भूमि सर्वेक्षण के दौरान हिंसा, 20 से अधिक किसानों पर एफआईआर दर्ज

सारांश

बेंगलुरु के बाहरी इलाके में प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप के लिए जमीन नापने गई सरकारी टीम पर पथराव और हमले के बाद 20 से अधिक किसानों पर एफआईआर दर्ज हुई। करीब 500 दिनों से चल रहे इस आंदोलन ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है, जिसमें केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार पर किसानों को डराने का आरोप लगाया है।

मुख्य बातें

14 जुलाई 2026 को बिदादी में भूमि सर्वेक्षण के दौरान हिंसक विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें सर्वे टीम पर पथराव का आरोप है।
कर्नाटक सरकार ने राजस्व विभाग की शिकायत पर 20 से अधिक किसानों के खिलाफ बिदादी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की।
किसान पिछले करीब 500 दिनों से बिदादी टाउनशिप परियोजना का विरोध कर रहे हैं और परियोजना को पूरी तरह रद्द करने की माँग कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसान आंदोलन दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है।
सरकार ने पुलिस सुरक्षा के बीच दोबारा सर्वे कराने और किसानों से बातचीत करने की योजना बनाई है।
रामनगरा एसपी श्रीनिवास गौड़ा ने मंडलहल्ली पहुँचकर किसानों से संवाद किया और कानून-व्यवस्था की समीक्षा की।

कर्नाटक सरकार ने 14 जुलाई 2026 को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए किए जा रहे भूमि सर्वेक्षण के दौरान हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद 20 से अधिक किसानों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। यह मामला बिदादी पुलिस स्टेशन में राजस्व विभाग के अधिकारियों की शिकायत पर दर्ज किया गया है। क्षेत्र में अभी भी तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और प्रशासन ने फिलहाल सर्वेक्षण का कार्य रोक दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

विवाद तब भड़का जब सरकारी टीम जॉइंट मेजरमेंट सर्वे (JMC) — जो भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण है — करने के लिए मंडलहल्ली क्षेत्र पहुँची। किसानों और महिला प्रदर्शनकारियों ने टीम का जोरदार विरोध किया। अधिकारियों के अनुसार, कुछ किसानों ने सर्वे टीम पर पथराव किया और अधिकारियों को दौड़ाया, जिससे सर्वेक्षण बीच में रोकना पड़ा। कथित तौर पर कुछ महिला प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों के वाहनों पर झाड़ू से वार किया।

अधिकारियों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उन पर हमला किया और सरकारी कामकाज में बाधा डाली। घटनास्थल पर तैनात पुलिसकर्मी भीड़ को नियंत्रित करने में असमर्थ रहे।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना के बाद रामनगरा के पुलिस अधीक्षक श्रीनिवास गौड़ा मंडलहल्ली पहुँचे और किसानों से बातचीत की। उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामचंद्रैया, उप पुलिस अधीक्षक गिरीश और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर कानून-व्यवस्था की समीक्षा की। एसपी ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे सरकारी कर्मचारियों को उनके आधिकारिक कार्यों से न रोकें और कानून को अपने हाथ में न लें।

कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट किया है कि आगे बढ़ने से पहले किसानों से बातचीत की जाएगी और पुलिस सुरक्षा के बीच सर्वेक्षण दोबारा कराया जाएगा। जिला प्रशासन समाधान निकालने के लिए किसानों के साथ बातचीत जारी रखे हुए है।

किसानों का पक्ष और लंबा संघर्ष

किसान पिछले करीब 500 दिनों से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनकी मुख्य चिंता यह है कि उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण से उनकी आजीविका पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी। इसी कारण किसान लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रहे हैं ताकि अधिकारी दोबारा सर्वेक्षण न कर सकें। प्रदर्शनकारी इस टाउनशिप परियोजना को पूरी तरह रद्द करने की माँग पर अड़े हुए हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में कृषि भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवाद लगातार बढ़ रहे हैं और किसान संगठन सरकारी परियोजनाओं के विरुद्ध अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।

राजनीतिक विवाद

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों के आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस तंत्र का इस्तेमाल कर रही है और स्थानीय लोगों के 500 दिनों के लंबे विरोध के बावजूद अचानक सर्वे शुरू कराने के पीछे सरकार का 'अदृश्य हाथ' है।

कुमारस्वामी ने किसानों, महिलाओं और माताओं से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की और हिंसा से बचने की सलाह दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह और उनके सहयोगी किसानों की कानूनी लड़ाई में हरसंभव मदद करेंगे। साथ ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों से भी राजनीतिक दबाव में न आने की अपील की।

आगे क्या होगा

बिदादी क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और प्रशासन समाधान की राह तलाश रहा है। पुलिस सुरक्षा के बीच दोबारा सर्वे शुरू करने की विस्तृत योजना तैयार की जा रही है, लेकिन किसानों के कड़े रुख को देखते हुए यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी। गौरतलब है कि सरकार के अनुसार यह सर्वे केवल प्रारंभिक प्रक्रिया है, जबकि किसान इसे अपनी ज़मीन छिनने की शुरुआत मानते हैं — यह मतभेद ही इस विवाद की जड़ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इससे किसानों की मूल चिंता — आजीविका का संकट — का समाधान नहीं होगा। असली परीक्षा यह है कि सरकार बातचीत को केवल औपचारिकता मानती है या वास्तविक पुनर्विचार का अवसर।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिदादी टाउनशिप परियोजना क्या है और किसान इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
बिदादी टाउनशिप परियोजना कर्नाटक सरकार द्वारा बेंगलुरु के बाहरी इलाके में प्रस्तावित एक नई टाउनशिप विकास योजना है। किसानों को आशंका है कि इस परियोजना के लिए उनकी उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहीत की जाएगी, जिससे उनकी आजीविका पूरी तरह प्रभावित होगी। वे करीब 500 दिनों से इस परियोजना को पूरी तरह रद्द करने की माँग करते आ रहे हैं।
बिदादी में 14 जुलाई को क्या हुआ?
14 जुलाई 2026 को सरकारी टीम जॉइंट मेजरमेंट सर्वे (JMC) करने पहुँची, जो भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण है। किसानों और महिला प्रदर्शनकारियों ने इसका विरोध किया। अधिकारियों के अनुसार कुछ किसानों ने पथराव किया और अधिकारियों को दौड़ाया, जबकि कुछ महिलाओं ने कथित तौर पर वाहनों पर झाड़ू से वार किया। इसके बाद सर्वेक्षण रोकना पड़ा और 20 से अधिक किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई।
एचडी कुमारस्वामी ने इस मामले में क्या कहा?
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार पर किसानों के आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने किसानों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने और हिंसा से बचने की अपील की, तथा कहा कि वे किसानों की कानूनी लड़ाई में हरसंभव सहयोग करेंगे।
अब आगे क्या होगा — क्या सर्वे दोबारा होगा?
कर्नाटक सरकार ने पुलिस सुरक्षा के बीच दोबारा सर्वे कराने की योजना बनाई है, लेकिन पहले किसानों से बातचीत करने का आश्वासन दिया है। रामनगरा एसपी श्रीनिवास गौड़ा ने मंडलहल्ली में किसानों से संवाद किया है। हालाँकि किसानों के कड़े रुख को देखते हुए स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।
जॉइंट मेजरमेंट सर्वे (JMC) क्या होता है और क्या इससे ज़मीन तुरंत अधिग्रहीत हो जाती है?
जॉइंट मेजरमेंट सर्वे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का केवल प्रारंभिक चरण है, जिसमें भूमि की नाप-जोख की जाती है। सरकार का कहना है कि यह सर्वे तुरंत अधिग्रहण का आदेश नहीं है। हालाँकि किसान इसे अपनी ज़मीन छिनने की शुरुआत मानते हैं और इसीलिए इस शुरुआती कदम का भी कड़ा विरोध कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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