भारत-ईयू के बीच पर्यटन, आतिथ्य और परिवहन में सहयोग पर न्यूयॉर्क में अहम चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने 25 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में पर्यटन, आतिथ्य और परिवहन क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और प्रगाढ़ करने के उपायों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के इतर आयोजित हुई, जो व्यापक भारत-ईयू साझेदारी को नए आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बैठक का विवरण
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज और सतत परिवहन एवं पर्यटन के लिए यूरोपीय संघ के आयुक्त अपोस्टोलोस त्जित्जिकोस्टास के बीच यह द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने पर्यटन प्रवाह बढ़ाने, आतिथ्य उद्योग में निवेश और परिवहन संपर्क सुदृढ़ करने के संभावित रास्तों पर विचार साझा किए।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया: 'सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज ने यूएनजीए से इतर सतत परिवहन और पर्यटन के लिए यूरोपीय संघ के आयुक्त अपोस्टोलोस त्जित्जिकोस्टास से मुलाकात की। उन्होंने व्यापक भारत-ईयू साझेदारी के हिस्से के रूप में पर्यटन, आतिथ्य और परिवहन क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।'
समुद्र स्तर वृद्धि पर भारत का रुख
उसी दिन पहले सीबी जॉर्ज ने यूएनजीए के 81वें सत्र में समुद्र के जलस्तर में वृद्धि से उत्पन्न अस्तित्वगत खतरों पर आयोजित उच्च-स्तरीय पूर्ण बैठक में भारत का आधिकारिक वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने समुद्र के जलस्तर में वृद्धि पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा को अपनाए जाने का स्वागत करते हुए तटीय लचीलापन, मैंग्रोव संरक्षण और आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे पर भारत के ठोस प्रयासों को रेखांकित किया।
वरिष्ठ राजनयिक ने समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (यूएनसीएलओएस), स्थिर समुद्री क्षेत्रों और द्वीप तथा तटीय देशों के लिए राज्य के दर्जे की निरंतरता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने समानता और सीबीडीआर-आरसी (साझी लेकिन विभेदित जिम्मेदारियाँ और संबंधित क्षमताएँ) के सिद्धांत की भी पुनः पुष्टि की।
शांति निर्माण आयोग में भागीदारी
गुरुवार को सीबी जॉर्ज ने 81वें यूएनजीए सत्र के दौरान शांति निर्माण आयोग की मंत्रिस्तरीय बैठक में भी हिस्सा लिया। इस बैठक का विषय था — 'व्यवहार में राष्ट्रीय स्वामित्व: अंतरराष्ट्रीय शांति निर्माण समर्थन के माध्यम से समावेशी राज्य संस्थानों को मजबूत करना'। वहाँ उन्होंने शांति निर्माण प्रक्रियाओं में राष्ट्रीय स्वामित्व की केंद्रीय भूमिका की पुरज़ोर पुष्टि की।
भारत-ईयू संबंधों के लिए व्यापक महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और यूरोपीय संघ अपने व्यापार और निवेश संबंधों को नई ऊँचाई देने के प्रयासों में जुटे हैं। गौरतलब है कि पर्यटन और परिवहन क्षेत्र में सहयोग भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) वार्ता के व्यापक ढाँचे का हिस्सा माने जा रहे हैं। यूएनजीए जैसे बहुपक्षीय मंच पर इस तरह की द्विपक्षीय बैठकें दोनों पक्षों की कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती हैं। आने वाले महीनों में इन क्षेत्रों में ठोस समझौतों की रूपरेखा तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है।