राहुल गांधी से मिले ईयू के 27 देशों के मिशन प्रमुख, भारत-यूरोप रणनीतिक संबंधों पर हुई चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से 14 मई 2026 को यूरोपीय संघ (ईयू) के 27 सदस्य देशों के मिशन प्रमुखों (हेड्स ऑफ मिशन — एचओएम) ने मुलाकात की। इस बैठक में भारत-ईयू रणनीतिक संबंधों की मज़बूती और मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
बैठक का विवरण और प्रमुख उपस्थिति
यह बैठक शांति निकेतन में ईयू मिशन प्रमुखों की ओर से आयोजित लंच के रूप में हुई। इसमें कांग्रेस की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष सलमान खुर्शीद भी शामिल रहे। भारत में ईयू के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि इस बैठक में भारत और ईयू के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों तथा वैश्विक परिस्थितियों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
भारत-ईयू संबंधों की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही राजदूत डेल्फिन ने भारत और ईयू के घनिष्ठ होते संबंधों को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा था कि ये दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ हैं और हाल के वर्षों में दोनों के बीच संबंधों में 'गुणात्मक और रणनीतिक' स्तर पर उल्लेखनीय बदलाव आया है। उनके अनुसार, दोनों पक्ष एक अधिक महत्वाकांक्षी और प्रगतिशील साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
भाजपा की आलोचना और राहुल गांधी पर आरोप
उसी दिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर सवाल उठाए। BJP सांसद संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की घोषित आय और उनकी विदेश यात्राओं पर खर्च के बीच बड़ा अंतर है। पात्रा के दावे के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में राहुल गांधी की घोषित आय लगभग ₹11 करोड़ रही है, जबकि उनकी विदेश यात्राओं पर अनुमानित ₹60 करोड़ खर्च हुए।
पात्रा ने सवाल किया कि इन यात्राओं के लिए धन का स्रोत क्या है — व्यक्तिगत संपत्ति, कोई अन्य स्रोत या विदेशी फंडिंग। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ विदेश यात्राओं की जानकारी समय पर सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएँ भी सामने आई हैं। उनके अनुसार, इस मामले में पारदर्शिता की कमी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न बन सकती है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
BJP के इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और ईयू के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत नई गति पकड़ रही है। राजनयिक हलकों में इस मुलाकात को विपक्ष के साथ ईयू की बहु-स्तरीय कूटनीतिक संवाद की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जो भारत की बदलती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करती है।