भारत ग्रीन हाइड्रोजन और पावर-टू-एक्स का वैश्विक केंद्र बन सकता है: टीएनओ वरिष्ठ सलाहकार राजेश मेहता
सारांश
मुख्य बातें
नीदरलैंड की प्रतिष्ठित एप्लाइड रिसर्च संस्था नीदरलैंड्स ऑर्गनाइजेशन फॉर एप्लाइड साइंटिफिक रिसर्च (टीएनओ) के वरिष्ठ सलाहकार और भारत प्रतिनिधि राजेश मेहता ने 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत का राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन देश को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, हाइड्रोजन डेरिवेटिव्स और पावर-टू-एक्स समाधानों में एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में ले जा रहा है। उन्होंने कहा कि नीति ढाँचे की मजबूती और जमीनी निवेश के संयोजन से भारत वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की दौड़ में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनकर उभर रहा है।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की भूमिका
मेहता ने कहा, 'भारत के ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका विकास एक सुविचारित नीति ढाँचे के तहत हो रहा है।' उनके अनुसार, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन ने पूरी वैल्यू चेन और औद्योगिक क्षेत्रों को दिशा देने का काम किया है।
उन्होंने बताया कि रिफाइनरी क्षेत्र के लिए जारी किए गए टेंडर और नीति-आधारित पहलें यह प्रमाणित करती हैं कि भारत में केवल नीतिगत चर्चा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस और मापनीय कदम भी उठाए जा रहे हैं। उद्योग जगत में इस क्षेत्र को लेकर वास्तविक निवेश और परियोजनाएँ भी आकार ले रही हैं।
तकनीकी प्रगति और इलेक्ट्रोलाइजर क्षेत्र
मेहता ने बताया कि भारत पीईएम (PEM), अल्कलाइन और सॉलिड ऑक्साइड जैसी इलेक्ट्रोलाइजर तकनीकों के विस्तार और स्केल-अप में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये तकनीकी विकास भारत को वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी केंद्र बना सकते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन की माँग तेजी से बढ़ रही है और यूरोपीय देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए विश्वसनीय आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और निर्यात अवसर
मेहता के अनुसार, भारत ग्रीन हाइड्रोजन के निर्यात अवसरों पर विशेष ध्यान दे रहा है। उन्होंने कहा कि जापान, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों के साथ बढ़ती साझेदारियाँ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सहयोग केवल व्यापारिक आयाम तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान और औद्योगिक विकास तक भी फैला हुआ है। इस तरह भारत वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन आपूर्ति शृंखला में एक सक्रिय और केंद्रीय भूमिका निभाने की स्थिति में आ रहा है।
यूरोपीय अनुसंधान संस्थानों की रुचि
टीएनओ के वरिष्ठ सलाहकार ने बताया कि यूरोप के अनुसंधान संस्थान भारतीय उद्योगों, शीर्ष शोध संस्थानों और उभरती हुई हाइड्रोजन वैली परियोजनाओं के साथ मिलकर काम करने में गहरी रुचि रखते हैं। उनके अनुसार, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक सहयोग भारत के तेजी से विकसित हो रहे हाइड्रोजन इकोसिस्टम के लिए अपरिहार्य होंगे।
गौरतलब है कि यूरोपीय संस्थान अपनी विशेषज्ञता के जरिए नई तकनीकों के विकास और उनके बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग में भारत का साथ देने के लिए तैयार हैं।
भारत की ऊर्जा परिवर्तन में स्थिति
मेहता ने कहा कि नीति समर्थन, औद्योगिक निवेश, वैश्विक साझेदारियाँ और तकनीकी नवाचार के संयोजन से भारत ग्रीन हाइड्रोजन, हाइड्रोजन डेरिवेटिव्स और पावर-टू-एक्स समाधानों का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन सकता है। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में भारत की भूमिका और अधिक निर्णायक होने की संभावना है, बशर्ते कि नीतिगत निरंतरता और तकनीकी निवेश बना रहे।