आइसलैंड में कीर्ति वर्धन सिंह की जलवायु कूटनीति: भूतापीय ऊर्जा व स्वच्छ ऊर्जा सहयोग पर भारत-आइसलैंड वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय विदेश और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 9 अक्टूबर 2026 को रेक्जाविक में आइसलैंड के पर्यावरण, ऊर्जा और जलवायु मंत्री जोहान पाल जोहानसन से मुलाकात की और स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई तथा सतत विकास में द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत करने के अवसरों पर विस्तृत चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब मंत्री जोहानसन हाल ही में दूसरे भारत-ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन में भाग लेकर भारत से लौटे थे, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक जुड़ाव को रेखांकित करती है।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया, 'आज रेक्जाविक में आइसलैंड के पर्यावरण, ऊर्जा और जलवायु मंत्री जोहान पाल जोहानसन से मिलकर खुशी हुई... स्वच्छ/नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई और सतत विकास में द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत करने के अवसरों पर सार्थक चर्चा हुई।' उन्होंने यह भी कहा कि वे इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने तथा दोनों देशों के बीच व्यावहारिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।
हेल्लिशेइदी पावर प्लांट का दौरा
राज्य मंत्री ने हेल्लिशेइदी पावर प्लांट का भी दौरा किया, जो दुनिया की अग्रणी भूतापीय ऊर्जा सुविधाओं में से एक है। उन्होंने इस दौरे को 'ज्ञानवर्धक' बताते हुए कहा कि इसमें स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के लिए भूतापीय संसाधनों के आइसलैंड के अभिनव उपयोग को प्रदर्शित किया गया। उनके अनुसार यह दौरा भूतापीय ऊर्जा और व्यापक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में भारत-आइसलैंड सहयोग को मज़बूत करने की दृष्टि से बेहद उपयोगी रहा। गौरतलब है कि आइसलैंड अपनी लगभग 100% बिजली नवीकरणीय स्रोतों — मुख्यतः भूतापीय और जल विद्युत — से प्राप्त करता है, जो भारत के ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख बन सकता है।
'एक पेड़ मां के नाम' पहल
सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'एक पेड़ मां के नाम' पहल के तहत हाफनारफजोर्डर में ह्वालेयरारवाटन झील के पास एक इंग्लिश ओक का पौधा लगाया। उन्होंने इसे 'एक छोटा कदम जिसका संदेश स्थायी है' कहते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की रक्षा और एक हरित, अधिक टिकाऊ भविष्य के निर्माण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। यह पहल भारत की सॉफ्ट डिप्लोमेसी का एक प्रभावी उदाहरण है, जो पर्यावरणीय संदेश को व्यक्तिगत भावनात्मकता के साथ जोड़ती है।
आर्कटिक सर्कल असेंबली में भारत का पक्ष
राज्य मंत्री ने आर्कटिक सर्कल असेंबली में भारत द्वारा आयोजित सत्र 'आर्कटिक और जलवायु परिवर्तन: पर्यवेक्षक देशों के दृष्टिकोण' में शुरुआती वक्तव्य भी दिया। इसमें उन्होंने पर्यवेक्षक देश के रूप में आर्कटिक के साथ जुड़ाव के लिए भारत के विज्ञान-प्रथम दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला और अनुसंधान के विस्तार, सतत विकास को बढ़ावा देने तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को गहरा करने पर देश के फोकस को रेखांकित किया। भारत 2013 से आर्कटिक काउंसिल में पर्यवेक्षक देश का दर्जा रखता है और 'हिमाद्री' अनुसंधान केंद्र के माध्यम से नॉर्वे के स्वालबार्ड में सक्रिय है।
आगे की राह
भारत-आइसलैंड के बीच यह कूटनीतिक संवाद दोनों देशों की स्वच्छ ऊर्जा प्रतिबद्धताओं को एक व्यावहारिक आधार देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूतापीय ऊर्जा में आइसलैंड की विशेषज्ञता भारत के उन राज्यों — जैसे हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड — के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, जहाँ भूतापीय संभावना मौजूद है। दोनों देशों के बीच ईएफटीए ढाँचे के तहत पहले से व्यापार संबंध हैं, जो ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी साझेदारी की ज़मीन को और उपजाऊ बनाता है।