आर्कटिक सर्कल असेंबली में भारत का साइंस-फर्स्ट दृष्टिकोण, कीर्ति वर्धन सिंह ने रेक्याविक में रखा पक्ष
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय विदेश एवं पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 9 अक्टूबर 2026 को आइसलैंड की राजधानी रेक्याविक में चल रही आर्कटिक सर्कल असेंबली में भारत के साइंस-फर्स्ट दृष्टिकोण को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। एक ऑब्जर्वर स्टेट के रूप में भारत की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने अनुसंधान को सुदृढ़ करने, सतत विकास को प्रोत्साहन देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को गहरा करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
असेंबली में भारत का उद्घाटन वक्तव्य
राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने असेंबली में भारत द्वारा आयोजित सत्र — 'आर्कटिक और जलवायु परिवर्तन: ऑब्जर्वर स्टेट्स के नजरिए' — में उद्घाटन वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि भारत का साइंस-फर्स्ट दृष्टिकोण स्वालबार्ड स्थित हिमाद्री रिसर्च स्टेशन से लेकर भारत की समग्र आर्कटिक नीति तक में परिलक्षित होता है।
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि इस सत्र में उन्होंने 'मजबूत रिसर्च, सस्टेनेबल डेवलपमेंट और एक लचीले भविष्य के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग' को भारत की आगामी प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया।
आर्कटिक सर्कल के चेयरमैन से मुलाकात
राज्यमंत्री ने रेक्याविक में आर्कटिक सर्कल के चेयरमैन ओलाफुर रागनार ग्रिम्सोन से भी भेंट की। इस बैठक में वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास सहित आर्कटिक क्षेत्र के साथ भारत के दीर्घकालिक जुड़ाव के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने साझा हित के मुद्दों पर निरंतर संवाद और सहयोग की आशा व्यक्त की।
'मेल्टिंग पोल्स' सत्र में भारत-सिंगापुर का साझा नजरिया
राज्यमंत्री ने सिंगापुर की विदेश राज्यमंत्री गान सियो हुआंग के साथ मिलकर 'मेल्टिंग पोल्स: भारत और सिंगापुर के नजरिए' शीर्षक के सत्र को भी संबोधित किया। इस कार्यक्रम का संचालन आइसलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री कैट्रिन जैकब्सडॉटिर ने किया।
इस सत्र में आर्कटिक के गर्म होने से वैश्विक मौसम, समुद्र स्तर और स्थानीय समुदायों पर पड़ रहे प्रभावों पर चर्चा हुई। आर्कटिक, हिमालय और वैश्विक जलवायु प्रणाली के अंतर्संबंधों को उजागर करते हुए राज्यमंत्री ने कहा कि इस जटिल चुनौती का उत्तर विज्ञान और साझेदारी पर आधारित होना चाहिए।
आइसलैंड की विदेश मंत्री से द्विपक्षीय बैठक
इससे पूर्व गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को कीर्ति वर्धन सिंह ने आइसलैंड की विदेश मंत्री थोरगेरदुर कैट्रिन गुनार्सडॉटिर से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने मई 2026 में ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के बाद से द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की।
बैठक के बाद एक्स पर जारी बयान में राज्यमंत्री ने कहा कि भारत और आइसलैंड के बीच व्यापार एवं निवेश में सहयोग की 'मजबूत संभावना' है। उन्होंने भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) को लागू करने को दोनों देशों के संबंधों की एक प्रमुख प्राथमिकता बताया।
भारत की आर्कटिक उपस्थिति: बड़ी तस्वीर
गौरतलब है कि भारत आर्कटिक परिषद में एक ऑब्जर्वर स्टेट है और नॉर्वे के स्वालबार्ड द्वीपसमूह में अपना हिमाद्री रिसर्च स्टेशन संचालित करता है। यह भागीदारी ऐसे समय में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है जब आर्कटिक क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक रणनीतिक और वैज्ञानिक दृष्टि से तेजी से उभर रहा है। रेक्याविक में भारत की इस सक्रिय भागीदारी से स्पष्ट है कि नई दिल्ली आर्कटिक मामलों में अपनी वैज्ञानिक साख को कूटनीतिक प्रभाव में बदलने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।