11 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

2026 आर्कटिक सर्कल फोरम: रेक्याविक में 70+ देशों की बैठक, चीनी पूर्व उप विदेश मंत्री फू यिंग ने जलवायु पर दिया ज़ोर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
2026 आर्कटिक सर्कल फोरम: रेक्याविक में 70+ देशों की बैठक, चीनी पूर्व उप विदेश मंत्री फू यिंग ने जलवायु पर दिया ज़ोर

सारांश

रेक्याविक में 2026 आर्कटिक सर्कल फोरम के मंच से चीनी पूर्व उप विदेश मंत्री फू यिंग ने जलवायु परिवर्तन को प्राथमिकता देने का आह्वान किया और भू-राजनीतिक बहसों को 'समय की बर्बादी' करार दिया — यह बयान उस समय आया जब आर्कटिक पर पश्चिम और चीन के बीच तनाव बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

2026 आर्कटिक सर्कल फोरम का आयोजन 8 से 10 अक्टूबर तक रेक्याविक, आइसलैंड में हुआ।
70 से अधिक देशों के 2,500 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने फोरम में भाग लिया।
चीन की पूर्व उप विदेश मंत्री फू यिंग ने चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
फू यिंग ने जलवायु परिवर्तन को आर्कटिक की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए भू-राजनीतिक बहसों को 'समय और संसाधनों की बर्बादी' कहा।
चीन-आइसलैंड संयुक्त बयान में हरित ऊर्जा सहयोग पर विशेष बल दिया गया था।
फोरम की स्थापना 2013 में ओलाफुर रगनार ग्रिमसन ने की थी और यह हर वर्ष अक्टूबर में आयोजित होता है।

2026 आर्कटिक सर्कल फोरम का आयोजन 8 से 10 अक्टूबर 2026 तक आइसलैंड की राजधानी रेक्याविक में सम्पन्न हुआ, जिसमें 70 से अधिक देशों और क्षेत्रों के 2,500 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चीन की पूर्व उप विदेश मंत्री फू यिंग ने चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और जलवायु परिवर्तन को आर्कटिक क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती बताया।

मुख्य घटनाक्रम

फोरम के अध्यक्ष एवं आइसलैंड के पूर्व राष्ट्रपति ओलाफुर रगनार ग्रिमसन ने 'चीन को कैसे समझें' विषयक पूर्ण सत्र में फू यिंग के साथ सीधा संवाद किया। यह सत्र फोरम के सबसे चर्चित सत्रों में रहा, जिसमें वैश्विक आर्कटिक नीति एवं चीन की भूमिका पर खुली चर्चा हुई।

जलवायु परिवर्तन पर चीन का रुख

फू यिंग ने अपने संबोधन में कहा कि आर्कटिक की समुद्री बर्फ पिघल रही है, बर्फ की चादर का दायरा सिकुड़ रहा है और तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि सभी देशों को वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण पर कहीं अधिक ध्यान एवं संसाधन लगाने की ज़रूरत है। उनके अनुसार, कई मौजूदा चर्चाएं 'काल्पनिक सुरक्षा खतरों और भू-राजनीतिक मुद्दों' पर केंद्रित हैं, जिससे बहुमूल्य समय और संसाधन व्यर्थ हो रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब आर्कटिक पर नियंत्रण एवं प्रभाव को लेकर पश्चिमी देशों और रूस-चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा है। चीन स्वयं को 'निकट-आर्कटिक राज्य' कहता है और क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को वैज्ञानिक एवं आर्थिक सहयोग के रूप में पेश करता है।

चीन-आइसलैंड सहयोग

फू यिंग ने बताया कि पिछले वर्ष चीन और आइसलैंड के नेताओं द्वारा जारी संयुक्त बयान में जलवायु परिवर्तन से निपटने और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग पर विशेष बल दिया गया था। उनके अनुसार, इस प्रकार का व्यावहारिक सहयोग आर्कटिक मामलों में चीन की भागीदारी के उद्देश्यों और नीतियों को स्पष्ट रूप से परिलक्षित करता है।

चीन की वैश्विक भूमिका पर बयान

चीन के विकास और अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर चर्चा के दौरान फू यिंग ने कहा कि चीन शांतिपूर्ण विकास के मार्ग पर अग्रसर है और वह विश्व पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि चीन सभी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और अधिक न्यायसंगत वैश्विक शासन व्यवस्था के निर्माण के लिए तत्पर है। आलोचकों का कहना है कि आर्कटिक में चीन की बढ़ती गतिविधियाँ उसके 'शांतिपूर्ण विकास' के दावों से मेल नहीं खाती हैं, और पश्चिमी विश्लेषक इसे रणनीतिक विस्तार मानते हैं।

फोरम की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि आर्कटिक सर्कल फोरम की स्थापना 2013 में आइसलैंड के तत्कालीन राष्ट्रपति ओलाफुर रगनार ग्रिमसन ने की थी। यह फोरम प्रत्येक वर्ष अक्टूबर में रेक्याविक में आयोजित होता है और आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े पर्यावरण, भू-राजनीति एवं आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच माना जाता है। आगामी वर्षों में आर्कटिक नीति पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाना इस फोरम की केंद्रीय चुनौती बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

चीन की उस परिचित कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जो अपनी आर्कटिक महत्वाकांक्षाओं को पर्यावरण सहयोग की चादर में लपेटकर पेश करती है। यह उस समय विशेष रूप से उल्लेखनीय है जब चीन आर्कटिक में अपनी 'पोलर सिल्क रोड' नीति के तहत अवसंरचना और शोध उपस्थिति बढ़ा रहा है। जलवायु परिवर्तन पर चीन की वास्तविक प्रतिबद्धता और उसकी घरेलू कोयला नीति के बीच की खाई को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। रेक्याविक का यह मंच चीन के लिए पश्चिमी आलोचनाओं का प्रतिवाद करने और आर्कटिक देशों के साथ संबंध साधने का एक सोचा-समझा अवसर था।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 आर्कटिक सर्कल फोरम क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
2026 आर्कटिक सर्कल फोरम 8 से 10 अक्टूबर 2026 तक आइसलैंड की राजधानी रेक्याविक में आयोजित हुआ। इसमें 70 से अधिक देशों के 2,500 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह फोरम 2013 में स्थापित हुआ था और आर्कटिक क्षेत्र के पर्यावरण, भू-राजनीति एवं आर्थिक मुद्दों पर चर्चा का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है।
फू यिंग ने आर्कटिक फोरम में क्या कहा?
चीन की पूर्व उप विदेश मंत्री फू यिंग ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आर्कटिक क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती है और सभी देशों को वैज्ञानिक अनुसंधान व पर्यावरण संरक्षण पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने भू-राजनीतिक और काल्पनिक सुरक्षा खतरों पर केंद्रित चर्चाओं को 'बहुमूल्य समय और संसाधनों की बर्बादी' बताया।
आर्कटिक मामलों में चीन की भूमिका क्या है?
चीन स्वयं को 'निकट-आर्कटिक राज्य' कहता है और वैज्ञानिक अनुसंधान एवं हरित ऊर्जा सहयोग के माध्यम से आर्कटिक में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है। फू यिंग के अनुसार, चीन-आइसलैंड संयुक्त बयान में जलवायु परिवर्तन और हरित ऊर्जा सहयोग पर जोर दिया गया था। हालांकि, पश्चिमी विश्लेषक इसे चीन की 'पोलर सिल्क रोड' रणनीति के तहत रणनीतिक विस्तार मानते हैं।
फोरम में चीन की भागीदारी क्यों महत्वपूर्ण है?
चीन आर्कटिक का तटीय देश नहीं है, फिर भी वह इस फोरम में सक्रिय रूप से भाग लेता है, जो उसकी आर्कटिक नीति और वैश्विक प्रभाव विस्तार की रणनीति को दर्शाता है। फू यिंग की उपस्थिति और 'शांतिपूर्ण विकास' पर उनके बयान इस बात के संकेत हैं कि चीन आर्कटिक देशों के साथ अपने संबंध मज़बूत करना चाहता है।
आर्कटिक सर्कल फोरम की स्थापना कब और किसने की?
आर्कटिक सर्कल फोरम की स्थापना 2013 में आइसलैंड के तत्कालीन राष्ट्रपति ओलाफुर रगनार ग्रिमसन ने की थी। यह फोरम हर वर्ष अक्टूबर में रेक्याविक में आयोजित होता है और आर्कटिक क्षेत्र के मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 दिन पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले