2026 आर्कटिक सर्कल फोरम: रेक्याविक में 70+ देशों की बैठक, चीनी पूर्व उप विदेश मंत्री फू यिंग ने जलवायु पर दिया ज़ोर
सारांश
मुख्य बातें
2026 आर्कटिक सर्कल फोरम का आयोजन 8 से 10 अक्टूबर 2026 तक आइसलैंड की राजधानी रेक्याविक में सम्पन्न हुआ, जिसमें 70 से अधिक देशों और क्षेत्रों के 2,500 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चीन की पूर्व उप विदेश मंत्री फू यिंग ने चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और जलवायु परिवर्तन को आर्कटिक क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती बताया।
मुख्य घटनाक्रम
फोरम के अध्यक्ष एवं आइसलैंड के पूर्व राष्ट्रपति ओलाफुर रगनार ग्रिमसन ने 'चीन को कैसे समझें' विषयक पूर्ण सत्र में फू यिंग के साथ सीधा संवाद किया। यह सत्र फोरम के सबसे चर्चित सत्रों में रहा, जिसमें वैश्विक आर्कटिक नीति एवं चीन की भूमिका पर खुली चर्चा हुई।
जलवायु परिवर्तन पर चीन का रुख
फू यिंग ने अपने संबोधन में कहा कि आर्कटिक की समुद्री बर्फ पिघल रही है, बर्फ की चादर का दायरा सिकुड़ रहा है और तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि सभी देशों को वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण पर कहीं अधिक ध्यान एवं संसाधन लगाने की ज़रूरत है। उनके अनुसार, कई मौजूदा चर्चाएं 'काल्पनिक सुरक्षा खतरों और भू-राजनीतिक मुद्दों' पर केंद्रित हैं, जिससे बहुमूल्य समय और संसाधन व्यर्थ हो रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब आर्कटिक पर नियंत्रण एवं प्रभाव को लेकर पश्चिमी देशों और रूस-चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा है। चीन स्वयं को 'निकट-आर्कटिक राज्य' कहता है और क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को वैज्ञानिक एवं आर्थिक सहयोग के रूप में पेश करता है।
चीन-आइसलैंड सहयोग
फू यिंग ने बताया कि पिछले वर्ष चीन और आइसलैंड के नेताओं द्वारा जारी संयुक्त बयान में जलवायु परिवर्तन से निपटने और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग पर विशेष बल दिया गया था। उनके अनुसार, इस प्रकार का व्यावहारिक सहयोग आर्कटिक मामलों में चीन की भागीदारी के उद्देश्यों और नीतियों को स्पष्ट रूप से परिलक्षित करता है।
चीन की वैश्विक भूमिका पर बयान
चीन के विकास और अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर चर्चा के दौरान फू यिंग ने कहा कि चीन शांतिपूर्ण विकास के मार्ग पर अग्रसर है और वह विश्व पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि चीन सभी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और अधिक न्यायसंगत वैश्विक शासन व्यवस्था के निर्माण के लिए तत्पर है। आलोचकों का कहना है कि आर्कटिक में चीन की बढ़ती गतिविधियाँ उसके 'शांतिपूर्ण विकास' के दावों से मेल नहीं खाती हैं, और पश्चिमी विश्लेषक इसे रणनीतिक विस्तार मानते हैं।
फोरम की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि आर्कटिक सर्कल फोरम की स्थापना 2013 में आइसलैंड के तत्कालीन राष्ट्रपति ओलाफुर रगनार ग्रिमसन ने की थी। यह फोरम प्रत्येक वर्ष अक्टूबर में रेक्याविक में आयोजित होता है और आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े पर्यावरण, भू-राजनीति एवं आर्थिक मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच माना जाता है। आगामी वर्षों में आर्कटिक नीति पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाना इस फोरम की केंद्रीय चुनौती बनी रहेगी।