आर्कटिक सर्कल असेंबली 2026: रेकजाविक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह
सारांश
मुख्य बातें
विदेश राज्यमंत्री एवं पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह 8 से 10 अक्टूबर 2026 तक आइसलैंड के रेकजाविक में आयोजित आर्कटिक सर्कल असेंबली (ACA) की वार्षिक बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को इस यात्रा की आधिकारिक घोषणा की। यह भागीदारी भारत की आर्कटिक कूटनीति और जलवायु नीति के प्रति गंभीर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
असेंबली में भारत की भूमिका
विदेश मंत्रालय के अनुसार, राज्यमंत्री सिंह 'मेल्टिंग पोल्स: पर्सपेक्टिव्स फ्रॉम इंडिया एंड सिंगापुर' नामक प्लेनरी सत्र में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त वे भारत द्वारा आयोजित 'आर्कटिक एंड क्लाइमेट चेंज पर्सपेक्टिव्स फ्रॉम ऑब्जर्वर स्टेट्स' सत्र का उद्घाटन भाषण भी देंगे। इन सत्रों के माध्यम से भारत आर्कटिक के भावी प्रशासन और जलवायु परिवर्तन पर अपनी स्थिति वैश्विक मंच पर स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करेगा।
भारत की आर्कटिक नीति 2022 के छह स्तंभ
विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा के संदर्भ में भारत की आर्कटिक नीति 2022 का उल्लेख किया, जो छह स्तंभों — विज्ञान, जलवायु एवं पर्यावरण, आर्थिक विकास, कनेक्टिविटी, गवर्नेंस और क्षमता निर्माण — पर टिकी है। मंत्रालय के अनुसार, आर्कटिक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्रों के बीच बढ़ते परस्पर संबंधों को देखते हुए भारत पोलर रिसर्च, जलवायु एवं पर्यावरण के क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा रहा है।
गौरतलब है कि भारत आर्कटिक काउंसिल का पर्यवेक्षक राज्य है और उसका अनुसंधान केंद्र हिमाद्री नॉर्वे के स्पिट्सबर्गेन में स्थित है, जो ध्रुवीय अनुसंधान में उसकी सक्रिय उपस्थिति को दर्शाता है।
आइसलैंड के साथ द्विपक्षीय बातचीत
रेकजाविक प्रवास के दौरान राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह आइसलैंड के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और आइसलैंड के संबंध हाल के वर्षों में उल्लेखनीय रूप से प्रगाढ़ हुए हैं। इसमें ऐतिहासिक भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA), नियमित उच्च-स्तरीय राजनयिक संवाद तथा जियोथर्मल ऊर्जा, मत्स्य पालन और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग की अहम भूमिका रही है।
आर्कटिक सर्कल असेंबली: वैश्विक महत्व
आयोजकों के अनुसार, आर्कटिक सर्कल असेंबली आर्कटिक विषयों पर आयोजित होने वाली दुनिया की सबसे बड़ी वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सभा है, जिसमें 70 से अधिक देशों के 2,500 तक प्रतिनिधि भाग लेते हैं। यह सभा प्रत्येक वर्ष अक्टूबर में रेकजाविक के हार्पा कॉन्सर्ट हॉल और कॉन्फ्रेंस सेंटर में आयोजित होती है। रेकजाविक स्थित आर्कटिक सर्कल सचिवालय इस असेंबली के संचालन और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंचों की देखरेख के लिए जिम्मेदार है।
आगे की दिशा
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब जलवायु परिवर्तन और ध्रुवीय क्षेत्रों के तीव्र पिघलाव ने आर्कटिक शासन को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में ला दिया है। भारत की इस सक्रिय भागीदारी से उम्मीद है कि ध्रुवीय अनुसंधान और हरित कूटनीति में देश की साख और मजबूत होगी।