भारत में मोबाइल नेटवर्क ट्रैफिक 2025 2030 के बीच सालाना 17% बढ़ेगा: KPMG रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत में मोबाइल नेटवर्क ट्रैफिक वर्ष 2025 से 2030 के बीच सालाना लगभग 17 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि दूरसंचार ऑपरेटरों का राजस्व इसी अवधि में सालाना 2.7 प्रतिशत की गति से आगे बढ़ेगा। यह जानकारी केपीएमजी इंडिया (KPMG India) की उस रिपोर्ट में सामने आई है जो 9 अक्टूबर 2026 को जारी की गई।
दूरसंचार उपकरण बाज़ार का आकार दोगुना होने की राह पर
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दूरसंचार उपकरणों का बाज़ार वित्त वर्ष 2025 के 25 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2032 तक लगभग 50 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है। गौरतलब है कि यह वृद्धि दर वैश्विक बाज़ार की तुलना में करीब दोगुनी है, जो भारत की तेज़ी से बढ़ती डिजिटल माँग को रेखांकित करती है।
घरेलू विनिर्माण में ऐतिहासिक उछाल
विनिर्माण मोर्चे पर भारत ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में मोबाइल हैंडसेट का उत्पादन ₹6,270 अरब रुपए के स्तर तक पहुँच गया। इसके साथ ही दूरसंचार उपकरणों की आपूर्ति में घरेलू उत्पादन की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 60 प्रतिशत हो गई है, जो आयात पर निर्भरता में कमी और 'मेक इन इंडिया' की दिशा में ठोस क़दम का संकेत देती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
केपीएमजी इंडिया में पार्टनर एवं टेक्नोलॉजी, मीडिया एंड टेलीकम्युनिकेशंस (TMT) के राष्ट्रीय प्रमुख अखिलेश टुटेजा ने कहा, "दूरसंचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, क्लाउड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का एकीकरण वैश्विक प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम में मूल्य सृजन के तरीके को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।" उन्होंने आगे जोड़ा कि जैसे जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था की नींव कनेक्टिविटी से आगे बढ़कर 'इंटेलिजेंस' की ओर विकसित हो रही है, भारत के पास वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक तकनीकों, प्लेटफ़ॉर्म और बौद्धिक संपदा (IP) का निर्माता बनने का अनूठा अवसर है। टुटेजा ने यह भी रेखांकित किया कि इस क्षमता को साकार करने हेतु नवाचार, उन्नत विनिर्माण और विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग में निरंतर निवेश की आवश्यकता होगी।
दूरसंचार क्षेत्र: कनेक्टिविटी से 'इंटेलिजेंट इकोसिस्टम' की ओर
रिपोर्ट इस बात पर ज़ोर देती है कि दूरसंचार उद्योग अब केवल कनेक्टिविटी प्रदान करने वाला माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह एक बुद्धिमान डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम के रूप में रूपांतरित हो रहा है। AI, दूरसंचार नेटवर्क, सेमीकंडक्टर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और सहायक नीतिगत पहलों का संयुक्त प्रभाव नवाचार और मूल्य सृजन के नए द्वार खोल रहा है।
आगे का रास्ता: उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में भागीदारी ज़रूरी
रिपोर्ट स्वीकार करती है कि भारत ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और विनिर्माण में बड़े पैमाने पर क्षमता विकसित करने की अपनी योग्यता पहले ही सिद्ध की है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि विकास के अगले चरण में सेमीकंडक्टर, सॉफ़्टवेयर, रेडियो सिस्टम, ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में भारत की सक्रिय भागीदारी बेहद ज़रूरी होगी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखलाओं में पुनर्गठन तेज़ हो रहा है और भारत के पास इस बदलाव का लाभ उठाने का अनुकूल समय है।