भारत का दोपहिया क्षेत्र: वित्त वर्ष 27 में 5% वॉल्यूम ग्रोथ का अनुमान, ई2डब्ल्यू बिक्री 68% उछली
सारांश
मुख्य बातें
भारत के दोपहिया वाहन क्षेत्र की वॉल्यूम ग्रोथ वित्त वर्ष 2027 में सालाना आधार पर 5 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए (ICRA) की 20 मई 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस वृद्धि के पीछे जीएसटी 2.0 का लागू होना और रिप्लेसमेंट मांग में तेज़ी प्रमुख कारण हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अप्रैल 2026 में थोक वॉल्यूम ने 29.2 प्रतिशत की असाधारण छलांग लगाई।
अप्रैल 2026 का प्रदर्शन
आईसीआरए की रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू दोपहिया वाहनों की थोक वॉल्यूम अप्रैल 2026 में सालाना आधार पर 29.2 प्रतिशत बढ़कर 1.9 मिलियन यूनिट पर पहुँच गई। इस उछाल की मुख्य वजह जीएसटी 2.0 का लागू होना रहा। खुदरा मांग भी इस दौरान मज़बूत रही और सालाना आधार पर 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसे अपेक्षा से कम मूल्य वृद्धि, मज़बूत कृषि उत्पादन से ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह की स्थिरता और मई मध्य तक चले विवाह सीज़न का सहारा मिला।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट की रफ्तार
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (ई2डब्ल्यू) सेगमेंट ने अप्रैल 2026 में 1,54,337 यूनिट की खुदरा बिक्री दर्ज की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 68.1 प्रतिशत की मज़बूत वृद्धि है। वित्त वर्ष 2026 में ई2डब्ल्यू की बिक्री में लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई और समग्र दोपहिया बाज़ार में इसकी हिस्सेदारी 8.1 प्रतिशत तक पहुँच गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिर वृद्धि बढ़ती उपभोक्ता स्वीकृति को दर्शाती है, जिसे उत्पादों की बढ़ती उपलब्धता और बेहतर लागत प्रतिस्पर्धा का समर्थन मिल रहा है।
निर्यात में उल्लेखनीय उछाल
निर्यात मोर्चे पर भी उद्योग को अच्छी खबर मिली। कुछ विदेशी बाज़ारों में चुनौतियों के बावजूद अप्रैल 2026 में मासिक निर्यात मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में 38.3 प्रतिशत बढ़ी। वित्त वर्ष 2026 के लिए समग्र दोपहिया निर्यात में 23.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जिसे उत्पाद पोर्टफोलियो के विस्तार और भारतीय दोपहिया ब्रांडों की बढ़ती वैश्विक पहचान का बल मिला।
आगे की राह में जोखिम
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि उच्च आधार प्रभाव, अल नीनो के कारण मानसून के कमज़ोर पूर्वानुमान, ईंधन की कीमतों में वृद्धि और इनपुट लागत में बढ़ोतरी के चलते आने वाले महीनों में ग्रोथ धीमी पड़ सकती है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव आपूर्ति श्रृंखलाओं और निर्यात प्रदर्शन के लिए जोखिम बने हुए हैं। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 27 की दीर्घकालिक वृद्धि की दिशा इन्हीं कारकों के संतुलन पर निर्भर करेगी।