भारत ने संकटग्रस्त अफ्रीकी देशों को खाद्य सहायता भेजी
सारांश
Key Takeaways
- भारत ने अफ्रीकी देशों को खाद्य सहायता प्रदान की है।
- यह सहायता मानवता की जिम्मेदारी को दर्शाती है।
- संकट के समय में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
- भारत की यह पहल वैश्विक दक्षिण के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
- भविष्य में साझेदारी और सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने वैश्विक दक्षिण के विकास और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का पालन करते हुए अफ्रीकी देशों जैसे मोजाम्बिक, मलावी और बुर्किना फासो को खाद्य सहायता प्रदान की है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने सूखा प्रभावित मलावी को 1,000 मीट्रिक टन चावल, बुर्किना फासो को 1,000 मीट्रिक टन चावल और बाढ़ से प्रभावित मोजाम्बिक को 500 मीट्रिक टन चावल के साथ अन्य राहत सामग्री भेजी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत ने बुर्किना फासो को मानवीय सहायता के तहत 1,000 मीट्रिक टन चावल भेजा है। इसका मुख्य उद्देश्य कमजोर समुदायों और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह पहल भारत की वैश्विक दक्षिण के देशों के प्रति विकास और मानवीय सहायता में निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।"
यह मानवीय पहल उस समय आई है जब कई अफ्रीकी देश गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।
बुर्किना फासो इस क्षेत्र के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक से ग्रस्त है, जहाँ लाखों लोगों को सहायता की आवश्यकता है। इसके अलावा, 2022 के तख्तापलट के बाद से इस्लामिक उग्रवादी समूहों से जुड़ी हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता भी जारी है।
एक लेख के अनुसार, मलावी अल नीनो से जुड़े सूखे के कारण खाद्य संकट का सामना कर रहा है, जबकि मोजाम्बिक में विनाशकारी बाढ़ आई है।
इस बीच, भारत अब केवल राहत सामग्री भेजने तक सीमित नहीं रह रहा है। 31 मार्च को सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के एक कार्य पत्र में कहा गया है कि अफ्रीका के पास वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण और ट्रांजिशन मिनरल्स का 30 प्रतिशत से अधिक भंडार है। इसमें सुझाव दिया गया है कि भारत को केवल मिनरल्स निकालने या रियायती वित्तपोषण से आगे बढ़कर, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, वर्कफोर्स ट्रेनिंग और साझा मूल्य निर्माण पर आधारित साझेदारियों की ओर बढ़ना चाहिए।
इस लेख में जाम्बिया, जिम्बाब्वे और तंजानिया पर भविष्य के सहयोग के लिए मुख्य उदाहरणों के तौर पर फोकस किया गया है।
लेख में कहा गया है, "मानवीय सहायता और संसाधन कूटनीति का संयोजन दर्शाता है कि भारत अफ्रीका में अपनी बड़ी भूमिका चाहता है, खासकर ऐसे समय में जब चीन और अमेरिका पहले से ही प्रभाव, बुनियादी ढांचे और आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। यह रणनीति मानवीय भी है और व्यावहारिक भी।"