30 जून 2026
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इंडियनऑयल-डीएमआरसी हाइड्रोजन बस सेवा शुरू, केंद्रीय सचिवालय से कर्तव्य भवन के बीच चलेंगी 2 बसें

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इंडियनऑयल-डीएमआरसी हाइड्रोजन बस सेवा शुरू, केंद्रीय सचिवालय से कर्तव्य भवन के बीच चलेंगी 2 बसें

सारांश

इंडियनऑयल और DMRC ने नई दिल्ली में हाइड्रोजन फ्यूल सेल बस सेवा शुरू की — यह केवल पानी उत्सर्जित करती हैं। अभी दो बसें प्रायोगिक तौर पर चल रही हैं, लेकिन पानीपत में 10 KTA ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट तैयार होने के बाद इस बेड़े का विस्तार होगा।

मुख्य बातें

IOCL और DMRC ने 15 मई 2026 को नई दिल्ली में 2 हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसें लॉन्च कीं।
बसें केंद्रीय सचिवालय से कर्तव्य भवन के बीच चलेंगी और केवल पानी उत्सर्जित करती हैं।
बसों के लिए हाइड्रोजन फरीदाबाद स्थित IOCL के अनुसंधान एवं विकास केंद्र में तैयार होता है।
IOCL के पास देशभर में परीक्षण परियोजनाओं के तहत कुल 15 हाइड्रोजन बसें हैं।
पानीपत रिफाइनरी में 10 KTA क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट निर्माणाधीन है।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने मिलकर 15 मई 2026 को भारत की राजधानी नई दिल्ली में हाइड्रोजन फ्यूल सेल बस सेवा का शुभारंभ किया, जो केंद्रीय सचिवालय और कर्तव्य भवन के बीच संचालित होगी। इस पहल को भारत में स्वच्छ और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

IOCL के निदेशक (रिफाइनरी) अरविंद कुमार ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल दो हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसें DMRC को सौंपी गई हैं। ये बसें केंद्रीय सचिवालय और कर्तव्य भवन के बीच यात्रियों को सेवा देंगी। कुमार ने कहा, 'हाइड्रोजन से चलने वाली बसें हरित और स्वच्छ परिवहन के लिए एक शानदार पहल हैं।'

उन्होंने बताया कि इन बसों में उपयोग होने वाला हाइड्रोजन फरीदाबाद स्थित IOCL के अनुसंधान एवं विकास केंद्र में तैयार किया जा रहा है। यह पहल अभी प्रायोगिक चरण में है, लेकिन आगे इसका विस्तार किए जाने की योजना है।

तकनीक की विशेषता

इन बसों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये संचालन के दौरान केवल पानी उत्सर्जित करती हैं, जिससे ये पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त हैं। अरविंद कुमार के अनुसार, 'फ्यूल सेल में हाइड्रोजन का उपयोग किया जाता है और इससे निकलने वाला वेस्ट केवल पानी होता है। इस कारण यह पर्यावरण के अनुकूल और प्रदूषण-मुक्त व्यवस्था है।'

गौरतलब है कि पारंपरिक डीज़ल या सीएनजी बसों की तुलना में हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक कार्बन उत्सर्जन को शून्य तक ले आती है, जो भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्यों के अनुरूप है।

विस्तार की योजना

IOCL के पास वर्तमान में देशभर में विभिन्न परीक्षण परियोजनाओं के तहत 15 हाइड्रोजन बसें संचालित हैं। इसके अलावा, पानीपत रिफाइनरी में 10 KTA क्षमता का एक ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट विकसित किया जा रहा है। कुमार ने बताया, 'इसका निर्माण कार्य चल रहा है और इसे चालू होने में कुछ समय लगेगा, लेकिन उसके बाद जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी और आर्थिक पहलू परिपक्व होंगे, हम इसे परिवहन क्षेत्र में और आगे ले जाएंगे।'

सरकार की नीति से जुड़ाव

अरविंद कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छ और ऊर्जा-दक्ष प्रौद्योगिकियों को अपनाने की अपील का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन जैसी उन्नत कम-कार्बन तकनीकों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जाना चाहिए। यह पहल राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के व्यापक ढाँचे के अनुरूप है, जिसके तहत भारत 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखता है।

आगे की राह

IOCL का कहना है कि वह अपने हरित हाइड्रोजन मोबिलिटी इकोसिस्टम का लगातार विस्तार कर रहा है। कुमार ने संकेत दिया कि पानीपत प्लांट के चालू होने के बाद हाइड्रोजन बसों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। यह पहल भारत के शहरी परिवहन को जीवाश्म ईंधन से मुक्त करने की दिशा में एक ठोस शुरुआत मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका असली मूल्यांकन तब होगा जब पानीपत का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट चालू होगा और उत्पादन लागत व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनेगी। फिलहाल हाइड्रोजन उत्पादन की ऊँची लागत इस तकनीक के बड़े पैमाने पर विस्तार में सबसे बड़ी बाधा है। भारत का राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन महत्वाकांक्षी है, पर परिवहन क्षेत्र में हाइड्रोजन को सीएनजी या इलेक्ट्रिक विकल्पों से प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए तकनीकी और नीतिगत दोनों मोर्चों पर ठोस प्रगति अभी बाकी है।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडियनऑयल और DMRC की हाइड्रोजन बस सेवा किस रूट पर चलेगी?
ये दो हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसें नई दिल्ली में केंद्रीय सचिवालय और कर्तव्य भवन के बीच चलेंगी। यह सेवा अभी प्रायोगिक चरण में है।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल बस कैसे काम करती है और यह प्रदूषण-मुक्त कैसे है?
इन बसों में फ्यूल सेल के ज़रिए हाइड्रोजन से बिजली उत्पन्न होती है और एकमात्र उप-उत्पाद पानी होता है, जिससे कोई कार्बन या हानिकारक गैस उत्सर्जित नहीं होती। इसीलिए इन्हें पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त माना जाता है।
इन बसों के लिए हाइड्रोजन कहाँ से आता है?
IOCL के निदेशक अरविंद कुमार के अनुसार, इन बसों में उपयोग होने वाला हाइड्रोजन फरीदाबाद स्थित IOCL के अनुसंधान एवं विकास केंद्र में तैयार किया जा रहा है।
IOCL का हाइड्रोजन बस बेड़ा आगे कितना बड़ा होगा?
वर्तमान में IOCL के पास देशभर में विभिन्न परीक्षण परियोजनाओं के तहत 15 हाइड्रोजन बसें हैं। पानीपत रिफाइनरी में 10 KTA क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट निर्माणाधीन है, जिसके चालू होने के बाद बेड़े के विस्तार की उम्मीद है।
यह पहल भारत के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से कैसे जुड़ी है?
यह परियोजना राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है, जिसके तहत भारत 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखता है। IOCL-DMRC की यह बस सेवा परिवहन क्षेत्र में हाइड्रोजन के व्यावहारिक उपयोग का प्रारंभिक प्रमाण है।
राष्ट्र प्रेस
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