कामेश्वर पांडे हत्याकांड: गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव और लखन साव को उम्रकैद, ₹10-10 हजार जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
रामगढ़ की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने 16 मई 2025 को झारखंड के चर्चित कामेश्वर पांडे हत्याकांड में गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव और उसके सहयोगी लखन साव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों दोषियों पर ₹10-10 हजार का जुर्माना भी लगाया। इससे पहले 7 मई को न्यायालय ने दोनों को हत्या और आपराधिक साजिश रचने का दोषी करार दिया था।
सज़ा का विवरण
सजा के बिंदु पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने हत्या के मामले में दोनों दोषियों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा दी। धारा 120(बी) के तहत आपराधिक साजिश रचने के आरोप में भी दोनों को आजीवन कारावास और ₹10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसके अतिरिक्त आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत सात वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10 हजार जुर्माने की सजा भी दी गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माना न चुकाने पर दोषियों को एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
मुख्य घटनाक्रम
यह मामला पतरातू निवासी 70 वर्षीय कामेश्वर पांडे की हत्या से जुड़ा है। 26 अक्टूबर 2015 को वह स्थानीय सब्जी बाजार में खरीदारी करने गए थे, तभी श्रीवास्तव गिरोह के शूटरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मामले में पवन किशोर पांडे ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
अदालत में सामने आए तथ्य
सुनवाई के दौरान यह तथ्य उभरकर आया कि अमन श्रीवास्तव ने इलाके में दहशत और अपना वर्चस्व कायम करने के उद्देश्य से इस हत्या की साजिश रची थी। जाँच में यह भी स्पष्ट हुआ कि कामेश्वर पांडे का किसी भी आपराधिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं था — वह एक निर्दोष नागरिक थे। पुलिस ने मामले में गणेश सिंह उर्फ जयप्रकाश सिंह, लखन साव और अमन श्रीवास्तव को नामजद आरोपी बनाया था।
गणेश सिंह को बरी किया गया
हालाँकि अभियोजन पक्ष गणेश सिंह के विरुद्ध अदालत में पर्याप्त साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके कारण उसे बरी कर दिया गया। फैसला सुनाए जाने के दौरान न्यायालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
पक्षकार और आगे की राह
सरकार की ओर से एपीपी श्रद्धा जया टोपनो ने पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता बीएन त्रिपाठी और रामगढ़ के अधिवक्ता महेंद्र महतो ने बहस की। दोनों दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। यह फैसला झारखंड में संगठित अपराध के विरुद्ध न्यायिक प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।