कामेश्वर पांडे हत्याकांड: गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव और लखन साव को उम्रकैद, ₹10-10 हजार जुर्माना

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कामेश्वर पांडे हत्याकांड: गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव और लखन साव को उम्रकैद, ₹10-10 हजार जुर्माना

सारांश

दस साल पुराने पतरातू हत्याकांड में न्याय मिला — रामगढ़ की अदालत ने गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव और लखन साव को उम्रकैद सुनाई। 70 वर्षीय निर्दोष कामेश्वर पांडे की सब्जी बाजार में गोली मारकर हत्या की गई थी, ताकि गिरोह का इलाके में दबदबा कायम हो सके।

मुख्य बातें

रामगढ़ अदालत ने 16 मई 2025 को गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव और लखन साव को कामेश्वर पांडे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
दोनों दोषियों पर हत्या, आपराधिक साजिश ( धारा 120बी ) और आर्म्स एक्ट धारा 27 के तहत अलग-अलग सजाएँ सुनाई गईं।
प्रत्येक दोषी पर ₹10-10 हजार जुर्माना; न चुकाने पर एक वर्ष अतिरिक्त कारावास।
पीड़ित कामेश्वर पांडे ( 70 वर्ष ) की हत्या 26 अक्टूबर 2015 को पतरातू के सब्जी बाजार में की गई थी।
तीसरे आरोपी गणेश सिंह उर्फ जयप्रकाश सिंह को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
अदालत ने माना कि हत्या का उद्देश्य इलाके में गिरोह का वर्चस्व स्थापित करना था।

रामगढ़ की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने 16 मई 2025 को झारखंड के चर्चित कामेश्वर पांडे हत्याकांड में गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव और उसके सहयोगी लखन साव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों दोषियों पर ₹10-10 हजार का जुर्माना भी लगाया। इससे पहले 7 मई को न्यायालय ने दोनों को हत्या और आपराधिक साजिश रचने का दोषी करार दिया था।

सज़ा का विवरण

सजा के बिंदु पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने हत्या के मामले में दोनों दोषियों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा दी। धारा 120(बी) के तहत आपराधिक साजिश रचने के आरोप में भी दोनों को आजीवन कारावास और ₹10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसके अतिरिक्त आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत सात वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10 हजार जुर्माने की सजा भी दी गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माना न चुकाने पर दोषियों को एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

मुख्य घटनाक्रम

यह मामला पतरातू निवासी 70 वर्षीय कामेश्वर पांडे की हत्या से जुड़ा है। 26 अक्टूबर 2015 को वह स्थानीय सब्जी बाजार में खरीदारी करने गए थे, तभी श्रीवास्तव गिरोह के शूटरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मामले में पवन किशोर पांडे ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

अदालत में सामने आए तथ्य

सुनवाई के दौरान यह तथ्य उभरकर आया कि अमन श्रीवास्तव ने इलाके में दहशत और अपना वर्चस्व कायम करने के उद्देश्य से इस हत्या की साजिश रची थी। जाँच में यह भी स्पष्ट हुआ कि कामेश्वर पांडे का किसी भी आपराधिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं था — वह एक निर्दोष नागरिक थे। पुलिस ने मामले में गणेश सिंह उर्फ जयप्रकाश सिंह, लखन साव और अमन श्रीवास्तव को नामजद आरोपी बनाया था।

गणेश सिंह को बरी किया गया

हालाँकि अभियोजन पक्ष गणेश सिंह के विरुद्ध अदालत में पर्याप्त साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके कारण उसे बरी कर दिया गया। फैसला सुनाए जाने के दौरान न्यायालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

पक्षकार और आगे की राह

सरकार की ओर से एपीपी श्रद्धा जया टोपनो ने पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता बीएन त्रिपाठी और रामगढ़ के अधिवक्ता महेंद्र महतो ने बहस की। दोनों दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। यह फैसला झारखंड में संगठित अपराध के विरुद्ध न्यायिक प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या केवल एक अलग-थलग न्यायिक जीत बनकर रह जाती है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कामेश्वर पांडे हत्याकांड क्या है?
यह झारखंड के पतरातू में 26 अक्टूबर 2015 को हुई एक हत्या का मामला है, जिसमें 70 वर्षीय कामेश्वर पांडे को सब्जी बाजार में खरीदारी के दौरान श्रीवास्तव गिरोह के शूटरों ने गोली मारकर मौके पर ही मार डाला था। जाँच में सामने आया कि पीड़ित का किसी आपराधिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं था।
अमन श्रीवास्तव और लखन साव को क्या सजा मिली?
रामगढ़ की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने दोनों को हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप में आजीवन कारावास और ₹10-10 हजार जुर्माना सुनाया। आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत अतिरिक्त सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भी दी गई।
हत्या की साजिश क्यों रची गई थी?
अदालत में सामने आए तथ्यों के अनुसार, गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव ने इलाके में दहशत फैलाकर अपना वर्चस्व कायम करने के उद्देश्य से यह हत्या करवाई थी। कामेश्वर पांडे का किसी भी आपराधिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं था।
गणेश सिंह को क्यों बरी किया गया?
अभियोजन पक्ष गणेश सिंह उर्फ जयप्रकाश सिंह के विरुद्ध अदालत में पर्याप्त साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत करने में असफल रहा, जिसके कारण न्यायालय ने उसे बरी कर दिया।
दोषियों के पास अब क्या विकल्प है?
दोनों दोषी — अमन श्रीवास्तव और लखन साव — झारखंड उच्च न्यायालय में इस फैसले के विरुद्ध अपील कर सकते हैं। फिलहाल उन्हें निचली अदालत के आदेश के अनुसार सजा भुगतनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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