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अशोक सज्जनहार: अमेरिका-ईरान वार्ता से बड़े नतीजों की अपेक्षा करना जल्दबाजी होगी

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अशोक सज्जनहार: अमेरिका-ईरान वार्ता से बड़े नतीजों की अपेक्षा करना जल्दबाजी होगी

सारांश

अशोक सज्जनहार ने अमेरिका-ईरान वार्ता पर चर्चा करते हुए कहा कि पहली बैठक से बड़े नतीजों की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। जानें, इस वार्ता का क्या महत्व है और क्या हो सकते हैं संभावित परिणाम।

मुख्य बातें

ईरान का वार्ता में शामिल होने से इनकार सीजफायर की आवश्यकता जयशंकर की यात्रा का रणनीतिक महत्व लेबनान में तनाव का क्षेत्रीय प्रभाव भारत-अमेरिका रिश्तों की मजबूती

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ समझौता वार्ता में भाग लेने से ईरान के इंकार ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव के बावजूद दोनों पक्ष सीजफायर की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। विदेशी मामलों के विशेषज्ञ अशोक सज्जनहार ने इसी संदर्भ में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की।

ईरान ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के संदर्भ में इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता में शामिल होने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। ईरान ने इस्लामाबाद में अपने प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति की खबरों को पूरी तरह से गलत बताया।

अशोक सज्जनहार ने कहा कि इस्लामाबाद में वार्ता कुछ रुकावटों के कारण थोड़ी देर से हो सकती है, लेकिन मेरा मानना है कि अमेरिका की तरह, ईरान भी जल्द से जल्द सीजफायर की उम्मीद कर रहा है। मुझे लगता है कि शनिवार की सुबह होने वाली बैठक अवश्य होगी। इसके बाद हमें माहौल को समझना होगा। शुरुआती बैठक से बड़े नतीजों की उम्मीद करना उचित नहीं होगा। फिलहाल, बैठक का होना ही सबसे महत्वपूर्ण है।

सज्जनहार ने कहा कि वर्तमान में ध्यान केंद्रित करने वाली बातों में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और वहां रुकावटों को समाप्त करना शामिल है। साथ ही, कोई भी हमला न हो, चाहे वह ईरान से इजरायल या खाड़ी देशों पर हो या इजरायल और अमेरिका की तरफ से ईरान पर। ये मुद्दे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, अन्य मुद्दों पर चर्चा बाद में हो सकती है।

सज्जनहार ने एस. जयशंकर की यात्रा के रणनीतिक महत्व को बताते हुए कहा कि जयशंकर की मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की यात्रा बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मॉरीशस में इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस हो रही है, जहां भारत एक प्रमुख सुरक्षा सहयोगी के रूप में अपनी मजबूत मौजूदगी दिखा रहा है। यूएई के मामले में, भारत के साथ उसके रिश्ते पिछले दस वर्षों में बहुत मजबूत हुए हैं। यूएई भारत को तेल सप्लाई करने वाला एक बड़ा देश है और वहां 30 लाख से ज्यादा भारतीय निवास करते हैं।

सज्जनहार ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कतर का दौरा किया। भारत की एलपीजी की बड़ी जरूरत खाड़ी देशों, विशेषकर कतर से पूरी होती है। इस तरह की यात्राओं का उद्देश्य रिश्तों को मजबूत करना और वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

लेबनान में तनाव के प्रभाव पर सज्जनहार ने कहा कि लेबनान को लेकर विभिन्न राय हैं। अमेरिका और इजरायल का कहना है कि इजरायल सीजफायर का हिस्सा नहीं है, जबकि ईरान और पाकिस्तान का कुछ और कहना है। असल में, लेबनान एक अलग देश है जहां हिज़्बुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष अक्टूबर 2023 से चल रहा है। इस संघर्ष को नए युद्ध से अलग रखना चाहिए। मेरी समझ से सीजफायर मुख्य रूप से इन मुद्दों पर केंद्रित है: इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर हमले, ईरान की ओर से इजरायल पर हमले, खाड़ी में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले।

विक्रम मिस्री की अमेरिका यात्रा के संदर्भ में सज्जनहार ने कहा कि विक्रम मिस्री की वॉशिंगटन डीसी यात्रा का उद्देश्य भारत-अमेरिका रिश्तों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करना था। अमेरिका भारत के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण साझेदार है, चाहे वह टेक्नोलॉजी हो, रक्षा हो या व्यापार। भारतीय समुदाय वहां काफी प्रभावशाली है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि दुनिया में चल रहे संघर्षों के बावजूद भारत-अमेरिका के रिश्ते और साझेदारी मजबूत बने रहें।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के प्रयास जारी हैं। बैठक का होना महत्वपूर्ण है, और इसके परिणामों पर ध्यान देना जरूरी है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने वार्ता में शामिल होने से क्यों इनकार किया?
ईरान ने अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ इस्लामाबाद में समझौता वार्ता में शामिल होने से स्पष्ट इनकार किया, इसे गलत बताया।
सीजफायर की आवश्यकता क्यों है?
सीजफायर की आवश्यकता इसलिए है ताकि युद्ध और संघर्ष को रोका जा सके और क्षेत्र में स्थिरता लाई जा सके।
जयशंकर की यात्रा का महत्व क्या है?
जयशंकर की यात्रा भारत की सुरक्षा सहयोगी भूमिका को मजबूत करने और संबंधों को प्रगाढ़ करने में महत्वपूर्ण है।
लेबनान में तनाव का क्या असर हो सकता है?
लेबनान में तनाव का असर क्षेत्रीय स्थिरता और अमेरिका-ईरान संबंधों पर पड़ सकता है।
भारत और अमेरिका के रिश्ते क्यों महत्वपूर्ण हैं?
भारत और अमेरिका के रिश्ते तकनीकी, रक्षा और व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदारी को दर्शाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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