लखनऊ में जगद्गुरु रामभद्राचार्य की 9 दिवसीय श्रीराम कथा आज से, CM योगी के आने की संभावना
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में 1 जून से 9 जून 2026 तक नौ दिवसीय भव्य श्रीराम कथा का आयोजन शुरू हो रहा है। इस कथा का वाचन पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य करेंगे, जो अपने प्रवचनों के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति के मूल्यों का संदेश देंगे। आयोजन समिति के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी इस कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है।
कार्यक्रम की विशेष तैयारियाँ
मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को देखते हुए कार्यक्रम स्थल पर विशेष तैयारियाँ की जा रही हैं। आयोजन समिति ने बताया कि योगी सरकार के कई मंत्री अलग-अलग दिनों में कथा में सम्मिलित होंगे। उल्लेखनीय है कि 23 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के राम मंदिर की प्रतिकृति पर आधारित कथा मंच का पोस्टर जारी किया था और कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएँ दी थीं।
नौ दिनों का कार्यक्रम विवरण
कथा के पहले दिन कलश यात्रा, गुरु वंदना और भरद्वाज-याज्ञवल्क्य संवाद का वर्णन होगा। दूसरे दिन माता सीता के प्राकट्य की कथा, तीसरे दिन भगवान शिव विवाह और चौथे दिन श्रीराम जन्मोत्सव का प्रसंग रहेगा।
पाँचवें दिन बाल लीला तथा राम के वनगमन, छठे दिन सीता-राम विवाह और सातवें दिन राम वनवास, केवट संवाद एवं राम-भरत मिलाप की कथा सुनाई जाएगी। आठवें दिन सीता हरण और शबरी चरित्र का प्रसंग होगा।
कथा का समापन 9 जून को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा, जिसमें लंका दहन, अयोध्या आगमन, भगवान राम का राज्याभिषेक और भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। समापन पर श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया जाएगा।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य: परिचय और योगदान
दृष्टिबाधित होने के बावजूद 250 से अधिक पुस्तकों की रचना कर चुके जगद्गुरु रामभद्राचार्य शिक्षा, साहित्य और अध्यात्म के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए देशभर में सम्मानित हैं। केंद्र सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से नवाज़ा है। वे अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मामले में महत्वपूर्ण गवाह भी रहे हैं।
आयोजन का सामाजिक संदेश
आयोजकों का कहना है कि यह श्रीराम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, पारिवारिक परंपराओं, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र जागरण को मज़बूत करने का माध्यम भी है। भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन से प्रेरणा लेकर यह कथा सेवा, सदाचार और कर्तव्य भावना को बढ़ावा देती है।
गौरतलब है कि इस तरह के बड़े धार्मिक आयोजन उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में नियमित रूप से आयोजित होते रहे हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सतत प्रयास का हिस्सा हैं।