जयपुर में रमाडा और मैरियट होटल टैक्स बकाया के कारण सील, तुरंत डी-सील
सारांश
Key Takeaways
- जयपुर नगर निगम ने रमाडा और मैरियट होटल को सील किया।
- बकाया यूडी टैक्स का भुगतान होने पर सील हटा दी गई।
- यूडी टैक्स शहरी विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
- होटल प्रबंधन ने 2007 से टैक्स का भुगतान नहीं किया था।
- टैक्स वर्गीकरण में विवाद का समाधान नहीं हुआ था।
जयपुर, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जयपुर नगर निगम (जेएमसी) ने सोमवार को दो प्रमुख होटल श्रृंखलाओं, रमाडा और मैरियट, से संबंधित संपत्तियों को लंबे समय से बकाया शहरी विकास (यूडी) टैक्स के कारण सील कर दिया। लेकिन, यह कार्रवाई अधिक समय तक नहीं रही, क्योंकि बकाया राशि का भुगतान होने के केवल दो घंटे के भीतर ही दोनों होटलों की सील हटा दी गई।
मालवीय नगर जोन की एक रेवेन्यू टीम ने जवाहर सर्किल के समीप स्थित होटल मैरियट के खिलाफ 5.97 करोड़ रुपए के बकाया यूडी टैक्स को लेकर कार्रवाई की। इस होटल में एक लग्जरी कार ब्रांड का शोरूम भी है।
अधिकारियों ने इस कार्रवाई के तहत लग्जरी कार शोरूम और होटल परिसर के बाहर स्थित एक रेस्टोरेंट को सील कर दिया। इसी प्रकार, राजा पार्क में स्थित होटल रमाडा के खिलाफ भी कार्रवाई की गई, जिस पर 1.36 करोड़ रुपए का बकाया था। इस अभियान के दौरान, होटल समूह से सम्बंधित कुछ संपत्तियों को सील कर दिया गया।
मालवीय नगर जोन के डिप्टी कमिश्नर मुकुट सिंह के अनुसार, कार्रवाई शुरू होने के कुछ समय बाद ही दोनों होटल समूह के प्रतिनिधि नगर निगम कार्यालय पहुंचे और चेक जमा कर अपना बकाया चुकता किया। भुगतान होने के बाद सील की गई सभी संपत्तियों को तुरंत डी-सील कर दिया गया।
रेवेन्यू ऑफिसर पवन मीणा ने कहा कि होटल मैरियट से जुड़े शोरूम और रेस्टोरेंट ने बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद 2007 से यूडी टैक्स का भुगतान नहीं किया था। सील करने की कार्रवाई के बाद ही बकाया चुकाया गया।
होटल रमाडा के मामले में अधिकारियों ने बताया कि टैक्स के वर्गीकरण को लेकर विवाद के कारण यहाँ भी 2007 से बकाया पेंडिंग था। होटल प्रबंधन का कहना था कि उन पर औद्योगिक श्रेणी के तहत टैक्स लगाया जाना चाहिए, जबकि निगम ने व्यावसायिक श्रेणी के तहत शुल्क लगाया।
शहरी विकास (यूडी) टैक्स एक वार्षिक शुल्क है, जो शहरी स्थानीय निकायों द्वारा अचल संपत्तियों पर लगाया जाता है। यह नगर निगमों के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और इसका उपयोग सड़कों की देखभाल, सीवरेज प्रणाली और शहरी बुनियादी ढांचे के विकास जैसी आवश्यक नागरिक सेवाओं के लिए किया जाता है।
यह टैक्स 300 वर्ग मीटर से बड़े आवासीय प्लॉटों पर लागू होता है, जबकि सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर उनकी श्रेणी के अनुसार निर्धारित दरों से टैक्स लगाया जाता है।