10 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जयशंकर का अदीस अबाबा में बड़ा संदेश: भारत-अफ्रीका संबंध ऐतिहासिक एकजुटता से आगे, चाहिए नए लक्ष्य

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जयशंकर का अदीस अबाबा में बड़ा संदेश: भारत-अफ्रीका संबंध ऐतिहासिक एकजुटता से आगे, चाहिए नए लक्ष्य

सारांश

अदीस अबाबा के अडवा विजय स्मारक से जयशंकर का संदेश सिर्फ इतिहास की याद नहीं थी — यह भारत-अफ्रीका संबंधों की पुनर्परिकल्पना थी। ऐतिहासिक एकजुटता पर्याप्त नहीं, अब भविष्य के बड़े लक्ष्य चाहिए — यह कूटनीतिक दिशाबदल का स्पष्ट संकेत है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 10 अक्टूबर 2026 को अदीस अबाबा के अडवा विजय स्मारक संग्रहालय से भारत-अफ्रीका साझेदारी पर संबोधन दिया।
उन्होंने कहा कि भारत-अफ्रीका संबंधों को केवल ऐतिहासिक एकजुटता की भाषा में समझाना अब पर्याप्त नहीं।
हिंद महासागर को दोनों महाद्वीपों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक बताया।
भारत और अफ्रीका की साझा औपनिवेशिक पीड़ा को मजबूत एकजुटता की नींव बताया।
भविष्य के लिए बड़े लक्ष्यों और नई सोच की ज़रूरत पर जोर दिया; कहा — एक निर्भरता से निकलकर दूसरी निर्भरता में नहीं फँसना चाहिए।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 10 अक्टूबर 2026 को इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा स्थित अडवा विजय स्मारक संग्रहालय से भारत-अफ्रीका साझेदारी को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों के रिश्तों को अब केवल ऐतिहासिक एकजुटता की भाषा में परिभाषित करना पर्याप्त नहीं रहा — भविष्य के लिए बड़े लक्ष्यों और नई सोच की आवश्यकता है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह संबोधन वैश्विक दक्षिण की साझा विरासत और साझा आकांक्षाओं को रेखांकित करने की दिशा में एक अहम कदम है।

हजारों साल पुरानी हैं जड़ें

जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और अफ्रीका के बीच का रिश्ता आधुनिक राष्ट्र-राज्यों के उदय के साथ शुरू नहीं हुआ। हिंद महासागर सदियों पहले से दोनों महाद्वीपों के लोगों को जोड़ता रहा है — व्यापार, विचारों का आदान-प्रदान, भाषाओं का मिलन और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रवाह इस रिश्ते के स्तंभ रहे हैं। उन्होंने कहा कि खान-पान, संगीत, धर्म और दर्शन तक समुद्री मार्गों से एक स्थान से दूसरे स्थान पहुँचे।

उन्होंने गुजरात के व्यापारियों का उल्लेख करते हुए बताया कि वे पूर्वी अफ्रीका के तटों पर एक परिचित उपस्थिति बन चुके थे। उन्होंने सिद्दी समुदाय का भी ज़िक्र किया, जो अफ्रीकी मूल के लोगों के भारतीय समाज में समाहित होने का जीवंत प्रमाण है।

औपनिवेशिक पीड़ा की साझा स्मृति

जयशंकर ने स्वीकार किया कि भारत और अफ्रीका दोनों ने औपनिवेशिक शासन की पीड़ा झेली। उन्होंने कहा कि बाहरी ताकतों ने दोनों की अर्थव्यवस्थाओं, सीमाओं और संसाधनों को अपने हितों के अनुसार ढाला, जबकि स्थानीय संस्थाओं और परंपराओं को कमजोर किया गया। विदेश मंत्री ने कहा, 'इसी साझा पीड़ा से एक मजबूत एकजुटता भी पैदा हुई।'

उन्होंने रेखांकित किया कि भारत ने अफ्रीका के स्वतंत्रता संघर्षों को सहानुभूति के साथ देखा, क्योंकि भारत खुद ऐसे ही अनुभवों से गुजरा था। इस प्रकार अफ्रीका, भारत की आजादी की कहानी का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

उपनिवेशवाद-विरोध से लेकर बहुध्रुवीय विश्व तक

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अफ्रीका ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर उपनिवेशवाद और रंगभेद का विरोध किया, देशों की समान संप्रभुता का समर्थन किया और मानव गरिमा के पक्ष में आवाज उठाई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आजाद हुए देशों को एक निर्भरता से निकलकर दूसरी निर्भरता में नहीं फँसना चाहिए — यह सोच आज भी भारत की विदेश नीति की आत्मा में बसी है।

गौरतलब है कि यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर बहुध्रुवीयता की चर्चा तेज हो रही है और ग्लोबल साउथ के देश अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अधिक प्रतिनिधित्व की माँग कर रहे हैं।

भविष्य के लिए बड़े लक्ष्यों की ज़रूरत

जयशंकर ने जोर देकर कहा कि अफ्रीका बदला है, भारत बदला है और दुनिया गहरे स्तर पर बदल चुकी है। इसलिए दोनों के बीच के संबंधों को भी इतिहास की चारदीवारी से बाहर निकलकर नई ऊँचाइयाँ तय करनी होंगी। उन्होंने कहा कि इतिहास ने दोनों को आपसी विश्वास दिया है, लेकिन भविष्य के लिए ठोस लक्ष्य और नई दृष्टि अपरिहार्य हैं।

यह संबोधन भारत की अफ्रीका नीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है — जहाँ भावनात्मक एकजुटता के साथ-साथ व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नए सिरे से परिभाषित किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली अहमियत उस बात में है जो उन्होंने नहीं कही — भविष्य के 'बड़े लक्ष्य' क्या होंगे, इसका कोई ठोस खाका नहीं आया। ग्लोबल साउथ की अगुआई का दावा करने वाले भारत के लिए अफ्रीका सबसे बड़ा असली परीक्षण है, जहाँ चीन पिछले दो दशकों से व्यापार और बुनियादी ढाँचे में कहीं आगे निकल चुका है। भावनात्मक एकजुटता की भाषा से आगे बढ़कर ठोस निवेश, तकनीकी हस्तांतरण और व्यापार समझौतों की घोषणा के बिना यह कूटनीतिक संदेश सिर्फ एक उम्दा भाषण बनकर रह जाने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर ने अदीस अबाबा में भारत-अफ्रीका संबंधों पर क्या कहा?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत-अफ्रीका संबंधों को अब केवल ऐतिहासिक एकजुटता की भाषा में नहीं समझाया जा सकता — भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य और नई सोच जरूरी है। यह संबोधन इथियोपिया के अडवा विजय स्मारक संग्रहालय से 10 अक्टूबर 2026 को दिया गया।
भारत और अफ्रीका के ऐतिहासिक संबंध कितने पुराने हैं?
जयशंकर के अनुसार, भारत और अफ्रीका का रिश्ता आधुनिक राष्ट्र-राज्यों के बनने से कहीं पहले, हजारों साल पुराना है। हिंद महासागर व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के आवागमन का माध्यम रहा है। गुजरात के व्यापारी पूर्वी अफ्रीका के तटों पर और अफ्रीकी मूल के सिद्दी समुदाय भारत में इसके जीवंत प्रमाण हैं।
जयशंकर ने औपनिवेशिक इतिहास को भारत-अफ्रीका संबंधों से कैसे जोड़ा?
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अफ्रीका दोनों ने औपनिवेशिक शासन की पीड़ा झेली है, इसीलिए भारत ने अफ्रीका के स्वतंत्रता संघर्षों को अपनी अधूरी आजादी की लड़ाई का हिस्सा माना। इसी साझा पीड़ा से एक मजबूत एकजुटता पैदा हुई, जो आज भी दोनों पक्षों की विदेश नीतियों में मौजूद है।
जयशंकर के अनुसार भारत-अफ्रीका साझेदारी के भविष्य के लिए क्या जरूरी है?
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि इतिहास ने दोनों को आपसी विश्वास दिया है, लेकिन भविष्य के लिए ठोस लक्ष्य और नई दृष्टि अपरिहार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि आजाद हुए देशों को एक निर्भरता से निकलकर दूसरी निर्भरता में नहीं फँसना चाहिए।
अडवा विजय स्मारक संग्रहालय का क्या महत्व है और जयशंकर वहाँ क्यों गए?
अडवा विजय स्मारक इथियोपिया में 1896 की उस ऐतिहासिक लड़ाई की याद में बना है, जिसमें इथियोपिया ने इतालवी उपनिवेशवाद को हराया था — यह अफ्रीकी स्वाधीनता का प्रतीक है। इस स्थान से संबोधन देकर जयशंकर ने उपनिवेशवाद-विरोध की साझा विरासत को रेखांकित किया और भारत-अफ्रीका कूटनीतिक जुड़ाव को ऐतिहासिक संदर्भ दिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 22 घंटे पहले
  2. कल
  3. 2 दिन पहले
  4. 3 दिन पहले
  5. 3 दिन पहले
  6. 4 दिन पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले