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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना का दूसरा चरण पूरा, 4 जिलों में फरवरी 2027 में होगी गणना

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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना का दूसरा चरण पूरा, 4 जिलों में फरवरी 2027 में होगी गणना

सारांश

भारत की पहली कागज-रहित जनगणना का बड़ा पड़ाव पार हो गया — जम्मू-कश्मीर के 16 बर्फीले जिले और पूरे लद्दाख में सितंबर में ही गणना पूरी। रक्षा बलों के आँकड़े एन्क्रिप्टेड होंगे। 2011 के बाद पहली बार नया डेटाबेस बनेगा, जो करोड़ों लोगों की कल्याण योजनाओं का आधार होगा।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर के 16 आंशिक बर्फीले जिलों और लद्दाख (लेह व कारगिल) में जनगणना का दूसरा चरण सितंबर 2026 में पूरा हुआ।
गणना 40 सवालों के आधार पर 1 से 30 सितंबर 2026 के बीच डिजिटल माध्यम से की गई।
रक्षा एवं अर्धसैनिक बलों की गणना सुरक्षा कारणों से कागजी अनुसूची पर हुई; बाद में एन्क्रिप्टेड डेटाबेस में शामिल होगी।
जम्मू, श्रीनगर, राजौरी और सांबा समेत शेष 4 जिलों में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना प्रस्तावित।
यह भारत की पहली कागज-रहित जनगणना है; केंद्र सरकार की योजनाओं में अब तक 2011 की जनगणना के आँकड़े उपयोग हो रहे हैं।

भारत की पहली कागज-रहित जनगणना के तहत जम्मू-कश्मीर के 16 आंशिक बर्फीले जिलों और लद्दाख के संपूर्ण बर्फाच्छादित क्षेत्रों — लेह और कारगिल — में जनसंख्या गणना का दूसरा चरण सफलतापूर्वक पूर्ण हो गया है। मुख्य जनगणना अधिकारी अमित शर्मा ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में जानकारी देते हुए बताया कि 1 से 30 सितंबर 2026 के बीच बर्फ से कटे रहने वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों में 40 सवालों के आधार पर जनसंख्या-संबंधी आँकड़े एकत्रित किए गए। शेष 4 जिलों — जम्मू, श्रीनगर, राजौरी और सांबा — में यह प्रक्रिया फरवरी 2027 में प्रस्तावित है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्य जनगणना अधिकारी अमित शर्मा ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के 16 आंशिक बर्फीले जिलों में चार जिलों — जम्मू, श्रीनगर, राजौरी और सांबा — को छोड़कर शेष सभी में सितंबर के दौरान गणना पूरी की गई। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि किश्तवाड़ जिला शत-प्रतिशत बर्फीले क्षेत्र में आता है और वहाँ भी यह कार्य संपन्न हो चुका है। लद्दाख में लेह और कारगिल — दोनों जिले इस अभियान में शामिल रहे।

उन्होंने कहा, 'बर्फबारी के कारण ये क्षेत्र बाद में कट जाते हैं और वहाँ गणना कराना मुश्किल हो जाता है। इसीलिए इन्हें पहले कवर किया गया।' यह पहला चरण — मकान सूचीकरण — पहले पूरा हो चुका था; जनसंख्या गणना का यह दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण है।

रक्षा बलों की गणना: कागजी अनुसूची पर

बर्फीले क्षेत्रों में तैनात रक्षा एवं अर्धसैनिक बलों के जवानों की गणना भी इस अभियान के तहत की गई, परंतु सुरक्षा कारणों और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए उनके आँकड़े कागजी अनुसूची पर दर्ज किए गए। अमित शर्मा ने स्पष्ट किया कि इन कागजी प्रपत्रों को बाद में डिजिटाइज़ कर एन्क्रिप्टेड माध्यम से केंद्रीय डेटाबेस में शामिल किया जाएगा। इस प्रकार नागरिक और रक्षा — दोनों वर्गों की बर्फीले क्षेत्र की संपूर्ण जनगणना गतिविधि पूरी हो गई है।

आम जनता और सरकारी योजनाओं पर असर

मुख्य जनगणना अधिकारी ने रेखांकित किया कि अभी तक केंद्र सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं में 2011 की जनगणना के आँकड़ों का उपयोग हो रहा है — जो पिछली और अंतिम पूर्ण जनगणना थी। नई जनगणना का डेटाबेस दूरदराज के क्षेत्रों के विकास और विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के लिए आधार बनेगा। मकान सूचीकरण के दौरान चिह्नित सुविधाओं के आधार पर संसाधन आवंटन अधिक सटीक हो सकेगा।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में सटीक जनसंख्या-आँकड़े न केवल नागरिक कल्याण, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा नियोजन के लिए भी अहम माने जाते हैं।

जनगणना और चुनाव: भिन्न संस्थाएँ

कुछ वर्गों में यह सवाल उठा कि क्या जनगणना की समय-सीमा चुनावी कार्यक्रम से जुड़ी है। अमित शर्मा ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'इसका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। चुनाव एक अलग स्वायत्त संस्था है, जबकि यह भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त का कार्यालय है।' उन्होंने जनता से अपील की कि जब फरवरी 2027 में शेष जिलों में गणना हो, तब वे पूरा सहयोग करें।

क्या होगा आगे

जम्मू, श्रीनगर, राजौरी, सांबा तथा 16 आंशिक बर्फीले जिलों के बचे हुए क्षेत्रों में फरवरी 2027 में अधिसूचना जारी होने के बाद जनसंख्या गणना कराई जाएगी। यह कागज-रहित जनगणना पूरी तरह पूर्ण होने पर भारत के पास पहली बार डिजिटल-एन्क्रिप्टेड राष्ट्रीय जनसंख्या डेटाबेस होगा, जो नीति-निर्माण में दशकों पुरानी 2011 की जनगणना की जगह लेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि सीमावर्ती जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों की जनसांख्यिकी तेज़ी से बदली है। डिजिटल-एन्क्रिप्टेड जनगणना की दिशा में यह कदम स्वागतयोग्य है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि यह डेटा योजना-आवंटन में कितनी तेज़ी से अनुवादित होता है। फरवरी 2027 तक बड़े शहरी जिले — जम्मू और श्रीनगर — छूटे रहेंगे, जो संपूर्ण तस्वीर में एक महत्वपूर्ण रिक्तता है। रक्षा बलों के आँकड़ों को एन्क्रिप्टेड रखना तर्कसंगत है, परंतु इसकी पारदर्शी जवाबदेही-व्यवस्था सार्वजनिक नहीं की गई है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जनगणना का दूसरा चरण कब और कैसे पूरा हुआ?
जनगणना का दूसरा चरण — जनसंख्या गणना — 1 से 30 सितंबर 2026 के बीच जम्मू-कश्मीर के 16 आंशिक बर्फीले जिलों और लद्दाख के लेह व कारगिल जिलों में डिजिटल माध्यम से पूरा किया गया। इसमें 40 सवालों के आधार पर जनसंख्या-संबंधी आँकड़े एकत्रित किए गए।
शेष 4 जिलों में जनगणना कब होगी?
जम्मू, श्रीनगर, राजौरी और सांबा — इन चार जिलों में तथा 16 आंशिक बर्फीले जिलों के बचे क्षेत्रों में फरवरी 2027 में अधिसूचना जारी होने के बाद जनसंख्या गणना कराई जाएगी। मुख्य जनगणना अधिकारी अमित शर्मा के अनुसार यह सबसे संभावित समय-सीमा है।
रक्षा और अर्धसैनिक बलों की गणना अलग तरीके से क्यों की गई?
सुरक्षा कारणों और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए बर्फीले क्षेत्रों में तैनात रक्षा व अर्धसैनिक बलों की गणना कागजी अनुसूची पर की गई। इन आँकड़ों को बाद में डिजिटाइज़ कर एन्क्रिप्टेड तरीके से केंद्रीय डेटाबेस में शामिल किया जाएगा।
भारत की कागज-रहित जनगणना क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह भारत में पहली बार डिजिटल माध्यम से हो रही जनगणना है, जिसमें कागज के बजाय इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से आँकड़े एकत्रित किए जा रहे हैं। यह डेटाबेस केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार बनेगा और 2011 की जनगणना के पुराने आँकड़ों की जगह लेगा।
क्या जनगणना का चुनाव से कोई संबंध है?
मुख्य जनगणना अधिकारी अमित शर्मा ने स्पष्ट किया है कि जनगणना का चुनाव से कोई संबंध नहीं है। जनगणना भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा संचालित होती है, जबकि चुनाव एक अलग स्वायत्त संस्था — चुनाव आयोग — के अधीन है।
राष्ट्र प्रेस
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