जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना का दूसरा चरण पूरा, 4 जिलों में फरवरी 2027 में होगी गणना
सारांश
मुख्य बातें
भारत की पहली कागज-रहित जनगणना के तहत जम्मू-कश्मीर के 16 आंशिक बर्फीले जिलों और लद्दाख के संपूर्ण बर्फाच्छादित क्षेत्रों — लेह और कारगिल — में जनसंख्या गणना का दूसरा चरण सफलतापूर्वक पूर्ण हो गया है। मुख्य जनगणना अधिकारी अमित शर्मा ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में जानकारी देते हुए बताया कि 1 से 30 सितंबर 2026 के बीच बर्फ से कटे रहने वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों में 40 सवालों के आधार पर जनसंख्या-संबंधी आँकड़े एकत्रित किए गए। शेष 4 जिलों — जम्मू, श्रीनगर, राजौरी और सांबा — में यह प्रक्रिया फरवरी 2027 में प्रस्तावित है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्य जनगणना अधिकारी अमित शर्मा ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के 16 आंशिक बर्फीले जिलों में चार जिलों — जम्मू, श्रीनगर, राजौरी और सांबा — को छोड़कर शेष सभी में सितंबर के दौरान गणना पूरी की गई। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि किश्तवाड़ जिला शत-प्रतिशत बर्फीले क्षेत्र में आता है और वहाँ भी यह कार्य संपन्न हो चुका है। लद्दाख में लेह और कारगिल — दोनों जिले इस अभियान में शामिल रहे।
उन्होंने कहा, 'बर्फबारी के कारण ये क्षेत्र बाद में कट जाते हैं और वहाँ गणना कराना मुश्किल हो जाता है। इसीलिए इन्हें पहले कवर किया गया।' यह पहला चरण — मकान सूचीकरण — पहले पूरा हो चुका था; जनसंख्या गणना का यह दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
रक्षा बलों की गणना: कागजी अनुसूची पर
बर्फीले क्षेत्रों में तैनात रक्षा एवं अर्धसैनिक बलों के जवानों की गणना भी इस अभियान के तहत की गई, परंतु सुरक्षा कारणों और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए उनके आँकड़े कागजी अनुसूची पर दर्ज किए गए। अमित शर्मा ने स्पष्ट किया कि इन कागजी प्रपत्रों को बाद में डिजिटाइज़ कर एन्क्रिप्टेड माध्यम से केंद्रीय डेटाबेस में शामिल किया जाएगा। इस प्रकार नागरिक और रक्षा — दोनों वर्गों की बर्फीले क्षेत्र की संपूर्ण जनगणना गतिविधि पूरी हो गई है।
आम जनता और सरकारी योजनाओं पर असर
मुख्य जनगणना अधिकारी ने रेखांकित किया कि अभी तक केंद्र सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं में 2011 की जनगणना के आँकड़ों का उपयोग हो रहा है — जो पिछली और अंतिम पूर्ण जनगणना थी। नई जनगणना का डेटाबेस दूरदराज के क्षेत्रों के विकास और विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के लिए आधार बनेगा। मकान सूचीकरण के दौरान चिह्नित सुविधाओं के आधार पर संसाधन आवंटन अधिक सटीक हो सकेगा।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में सटीक जनसंख्या-आँकड़े न केवल नागरिक कल्याण, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा नियोजन के लिए भी अहम माने जाते हैं।
जनगणना और चुनाव: भिन्न संस्थाएँ
कुछ वर्गों में यह सवाल उठा कि क्या जनगणना की समय-सीमा चुनावी कार्यक्रम से जुड़ी है। अमित शर्मा ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'इसका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। चुनाव एक अलग स्वायत्त संस्था है, जबकि यह भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त का कार्यालय है।' उन्होंने जनता से अपील की कि जब फरवरी 2027 में शेष जिलों में गणना हो, तब वे पूरा सहयोग करें।
क्या होगा आगे
जम्मू, श्रीनगर, राजौरी, सांबा तथा 16 आंशिक बर्फीले जिलों के बचे हुए क्षेत्रों में फरवरी 2027 में अधिसूचना जारी होने के बाद जनसंख्या गणना कराई जाएगी। यह कागज-रहित जनगणना पूरी तरह पूर्ण होने पर भारत के पास पहली बार डिजिटल-एन्क्रिप्टेड राष्ट्रीय जनसंख्या डेटाबेस होगा, जो नीति-निर्माण में दशकों पुरानी 2011 की जनगणना की जगह लेगा।