जनगणना 2027: J&K उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्व-गणना पूरी की, नागरिकों से भागीदारी की अपील

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जनगणना 2027: J&K उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्व-गणना पूरी की, नागरिकों से भागीदारी की अपील

सारांश

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्वयं स्व-गणना पूरी कर नागरिकों को जनगणना 2027 में भाग लेने का संदेश दिया। यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना है और 25 राज्यों में 1.44 करोड़ से अधिक परिवार पहले ही इसमें शामिल हो चुके हैं।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जनगणना 2027 की स्व-गणना पहल में व्यक्तिगत रूप से भाग लिया।
जनगणना 2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल और कागज़-रहित जनगणना है।
25 राज्यों में आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अब तक 1.44 करोड़ से अधिक परिवार स्व-गणना पूरी कर चुके हैं।
फील्ड प्रगणक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन के ज़रिए डिजिटल रूप से डेटा एकत्र कर रहे हैं।
पारंपरिक घर-घर गणना प्रक्रिया भी डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ जारी रहेगी।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 18 मई 2025 को जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) पहल में व्यक्तिगत रूप से भाग लिया और जम्मू-कश्मीर के प्रत्येक परिवार से इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय सहयोग देने का आग्रह किया। यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना है, जिसमें मोबाइल-आधारित डेटा संग्रह और स्व-गणना तंत्र को एकीकृत किया गया है।

उपराज्यपाल की अपील और आधिकारिक संदेश

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जनगणना का पहला चरण शुरू हो चुका है और जम्मू-कश्मीर में भी यह अभियान प्रारंभ कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया न केवल देश के लिए, बल्कि जम्मू-कश्मीर और यहाँ के प्रत्येक नागरिक के लिए बेहद ज़रूरी है।

उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे बढ़-चढ़कर इसमें हिस्सा लें और अपने घर तथा परिवार के सदस्यों की सटीक जानकारी उपलब्ध कराएँ। सिन्हा ने विश्वास जताया कि प्रदेश के लोग इस राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएँगे।

एक्स पर आधिकारिक पोस्ट

जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल कार्यालय के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया गया: 'मैंने अपनी स्व-गणना पूरी कर ली है। इस चरण में घरों की सूची बनाना और आवास संबंधी कार्य शामिल हैं। मैं जम्मू-कश्मीर के हर परिवार से आग्रह करता हूँ कि वे स्वयं अपनी जानकारी दें और जनगणना में हिस्सा लें।'

पोस्ट में आगे कहा गया कि जनगणना 2027 का ऐतिहासिक महत्व इसलिए है क्योंकि यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल और कागज़-रहित जनगणना है, जिसमें उन्नत डिजिटल तकनीकों, मोबाइल-आधारित डेटा संग्रह प्रणालियों और स्वयं-गणना तंत्रों को एकीकृत किया गया है।

जनगणना 2027 की विशेषताएँ

यह जनगणना पहली बार डिजिटल माध्यमों के उपयोग के साथ आयोजित की जा रही है। व्यापक और सटीक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक घर-घर जाकर गणना की प्रक्रिया भी जारी रहेगी। फील्ड विजिट के दौरान प्रगणक (सर्वे अधिकारी) एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से डिजिटल रूप से डेटा एकत्र कर रहे हैं।

देशभर में उत्साहजनक प्रतिक्रिया

जनगणना कार्यों में पहली बार शुरू की गई स्व-गणना सुविधा को जनता से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है। 25 राज्यों में आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अब तक 1.44 करोड़ से अधिक परिवार स्व-गणना पूरी कर चुके हैं। गौरतलब है कि यह पहल जनगणना कार्यों के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और निवासियों को सुविधाजनक एवं सुरक्षित तरीके से भाग लेने का अवसर प्रदान करती है।

आगे की राह

जम्मू-कश्मीर में जनगणना अभियान की यह शुरुआत उस समय हुई है जब पूरे देश में डिजिटल शासन को बढ़ावा देने के प्रयास तेज़ हो रहे हैं। उपराज्यपाल की व्यक्तिगत भागीदारी से अपेक्षा है कि स्थानीय स्तर पर नागरिकों में इस अभियान के प्रति जागरूकता और उत्साह और बढ़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जम्मू-कश्मीर जैसे भौगोलिक रूप से जटिल और दूरदराज़ के इलाकों में डिजिटल जनगणना की पहुँच कितनी व्यावहारिक होगी। यह ऐसे समय में आया है जब देश में इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुँच अभी भी असमान है। 1.44 करोड़ परिवारों की भागीदारी उत्साहजनक है, लेकिन यह देश के कुल परिवारों के सापेक्ष अभी शुरुआती आँकड़ा है — और जम्मू-कश्मीर के दुर्गम क्षेत्रों में डिजिटल डिवाइड को पाटे बिना 'पहली डिजिटल जनगणना' का दावा अधूरा रहेगा।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनगणना 2027 की स्व-गणना प्रक्रिया क्या है?
जनगणना 2027 में पहली बार नागरिक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपने घर और परिवार के सदस्यों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में घरों की सूची बनाना और आवास संबंधी विवरण शामिल हैं।
जनगणना 2027 को ऐतिहासिक क्यों कहा जा रहा है?
जनगणना 2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल और कागज़-रहित जनगणना है। इसमें उन्नत डिजिटल तकनीकों, मोबाइल-आधारित डेटा संग्रह और स्व-गणना तंत्र को एकीकृत किया गया है, जो पिछली सभी जनगणनाओं से इसे अलग बनाता है।
अब तक कितने परिवार स्व-गणना पूरी कर चुके हैं?
25 राज्यों में आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अब तक 1.44 करोड़ से अधिक परिवार स्व-गणना पूरी कर चुके हैं। यह आँकड़ा इस डिजिटल पहल के प्रति जनता की उत्साहजनक प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
जम्मू-कश्मीर में जनगणना 2027 में कैसे भाग लें?
जम्मू-कश्मीर के नागरिक जनगणना के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर स्व-गणना पूरी कर सकते हैं। इसके अलावा, फील्ड प्रगणक मोबाइल एप्लिकेशन के ज़रिए घर-घर जाकर भी डेटा एकत्र कर रहे हैं।
क्या पारंपरिक घर-घर गणना भी जारी रहेगी?
हाँ, डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ पारंपरिक घर-घर जाकर गणना की प्रक्रिया भी जारी रहेगी। इसका उद्देश्य व्यापक और सटीक कवरेज सुनिश्चित करना है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ डिजिटल पहुँच सीमित है।
राष्ट्र प्रेस
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