जम्मू-कश्मीर में जनगणना 2027 की शुरुआत: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्वयं जनगणना पूरी कर नागरिकों से भागीदारी की अपील की
सारांश
मुख्य बातें
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 17 मई 2026 को स्वयं जनगणना पूरी कर जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में घर-परिवार सूचीकरण एवं आवास जनगणना (HLO) के पहले चरण का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने नागरिकों से इस ऐतिहासिक अभ्यास में सक्रिय भागीदारी का आग्रह करते हुए कहा कि जनगणना 2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल और कागज-रहित जनगणना है।
स्वयं जनगणना: क्या है और कब तक
17 मई 2026 से 31 मई 2026 तक चलने वाली स्व-गणना अवधि में नागरिक एक सुरक्षित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जनगणना संबंधी जानकारी सीधे डिजिटल रूप से जमा कर सकेंगे। इस चरण में आवास की स्थिति, घरेलू संपत्ति, स्वच्छता, पेयजल की उपलब्धता, बिजली, इंटरनेट, संचार एवं परिवहन सुविधाएँ तथा निर्माण का प्रकार जैसे पहलुओं पर जानकारी एकत्र की जाएगी। उपराज्यपाल ने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य संचालन में दक्षता, पारदर्शिता, सटीकता और वास्तविक समय की निगरानी सुनिश्चित करना है।
दूसरा चरण: जनसांख्यिकीय गणना फरवरी 2027 में
जनसंख्या गणना का दूसरा और मुख्य चरण सामान्य क्षेत्रों में फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। इसमें जनसंख्या, आयु, लिंग, साक्षरता, व्यवसाय, प्रवासन, वैवाहिक स्थिति, विकलांगता, प्रजनन दर और अन्य जनसांख्यिकीय एवं सामाजिक-आर्थिक संकेतकों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। यह डेटा नीति-निर्माण और संसाधन आवंटन के लिए अगले एक दशक तक आधार बनेगा।
ज़मीनी तैयारी: 27,000 से अधिक फील्ड कार्यकर्ता तैनात
भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय के समन्वय से जम्मू-कश्मीर में 27,000 से अधिक फील्ड कार्यकर्ता — जिनमें गणनाकर्ता और पर्यवेक्षक शामिल हैं — तैनात किए जा रहे हैं। इन सभी का पंजीकरण और डिजिटल एकीकरण जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMMS) के माध्यम से किया जा रहा है। क्यूआर कोड वाले नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए तैयार किए जा रहे हैं।
बहुस्तरीय प्रशिक्षण ढाँचा
जनगणना कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने के लिए एक व्यापक बहुस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है। राष्ट्रीय प्रशिक्षकों ने पहले मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया, जिन्होंने आगे जाकर विभिन्न जिलों में फील्ड प्रशिक्षकों को तैयार किया। प्रशिक्षण में जनगणना की अवधारणाओं, मोबाइल आधारित अनुप्रयोगों, डिजिटल डेटा संग्रहण, घरेलू सहभागिता तकनीकों और डेटा गोपनीयता प्रावधानों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
क्यों ऐतिहासिक है यह जनगणना
गौरतलब है कि जनगणना 2027 भारत में 2011 के बाद पहली जनगणना है — यानी एक दशक से अधिक के अंतराल के बाद। यह ऐसे समय में आई है जब नीति-निर्माण, चुनावी परिसीमन और कल्याणकारी योजनाओं के लिए अद्यतन जनसांख्यिकीय डेटा की माँग तेज़ हो गई थी। मोबाइल आधारित डेटा संग्रह और स्वयं जनगणना तंत्र इसे पिछले सभी अभ्यासों से अलग बनाते हैं। जम्मू-कश्मीर में इसकी शुरुआत उपराज्यपाल की सहभागिता से होना इस प्रक्रिया को प्रशासनिक प्राथमिकता का संकेत देता है।