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जन्माष्टमी पर जामनगर के मुस्लिम चित्रकार केएफ अली की कृष्ण ऑयल पेंटिंग, द्वारका से जोड़ा दिल का रिश्ता

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जन्माष्टमी पर जामनगर के मुस्लिम चित्रकार केएफ अली की कृष्ण ऑयल पेंटिंग, द्वारका से जोड़ा दिल का रिश्ता

सारांश

जामनगर के मुस्लिम चित्रकार केएफ अली की जन्माष्टमी पेंटिंग सिर्फ कला नहीं — यह द्वारका में बिताए सुनहरे सालों की यादों और कृष्ण भक्ति का कैनवस पर उतरा हुआ दिल है। 40 साल के अनुभव और 8-10 दिन की साधना से बनी यह कृति एकता और आस्था का अनूठा संदेश देती है।

मुख्य बातें

खुंभिया फखरुद्दीन अली (केएफ अली) , जामनगर, गुजरात के मुस्लिम चित्रकार हैं जिन्होंने जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की विशेष ऑयल पेंटिंग तैयार की।
पेंटिंग को आकार देने में 8 से 10 दिन की अनवरत मेहनत लगी; इस साल उन्होंने तीन तस्वीरें बनाई हैं।
केएफ अली को 11 वर्ष की आयु से चित्रकारी का शौक है और उनके पास लगभग 40 वर्षों का अनुभव है।
द्वारका में कार्यवश लंबे समय तक रहने के कारण उनका कृष्ण भक्ति और उस शहर से गहरा भावनात्मक नाता जुड़ा।
वे पिछले 5 से 7 वर्षों से हर जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को समर्पित पेंटिंग बनाने की परंपरा निभाते आ रहे हैं।

जामनगर के चित्रकार खुंभिया फखरुद्दीन अली (केएफ अली) ने इस जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को समर्पित एक विशेष ऑयल पेंटिंग कैनवस पर उकेरी है, जो द्वारका के प्रति उनके गहरे भावनात्मक लगाव और कृष्ण भक्ति की अभिव्यक्ति है। गुजरात के जामनगर में रहने वाले इस कलाकार ने यह कृति 8 से 10 दिनों की अनवरत मेहनत और एकाग्रता से तैयार की है।

पेंटिंग में क्या है खास

इस कैनवस पर भगवान कृष्ण की बांसुरी, द्वारका के आध्यात्मिक अनुभव और जन्माष्टमी से जुड़ी भावनाओं को एक साथ चित्रित किया गया है। इस साल केएफ अली ने भगवान कृष्ण की तीन तस्वीरें कैनवस पर उतारी हैं। यह पेंटिंग महज रंगों और रेखाओं का संयोजन नहीं, बल्कि एकता, भक्ति और कला के अनूठे संगम का संदेश देती है।

द्वारका से जुड़ा भावनात्मक नाता

केएफ अली ने बताया, 'मेरी अधिकतर पेंटिंग्स भगवान कृष्ण की दिव्य लीलाओं और द्वारका शहर से प्रेरित हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि मैंने अपनी जिंदगी के कुछ सबसे अहम और यादगार साल, जिन्हें मैं अपना सुनहरा दौर मानता हूँ, भगवान कृष्ण के पवित्र शहर द्वारका में बिताए हैं। इसीलिए भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका से मेरा दिल और मोहब्बत का नाता है।' कार्यवश लंबे समय तक द्वारका में रहने के दौरान वहाँ की धरती, भगवान द्वारकाधीश की भक्ति और आध्यात्मिक माहौल ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी।

चार दशकों का कलात्मक सफर

केएफ अली को 11 वर्ष की आयु से ही चित्रकारी का शौक था और यह शौक समय के साथ उनकी पहचान बन गया। आज उन्हें पेंटिंग के क्षेत्र में लगभग 40 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने कहा, 'पेंटिंग मेरे परिवार की परंपरा का हिस्सा रही है। मैं खुद 11 साल की उम्र से पेंटिंग कर रहा हूँ। मेरी अधिक से अधिक अनोखी ऑयल पेंटिंग होती हैं।' कैनवस पर ऑयल पेंटिंग का उनका विशिष्ट अंदाज़ उनकी कला को अलग पहचान देता है।

जन्माष्टमी की कलात्मक परंपरा

केएफ अली पिछले 5 से 7 वर्षों से हर जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक विशेष पेंटिंग तैयार करते आ रहे हैं। उनका मानना है कि भक्त और भगवान के बीच का रिश्ता किसी भौतिक धागे से नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम और अटूट आस्था से जुड़ा होता है। इस वर्ष भी उन्होंने अपनी इस परंपरा को जारी रखते हुए यह खूबसूरत कृति बनाई है, जो सांप्रदायिक सद्भाव और कलात्मक समर्पण का जीवंत उदाहरण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब इस तरह की कलात्मक अभिव्यक्तियाँ मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर हाशिये पर रह जाती हैं — जबकि ये समाज की असली बुनावट को दिखाती हैं।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केएफ अली कौन हैं और उन्होंने यह पेंटिंग क्यों बनाई?
केएफ अली यानी खुंभिया फखरुद्दीन अली गुजरात के जामनगर में रहने वाले मुस्लिम चित्रकार हैं जिन्हें लगभग 40 वर्षों का पेंटिंग अनुभव है। उन्होंने जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण को समर्पित ऑयल पेंटिंग बनाई, जो द्वारका में बिताए उनके यादगार वर्षों और कृष्ण भक्ति के प्रति उनके भावनात्मक लगाव की अभिव्यक्ति है।
इस पेंटिंग को बनाने में कितना समय लगा?
केएफ अली ने इस विशेष ऑयल पेंटिंग को 8 से 10 दिनों की लगातार मेहनत और एकाग्रता से तैयार किया। इस साल उन्होंने भगवान कृष्ण की तीन तस्वीरें कैनवस पर उकेरी हैं।
द्वारका से केएफ अली का क्या रिश्ता है?
केएफ अली को काम के सिलसिले में लंबे समय तक द्वारका में रहने का मौका मिला, जिसे वे अपना 'सुनहरा दौर' मानते हैं। द्वारका की धरती, भगवान द्वारकाधीश की भक्ति और वहाँ के आध्यात्मिक माहौल ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी और तब से कृष्ण भक्ति उनकी कला का केंद्र बन गई।
क्या केएफ अली हर साल जन्माष्टमी पर पेंटिंग बनाते हैं?
हाँ, केएफ अली पिछले 5 से 7 वर्षों से हर जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक विशेष पेंटिंग तैयार करने की परंपरा निभाते आ रहे हैं। इस वर्ष भी उन्होंने इस परंपरा को जारी रखा है।
इस पेंटिंग का सामाजिक संदेश क्या है?
यह पेंटिंग एकता, भक्ति और कला के अनूठे संगम का प्रतीक है। केएफ अली का मानना है कि भक्त और भगवान के बीच का रिश्ता धर्म की सीमाओं से परे, विश्वास, प्रेम और अटूट आस्था पर आधारित होता है।
राष्ट्र प्रेस
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