जापान की 82 स्थानीय विधानसभाओं की माँग: तीन गैर-परमाणु सिद्धांत बरकरार रखे ताकाइची सरकार
सारांश
मुख्य बातें
जापान की 82 स्थानीय विधानसभाओं ने 16 जुलाई 2026 तक केंद्र सरकार और संसद को औपचारिक प्रस्ताव भेजकर प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की सरकार से देश के तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों को बनाए रखने या उन्हें कानूनी दर्जा देने की अपील की है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह संख्या पिछली किसी भी सरकार के कार्यकाल की तुलना में कहीं अधिक है, जो जापानी नागरिकों की गहरी चिंता को उजागर करती है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले साल अक्टूबर में ताकाइची सरकार के सत्ता में आने के बाद से इन प्रस्तावों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है। इनमें 5 प्रीफेक्चरल (प्रांतीय) विधानसभाएँ, 48 शहरों की विधानसभाएँ और 29 कस्बों व वार्ड विधानसभाएँ शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि इनमें से किसी भी प्रस्ताव में तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों में संशोधन की माँग नहीं की गई — सभी प्रस्ताव इन्हें बनाए रखने के पक्ष में हैं।
तीन गैर-परमाणु सिद्धांत क्या हैं
जापान के तीन गैर-परमाणु सिद्धांत देश में परमाणु हथियार रखने, उनका निर्माण करने या जापानी क्षेत्र में उनके प्रवेश की अनुमति देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हैं। इन्हें 1971 में जापानी संसद ने औपचारिक रूप से अपनाया था और तब से ये देश की परमाणु नीति की आधारशिला बने हुए हैं। गौरतलब है कि जापान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिस पर परमाणु बम से हमला हुआ है — हिरोशिमा और नागासाकी पर 1945 में हुई बमबारी की त्रासदी आज भी इन सिद्धांतों की नैतिक बुनियाद है।
हिरोशिमा और नागासाकी की विशेष आवाज़
इस साल की शुरुआत में हिरोशिमा और नागासाकी शहरों की विधानसभाओं ने भी सरकार से तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों का पालन करने का आग्रह करते हुए प्रस्ताव पारित किए। हिरोशिमा नगर विधानसभा ने जनवरी में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कहा गया कि सत्तारूढ़ दल द्वारा इन सिद्धांतों में बदलाव की संभावित कोशिशों से गहरी चिंता पैदा हुई है। प्रस्ताव में सरकार से परमाणु बम हमलों का सामना कर चुके शहरों के नागरिकों की भावनाओं को गंभीरता से लेने की अपील की गई।
सरकार की स्थिति और विवाद
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ताकाइची सरकार जापान में परमाणु हथियारों के प्रवेश पर रोक लगाने वाले सिद्धांत में संशोधन पर विचार कर रही है। इस कथित कदम ने जापानी समाज के विभिन्न वर्गों में व्यापक चिंता उत्पन्न की है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वी एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और जापान अपनी रक्षा नीति में व्यापक बदलाव कर रहा है।
आगे क्या
82 विधानसभाओं के इन प्रस्तावों का केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ना तय है। आलोचकों का कहना है कि यदि सरकार तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों में किसी भी प्रकार का संशोधन करती है, तो यह जापान की दशकों पुरानी शांतिवादी पहचान के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ होगा। फिलहाल सरकार ने इस विषय पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है।