टोक्यो में हजारों लोगों का युद्ध-विरोधी प्रदर्शन, ताकाइची सरकार की सैन्य नीतियों पर आक्रोश
सारांश
मुख्य बातें
टोक्यो स्थित नेशनल डाइट बिल्डिंग के सामने 29 मई 2026 की शाम हजारों जापानी नागरिकों ने एक बड़ी युद्ध-विरोधी रैली निकाली, जिसमें प्रधानमंत्री साने ताकाइची की सरकार की सैन्य विस्तारवादी नीतियों के प्रति तीखा विरोध दर्ज कराया गया। रैली का केंद्रीय संदेश था — 'युद्ध रोकना' — और प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर सरकार की नीतिगत दिशा को चुनौती दी।
प्रदर्शन का स्वरूप और नारे
प्रदर्शनकारियों ने 'विनाशकारी हथियारों के निर्यात का विरोध करो' और 'युद्ध का धंधा बंद करो' जैसे बैनर थामे हुए थे। भीड़ में 'युद्ध नहीं', 'सैन्य विस्तार का विरोध करो' और 'शांति की रक्षा करो' के नारे गूंजते रहे। यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं था — इसमें आम नागरिकों, अभिभावकों और शांति-समर्थक संगठनों की व्यापक भागीदारी देखी गई।
प्रदर्शनकारियों की आवाज़
प्रदर्शनकारी मात्सुजावा ने कहा कि उन्हें दृढ़ता से लगता है कि जापान तेज़ी से सैन्यीकरण की राह पर बढ़ रहा है। उन्होंने ताकाइची सरकार द्वारा संविधान के अनुच्छेद 9 में संशोधन करने और जासूसी-विरोधी कानून लागू करने के प्रयासों को इसका प्रमाण बताया। मात्सुजावा ने कहा, 'ये उपाय द्वितीय विश्व युद्ध से पहले के जापान की याद दिलाते हैं। मेरा बच्चा प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता है, और मुझे लगता है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो मैं अपने बच्चों के लिए एक शांतिपूर्ण जापान नहीं छोड़ पाऊंगा।'
ताकाइची सरकार की नीतिगत पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ताकाइची सरकार एक साथ घरेलू स्तर पर सैन्य विस्तार को बढ़ावा दे रही है और पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा संबंधों को प्रगाढ़ करने में जुटी है। 28 मई को ताकाइची ने जापान दौरे पर आए फिलीपींस के राष्ट्रपति मार्कोस के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों पक्षों ने फिलीपींस को विध्वंसक पोतों सहित रक्षा उपकरणों के जापान के निर्यात को बढ़ावा देने पर कई समझौतों पर सहमति जताई।
आगे क्या होगा
यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब जापान की संसद में संविधान संशोधन और नए सुरक्षा कानूनों पर बहस तेज़ हो रही है। नागरिक समाज संगठनों ने संकेत दिया है कि यदि सरकार अपनी नीतिगत दिशा नहीं बदलती, तो आने वाले हफ्तों में और बड़े प्रदर्शन हो सकते हैं। जापान की शांतिवादी संवैधानिक परंपरा और बढ़ती सुरक्षा महत्वाकांक्षाओं के बीच यह टकराव अब सड़कों पर साफ़ दिखने लगा है।