क्या झारखंड हाईकोर्ट ने छात्रों को परीक्षा से रोकने वाली सीबीआई जांच का आदेश दिया?

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क्या झारखंड हाईकोर्ट ने छात्रों को परीक्षा से रोकने वाली सीबीआई जांच का आदेश दिया?

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद स्थित तकनीकी संस्थान के छात्रों को परीक्षा से रोकने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया है। एआईसीटीई की मंजूरी के बावजूद छात्रों को परीक्षा में शामिल होने से वंचित किए जाने पर अदालत ने गंभीर टिप्पणी की। जानिए इस मामले की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है।
  • एआईसीटीई की मंजूरी के बावजूद छात्रों को परीक्षा से रोका गया।
  • धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्राचार्य ने मामला दायर किया था।
  • अदालत ने जेयूटी की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी की।
  • मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी।

रांची, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद में स्थित एक तकनीकी संस्थान में नामांकन के लिए ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) की मंजूरी के बावजूद छात्रों को परीक्षा से रोके जाने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया है। धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्राचार्य द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मंगलवार को झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और एआईसीटीई की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी करते हुए यह आदेश पारित किया है।

अदालत के निर्देश पर झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (जेयूटी) के रजिस्ट्रार स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। रिकॉर्ड के अवलोकन के दौरान कोर्ट ने पाया कि एआईसीटीई ने 30 अप्रैल 2025 को याचिकाकर्ता संस्थान को शैक्षणिक सत्र 2025-26 में नामांकन के लिए विधिवत अनुमति प्रदान की थी। इसके आधार पर कॉलेज में छात्रों का नामांकन कराया गया, लेकिन बाद में झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट ने इस स्थिति की तुलना ट्रैफिक पुलिस द्वारा ‘नो एंट्री’ या ‘नो पार्किंग’ का बोर्ड हटाकर आम जनता को फंसाने से की और कहा कि प्रथम दृष्टया जेयूटी ने भी इसी तरह का रवैया अपनाया है। अदालत ने टिप्पणी की कि यह मामला केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ का प्रतीत होता है।

कोर्ट के अनुसार, पहली नजर में यह राज्य की एजेंसियों द्वारा किया गया अत्यंत गंभीर और भ्रष्ट आचरण भी हो सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, हाईकोर्ट ने यूनियन ऑफ इंडिया के माध्यम से सीबीआई को प्रतिवादी के रूप में पक्षकार बनाया और जांच का आदेश दिया।

अदालत ने सीबीआई को यह जांचने का निर्देश दिया है कि एआईसीटीई और जेयूटी ने किस प्रक्रिया के तहत छात्रों को नामांकन के बाद परीक्षा से वंचित किया और इसमें किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही। इस संबंध में सीबीआई की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया प्रशांत पल्लव ने नोटिस प्राप्त किया।

हाईकोर्ट ने सीबीआई को दो सप्ताह के भीतर सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। साथ ही जेयूटी और एआईसीटीई को जांच एजेंसी को पूर्ण सहयोग देने का निर्देश भी दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को निर्धारित की गई है।

Point of View

NationPress
13/03/2026

Frequently Asked Questions

क्या एआईसीटीई ने छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी?
हाँ, एआईसीटीई ने छात्रों को नामांकन के लिए अनुमति दी थी, लेकिन झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने उन्हें परीक्षा में शामिल होने से रोका।
सीबीआई जांच का आदेश क्यों दिया गया?
हाईकोर्ट ने माना कि यह मामला केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ का प्रतीत होता है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी।
क्या छात्र अदालत की मदद कर सकते हैं?
हाँ, छात्र मामले के संबंध में अदालत में अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन उन्हें उचित कानूनी सलाह लेनी चाहिए।
क्या एआईसीटीई और जेयूटी को जांच में सहयोग देना होगा?
हाँ, अदालत ने दोनों संस्थानों को सीबीआई जांच में सहयोग देने का निर्देश दिया है।
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